होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कंट्रोल, IRGC का नया टोल-पास सिस्टम क्या है, जहाजों के लिए किया गया लागू
तेहरान: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण को औपचारिक रूप दे दिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) की स्थापना की है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही की आवाजाही पर निगरानी रखेगी। इस नई व्यवस्था के तहत तेहरान ने सभी व्यापारिक जहाजों को गुजरने की अनुमति लेने से पहले एक सख्त प्रोटोकॉल का पालन करने की मांग की है।

तेहरान के इस प्रोटोकॉल में जहाजों को उसमें लदे माल, मालिकाना हक और चालक दल की राष्ट्रीयता के बारे में 40 सवालों का एक घोषणा पत्र जमा करना होगा। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक जो जहाज इन मांगों को नजर अंदाज करते हैं, उन्हें ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले या ईरानी नेवी के कब्जा किए जाने का खतरा बना रहेगा।
दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा जलमार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इस संकरे जलमार्ग का संचालन अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट नियमों के तहत होता था, लेकिन फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के हमलों के ईरान का रुख इस पर बदल गया है। तेहरान अब इसे अपने नियंत्रण वाले गलियारे के रूप में देख रहा है।
IRGC ने जहाजों के लिए अनिवार्य कर दिया है कि वे पर्शियल गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी को अपने पहचान नंबर और उनके पिछले नामों की जानकारी ईमेल करें। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ऐक्शन से बचने के लिए पूरी और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही एकमात्र तरीका है।
रिपोर्ट से पता चलता है कि जहाजों को सुरक्षित गुजरने के लिए ईरान भारी-भरकम टोल वसूल रहा है। हालांकि, ईरान ने टोल से इनकार किया है लेकिन कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि जहाजों से 20 लाख डॉलर तक की राशि टोल के रूप में मांगी जा रही है। अमेरिका ने जहाजों से कहा है कि वे ईरान को टोल न दें। वॉशिंगटन का दावा है कि इससे IRGC को फंड मिलता है, लेकिन ईरान का कहना है कि होर्मुज से गुजरने के लिए उसकी शर्तों को मानना ही एकमात्र तरीका है।
ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर बड़ा असर
होर्मुज में इस जहाजों की आवाजाही पर रोक से ग्लोबल ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। फरवरी के आखिर में संकट शुरू होने से पहले इस जलमार्ग से हर दिन लगभग 120 जहाज गुजरते थे। मई की शुरुआत तक यह आंकड़ा गिरकर 40 रह गया। इससे दुनिया भर तेल और गैस की कीमतों पर असर पड़ा है। अमेरिका में पेट्रोल कीमतें 4.50 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई हैं। अभी भी सैकड़ों जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। वहीं, होर्मुज के बाहर स्थित जहाजों को दूसरे रास्तों पर मोड़ दिया गया है।
तेहरान के इस प्रोटोकॉल में जहाजों को उसमें लदे माल, मालिकाना हक और चालक दल की राष्ट्रीयता के बारे में 40 सवालों का एक घोषणा पत्र जमा करना होगा। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक जो जहाज इन मांगों को नजर अंदाज करते हैं, उन्हें ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले या ईरानी नेवी के कब्जा किए जाने का खतरा बना रहेगा।
दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा जलमार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इस संकरे जलमार्ग का संचालन अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट नियमों के तहत होता था, लेकिन फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के हमलों के ईरान का रुख इस पर बदल गया है। तेहरान अब इसे अपने नियंत्रण वाले गलियारे के रूप में देख रहा है।
IRGC ने जहाजों के लिए अनिवार्य कर दिया है कि वे पर्शियल गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी को अपने पहचान नंबर और उनके पिछले नामों की जानकारी ईमेल करें। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ऐक्शन से बचने के लिए पूरी और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही एकमात्र तरीका है।
रिपोर्ट से पता चलता है कि जहाजों को सुरक्षित गुजरने के लिए ईरान भारी-भरकम टोल वसूल रहा है। हालांकि, ईरान ने टोल से इनकार किया है लेकिन कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि जहाजों से 20 लाख डॉलर तक की राशि टोल के रूप में मांगी जा रही है। अमेरिका ने जहाजों से कहा है कि वे ईरान को टोल न दें। वॉशिंगटन का दावा है कि इससे IRGC को फंड मिलता है, लेकिन ईरान का कहना है कि होर्मुज से गुजरने के लिए उसकी शर्तों को मानना ही एकमात्र तरीका है।
ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर बड़ा असर
होर्मुज में इस जहाजों की आवाजाही पर रोक से ग्लोबल ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। फरवरी के आखिर में संकट शुरू होने से पहले इस जलमार्ग से हर दिन लगभग 120 जहाज गुजरते थे। मई की शुरुआत तक यह आंकड़ा गिरकर 40 रह गया। इससे दुनिया भर तेल और गैस की कीमतों पर असर पड़ा है। अमेरिका में पेट्रोल कीमतें 4.50 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई हैं। अभी भी सैकड़ों जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। वहीं, होर्मुज के बाहर स्थित जहाजों को दूसरे रास्तों पर मोड़ दिया गया है।
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