Nepal News: सुदन गुरुंग कौन हैं, 26 दिनों में ही नेपाल के गृहमंत्री पद से देना पड़ा इस्तीफा, बालेन शाह के लिए कितना बड़ा झटका

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काठमांडू: नेपाल में पिछले साल हुए हुए Gen-Z आंदोलन के एक नेता सुदन गुरुंग ने चंद दिनों पहले ही गृह मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। उन्होंने प्रधानमंत्री बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हुए गोरखा निर्वाचन क्षेत्र संख्या-1 से चुनाव में जीत हासिल की थी। लेकिन, लगातार विवादों में घिरने के बाद, उन्हें 26 दिनों के भीतर ही इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। बुधवार को सुदन गुरुंग ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री बालेन शाह को सौंप दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि सुदन गुरुंग को आखिर किस वजह से गृह मंत्री जैसे शक्तिशाली पद से इतनी जल्दी इस्तीफा देने पड़ा है।
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सुदन गुरुंग नेपाल के इतने बड़े नेता कैसे बने
सुदन गुरुंग एक गैर राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनकी राजनीति में पहचान पिछले साल हुए Gen-Z आंदोलन के दौरान मिली। जब नेपाल में पिछले साल Gen-Z आंदोलन परवान चढ़ा, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद हामी नेपाल नाम के एक संगठन ने युवाओं को संगठित करना शुरू कर दिया। सुदन गुरुंग इसी हामी नेपाल संगठन के नेता हैं। आक्रामक तरीके से भाषण देने की शैली के कारण सुदन गुरुंग युवाओं में जल्द लोकप्रिय हो गए। हालांकि, वो खुद को एक एक्टिविस्ट बताते हैं। उनके एनजीओ का रजिस्ट्रेशन 2020 में हुआ है। गुरुंग का संगठन नेपाल में प्राकृतिक आपदाओं के समय लोगों की मदद करने का दावा भी करता है।

सुदन गुरुंग विवादों में कैसे फंसे
गृह मंत्री बनने के अगले ही दिन गुरुंग ने गौरी बहादुर कार्की के नेतृत्व वाले आयोग की सिफारिशों के आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। देश के बड़े नेताओं की इतनी जल्दीबाजी में गिरफ्तारी का आदेश विवादों और चर्चाओं के केंद्र में रहा। इसके बाद पूर्व मंत्री दीपक खड़का, व्यवसायी दीपक भट्ट और शंकर ग्रुप के अध्यक्ष शंकर लाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया। इन हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियों के बाद, गुरुंग ने सोशल मीडिया पर संख्याओं का उल्लेख करते हुए एक 'काउंटडाउन' शुरू किया। हालांकि, जिन आरोपियों को उन्होंने गिरफ्तार किया था, उनमें से केवल व्यवसायी सुलभ अग्रवाल और दीपक भट्ट ही वर्तमान में हिरासत में हैं।

सुदन गुरुंग ने न्यायपालिका से भी लिया पंगा
ओली और लेखक की गिरफ्तारी के बाद, सुदन गुरुंग ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर Gen-Z आंदोलन के शहीदों के शवों की एक तस्वीर पोस्ट की। इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, 'वादा, वादा होता है: कानून से ऊपर कोई नहीं है; हमने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और निवर्तमान गृह मंत्री रमेश लेखक को हिरासत में ले लिया है। यह किसी से बदला नहीं है, बल्कि न्याय की बस शुरुआत है। मुझे विश्वास है कि अब देश एक नई दिशा लेगा।' जब अदालत ने केपी शर्मा ओली, रमेश लेखक, लुम्बिनी प्रांतीय सभा की सदस्य रेखा कुमारी शर्मा और दीपक खड़का को रिहा करने का आदेश दिया, तब भी सुदन गुरुंग ने बतौर गृहमंत्री कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने उसी दिन शाम को पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'ऐसा लगता है कि न्यायाधीश मंत्रियों से अधिक शक्तिशाली हैं। मैं अब कानून का अध्ययन कर रहा हूं।'

सुदन गुरुंग की संपत्ति पर विवाद
बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद नेपाल सरकार ने अपने सभी मंत्रियों की संपत्तियों का ब्योरा सार्वजनिक किया था। नेपाली प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी दस्तावेज में बताया गया था कि सुदन गुरुंग और उनके परिवार के पास लगभग 260 रोपनी जमीन है। नेपाल में जब लोगों को यह पता चला कि सुदन गुरुंग की संपत्ति के ब्योरे में 89 तोला सोना और 6 किलोग्राम चांदी का ज़िक्र है, तो सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना हुई। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'गरीब पैदा होना आपकी गलती नहीं है, लेकिन अगर आप गरीब ही मरते हैं, तो यह आपकी गलती है।' हालांकि, आलोचना के बाद गुरुंग ने वो स्टेटस हटा दिया।

सुदन गुरुंग का गिरफ्तार बिजनेसमैन से करीबी संबंध
भूमि अधिनियम के अनुसार, गुरुंग पर भूमि सीमा की शर्तें लागू हो सकती हैं। पोखरा में 20 रोपनी जमीन किराए पर लेने और उसका किराया न चुकाने की घटना को लेकर भी गुरुंग की काफ़ी आलोचना हुई थी। हाल ही में, यह बात सामने आई कि सुदन गुरुंग दीपक भट्ट की कंपनी में साझीदार थे। दीपक भट्ट इस समय मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में हिरासत में हैं। दीपक भट्ट की कंपनियों—लिबर्टी माइक्रो इंश्योरेंस और स्टार माइक्रो इंश्योरेंस—में सुदन गुरुंग ने शेयर भी खरीदा है, जिसे लेकर कई सवाल उठाए गए। जब शेयर खरीदने में इस्तेमाल किए गए पैसों के स्रोत को लेकर सवाल उठे, तो उन्होंने दावा किया कि शेयर खरीदने के लिए उन्होंने पैसे उधार लिए थे। कुल 50 लाख मूल्य के शेयरों और दीपक भट्ट के साथ अपने 'संबंध' के बारे में कोई संतोषजनक जवाब न दे पाने के कारण, सुदन गुरुंग को गृहमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा है।

सुदन गुरुंग के इस्तीफे से बालेन शाह को कितना नुकसान
सुदन गुरुंग का गृहमंत्री के पद से इस्तीफा प्रधानमंत्री बालेन शाह के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। बालेन शाह पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने हैं। कैबिनेट में सुदन गुरुंग, बालेन शाह के बाद दूसरे सबसे बड़े नेता थे। बालेन शाह पर बिना भ्रष्टाचार के नेपाल में काम करके दिखाने का भी भारी दबाव है। इस बीच सुदन गुरुंग का भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद इस्तीफा बालेन शाह की साख को भी कमजोर कर सकता है, जिस पर वह चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री चुने गए हैं। सुदान गुरुंग पेशे से एक सिविल इंजीनियर हैं। बालेन शाह स्वयं एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर हैं, इसलिए उनके बीच लंबे समय से पेशेवर सहयोग रहा है। बालेन के मेयर बनने से पहले, उन्होंने विभिन्न इंजीनियरिंग परियोजनाओं पर एक साथ काम किया था।