नूर खान को 'किला' बनाने में जुटा पाकिस्तान, भारत के लिए निगरानी होगी मुश्किल, इसी बेस पर उतरा था जेडी वेंस का प्लेन
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की आर्मी नूर खान एयरबेस को और ज्यादा मजबूत बनाने में जुटी है। यह पाकिस्तान का वही एयरबेस है, जिस पर बीते हफ्ते अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का जहाज उतरा था। पाकिस्तान की सुरक्षा और रणनीतिक लिहाज से अहम ये बेस बीते कई महीनों से चर्चा में है। यह बेस बीते साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के हमलों को निशाना बना था। इसके बाद से इस बेस में लगातार कुछ ना कुछ नया निर्माण या हलचल देखी गई है।

डेमियन साइमन ने अपने एक ट्वीट में बताया है कि पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर हैंगर बनाए जा रहे हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि बेस पर नया निर्माण कार्य चल रहा है। बेस पर नए हैंगर का अपग्रेड होना पाक एयरफोर्स को पर्यावरणीय सुरक्षा प्रदान करेगा। साथ ही यह साइट के ऊपर से ISR डेटा इकट्ठा करने को सीमित कर देगा। इससे भारत के लिए इस बेस पर हो रही गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाएगा।
इस्लामाबाद के पास है नूर खान बेसपाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित नूर खान एयर फोर्स बेस (पहले चकलाला बेस) की अहमियत राजधानी इस्लामाबाद के करीब होने की वजह से और बढ़ जाती है। यह बेस एक रणनीतिक लॉजिस्टिक्स हब के साथ-साथ अमेरिकी राजनयिक और सैन्य प्रतिनिधिमंडलों के लिए एक उच्च-सुरक्षा वाले प्रवेश द्वार के रूप में काम करता रहा है।
नूर खान बेस पाकिस्तान के स्ट्रेटेजिक प्लान्स डिवीजन (SPD) के मुख्यालय से महज एक मील की दूरी पर है। यह डिविजन पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार की देखरेख के लिए जिम्मेदार है। पाकिस्तान सेना का जनरल हेडक्वार्टर भी यहां से काफी करीब है। ऐसे में यह पाकिस्तानी आर्मी के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सुविधा है।
नूर खान बेस पर भारत के हमलेनूर खान एयरबेस पाक एयरफोर्स के हवाई गतिशीलता संचालन (एरियल मॉबिलिटी ऑपरेशन) के लिए कमांड सेंटर के रूप में काम करता है। यहां C-130 हरक्यूलिस और IL-78 मिड-एयर रिफ्यूलर जैसे महत्वपूर्ण परिवहन स्क्वाड्रन हैं। ये स्क्वाड्रन लॉजिस्टिकल और रणनीतिक एयरलिफ्ट क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।
स्थित नूर खान बेस को 10 मई, 2025 को भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान काफी नुकसान पहुंचा था। हमले के बाद मैक्सार से मिली सैटेलाइट तस्वीरों में बेस पर भारी तबाही साफ दिखाई दी थी। इसके बाद से पाकिस्तानी सेना ने इसे एक मजबूत किले में तब्दील करने पर जोर दिया है। इसके लिए लगातार निर्माण कराए गए हैं।
नूर खान पर अमेरिकी दखलपाकिस्तान के इस बेस पर अमेरिकी आर्मी की मौजूदगी लंबे समय से चर्चा में रही है। अफगानिस्तान युद्ध के दौरान अमेरिकी आर्मी ने नूर खान में अपनी लगभग स्थायी मौजूदगी बनाए रखी थी। अमेरिका ने बेस का इस्तेमाल आपूर्ति लाइनों और सैनिकों की आवाजाही के लिए किया था। इसके बाद भी अमेरिका के बेस में दखल का दावा किया जाता रहा है।
डेमियन साइमन ने अपने एक ट्वीट में बताया है कि पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर हैंगर बनाए जा रहे हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि बेस पर नया निर्माण कार्य चल रहा है। बेस पर नए हैंगर का अपग्रेड होना पाक एयरफोर्स को पर्यावरणीय सुरक्षा प्रदान करेगा। साथ ही यह साइट के ऊपर से ISR डेटा इकट्ठा करने को सीमित कर देगा। इससे भारत के लिए इस बेस पर हो रही गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाएगा।
इस्लामाबाद के पास है नूर खान बेसपाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित नूर खान एयर फोर्स बेस (पहले चकलाला बेस) की अहमियत राजधानी इस्लामाबाद के करीब होने की वजह से और बढ़ जाती है। यह बेस एक रणनीतिक लॉजिस्टिक्स हब के साथ-साथ अमेरिकी राजनयिक और सैन्य प्रतिनिधिमंडलों के लिए एक उच्च-सुरक्षा वाले प्रवेश द्वार के रूप में काम करता रहा है।
नूर खान बेस पाकिस्तान के स्ट्रेटेजिक प्लान्स डिवीजन (SPD) के मुख्यालय से महज एक मील की दूरी पर है। यह डिविजन पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार की देखरेख के लिए जिम्मेदार है। पाकिस्तान सेना का जनरल हेडक्वार्टर भी यहां से काफी करीब है। ऐसे में यह पाकिस्तानी आर्मी के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सुविधा है।
नूर खान बेस पर भारत के हमलेनूर खान एयरबेस पाक एयरफोर्स के हवाई गतिशीलता संचालन (एरियल मॉबिलिटी ऑपरेशन) के लिए कमांड सेंटर के रूप में काम करता है। यहां C-130 हरक्यूलिस और IL-78 मिड-एयर रिफ्यूलर जैसे महत्वपूर्ण परिवहन स्क्वाड्रन हैं। ये स्क्वाड्रन लॉजिस्टिकल और रणनीतिक एयरलिफ्ट क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।
स्थित नूर खान बेस को 10 मई, 2025 को भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान काफी नुकसान पहुंचा था। हमले के बाद मैक्सार से मिली सैटेलाइट तस्वीरों में बेस पर भारी तबाही साफ दिखाई दी थी। इसके बाद से पाकिस्तानी सेना ने इसे एक मजबूत किले में तब्दील करने पर जोर दिया है। इसके लिए लगातार निर्माण कराए गए हैं।
नूर खान पर अमेरिकी दखलपाकिस्तान के इस बेस पर अमेरिकी आर्मी की मौजूदगी लंबे समय से चर्चा में रही है। अफगानिस्तान युद्ध के दौरान अमेरिकी आर्मी ने नूर खान में अपनी लगभग स्थायी मौजूदगी बनाए रखी थी। अमेरिका ने बेस का इस्तेमाल आपूर्ति लाइनों और सैनिकों की आवाजाही के लिए किया था। इसके बाद भी अमेरिका के बेस में दखल का दावा किया जाता रहा है।
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