'एक देश ने आबादी से 8 गुना ज्यादा जमा कर ली वैक्सीन', जयशंकर का भारतीयों से भरे देश से इशारों में अमेरिका पर बड़ा तंज
पारामारिबो: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सुरीनाम में कहा है कि 'आज दुनिया संसाधनों का इस्तेमाल हथियार की तरह कर रही है।' तेजी से बदलते वैश्विक व्यवस्था के बारे में आगाह करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि दुनिया वित्त, संसाधनों, तकनीक और कनेक्टिविटी के अभूतपूर्व "हथियारीकरण" को देख रही है। क्योंकि देश अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आर्थिक और बाजार के प्रभाव का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं। उन्होंने इस दौरान भारत के वैक्सीन डिप्लोमेसी का जिक्र करते हुए 'एक विकसित' देश पर तंज कसा और कहा कि कोविड काल में एक देश ने अपनी जनसंख्या से आठ गुना ज्यादा वैक्सीन जमा कर रखा था।

पारामारिबो में सूरीनाम के समाज के विभिन्न वर्गों को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि वैश्विक शक्ति के बारे में पारंपरिक धारणाएं अब बदल रही है और अब देश आर्थिक साधनों और बाजार पर अपनी पकड़ का इस्तेमाल प्रभाव डालने के औजारों के तौर पर कर रहे हैं। उन्होंने कहा "हम वित्त, संसाधनों, प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी और यहां तक कि भूगोल का भी हथियार के तौर पर इस्तेमाल होते देख रहे हैं।" आपको बता दें कि सूरीनाम गिरमिटियाओं का देश है और आजादी से पहले हजारों भारतीयों को अंग्रेज वहां बंधुआ मजदूर बनाकर ले गये थे जो अब शक्तिशाली समुदाय में बदल गये हैं।
सूरीनाम से जयशंकर ने दी चेतावनीअमेरिका का उदाहरण देते हुए जयशंकर ने कहा कि एक प्रमुख ऊर्जा आयातक से दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक बनने के उसके बदलाव के दूरगामी नीतिगत और भू-राजनीतिक परिणाम हुए हैं। मौजूदा वैश्विक माहौल को एक मुश्किल दुनिया बताते हुए विदेश मंत्री ने लगातार आए संकटों के जरिए बदलने वाली स्थितियों के बारे में बात की। उन्होंने COVID-19 महामारी से शुरुआत करते हुए जिसने दुनिया भर के समाजों और अर्थव्यवस्थाओं को अस्त-व्यस्त कर दिया था, कहा कि वैश्विक व्यवस्था अभी पूरी तरह से उबर भी नहीं पाई थी कि यूक्रेन संकट शुरू हो गया। उन्होंने कहा "जिसके बारे में कई लोगों को उम्मीद थी कि यह कुछ हफ्तों तक चलेगा वह अब सालों तक खिंच गया है।"
एक देश ने जमा रखी थी आठ गुना ज्यादा वैक्सीनसूरीनाम के समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने भारत की वैक्सीन डिप्लोमेसी का जिक्र करते हुए एक विकसित देश पर पर तंज कसा। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने वैक्सी वितरण में भारी असमानता की तरफ इशारा किया जो संकट के चरम पर होने के दौरान सामने आई थी। उन्होंने कहा कि कुछ देशों ने अपनी "आबादी से आठ गुना ज्यादा" वैक्सीन का "भंडारण" कर लिया था जबकि विकासशील दुनिया पीछे रह गई थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने देश की "वैक्सीन मैत्री" पहल पर रोशनी डालते हुए कहा कि "उस समय भारत ही वह देश था जिसने इस मुश्किल घड़ी में आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली। हमने बड़ी संख्या में देशों और अंतरराष्ट्रीय पहलों को वैक्सीन की आपूर्ति की।"
दुनिया की अर्थव्यवस्था को 'जोखिम-मुक्त' बनाने में भारत की भूमिकाभारतीय विदेश मंत्री ने इस दौरान भारत के बढ़ते आर्थिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों का हवाला दिया जिनके अनुसार इस वर्ष वैश्विक विकास में भारत का योगदान 17 प्रतिशत रहेगा। उन्होंने कहा "जैसे-जैसे हम अपनी क्षमताएं बढ़ा रहे हैं हम दूसरों के लिए भी नए विकल्प खोल रहे हैं।" इस तरह उन्होंने भारत को एक ऐसी स्थिर शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया जो बाजार तक पहुंच बढ़ाकर और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाकर अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को "जोखिम-मुक्त" बनाने में मदद करती है।
पारामारिबो में सूरीनाम के समाज के विभिन्न वर्गों को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि वैश्विक शक्ति के बारे में पारंपरिक धारणाएं अब बदल रही है और अब देश आर्थिक साधनों और बाजार पर अपनी पकड़ का इस्तेमाल प्रभाव डालने के औजारों के तौर पर कर रहे हैं। उन्होंने कहा "हम वित्त, संसाधनों, प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी और यहां तक कि भूगोल का भी हथियार के तौर पर इस्तेमाल होते देख रहे हैं।" आपको बता दें कि सूरीनाम गिरमिटियाओं का देश है और आजादी से पहले हजारों भारतीयों को अंग्रेज वहां बंधुआ मजदूर बनाकर ले गये थे जो अब शक्तिशाली समुदाय में बदल गये हैं।
सूरीनाम से जयशंकर ने दी चेतावनीअमेरिका का उदाहरण देते हुए जयशंकर ने कहा कि एक प्रमुख ऊर्जा आयातक से दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक बनने के उसके बदलाव के दूरगामी नीतिगत और भू-राजनीतिक परिणाम हुए हैं। मौजूदा वैश्विक माहौल को एक मुश्किल दुनिया बताते हुए विदेश मंत्री ने लगातार आए संकटों के जरिए बदलने वाली स्थितियों के बारे में बात की। उन्होंने COVID-19 महामारी से शुरुआत करते हुए जिसने दुनिया भर के समाजों और अर्थव्यवस्थाओं को अस्त-व्यस्त कर दिया था, कहा कि वैश्विक व्यवस्था अभी पूरी तरह से उबर भी नहीं पाई थी कि यूक्रेन संकट शुरू हो गया। उन्होंने कहा "जिसके बारे में कई लोगों को उम्मीद थी कि यह कुछ हफ्तों तक चलेगा वह अब सालों तक खिंच गया है।"
एक देश ने जमा रखी थी आठ गुना ज्यादा वैक्सीनसूरीनाम के समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने भारत की वैक्सीन डिप्लोमेसी का जिक्र करते हुए एक विकसित देश पर पर तंज कसा। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने वैक्सी वितरण में भारी असमानता की तरफ इशारा किया जो संकट के चरम पर होने के दौरान सामने आई थी। उन्होंने कहा कि कुछ देशों ने अपनी "आबादी से आठ गुना ज्यादा" वैक्सीन का "भंडारण" कर लिया था जबकि विकासशील दुनिया पीछे रह गई थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने देश की "वैक्सीन मैत्री" पहल पर रोशनी डालते हुए कहा कि "उस समय भारत ही वह देश था जिसने इस मुश्किल घड़ी में आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली। हमने बड़ी संख्या में देशों और अंतरराष्ट्रीय पहलों को वैक्सीन की आपूर्ति की।"
दुनिया की अर्थव्यवस्था को 'जोखिम-मुक्त' बनाने में भारत की भूमिकाभारतीय विदेश मंत्री ने इस दौरान भारत के बढ़ते आर्थिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों का हवाला दिया जिनके अनुसार इस वर्ष वैश्विक विकास में भारत का योगदान 17 प्रतिशत रहेगा। उन्होंने कहा "जैसे-जैसे हम अपनी क्षमताएं बढ़ा रहे हैं हम दूसरों के लिए भी नए विकल्प खोल रहे हैं।" इस तरह उन्होंने भारत को एक ऐसी स्थिर शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया जो बाजार तक पहुंच बढ़ाकर और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाकर अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को "जोखिम-मुक्त" बनाने में मदद करती है।
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