ट्रंप प्रशासन को टैरिफ मामले में बड़ा झटका, अमेरिकी न्यायालय ने 10% शुल्क को अवैध ठहराया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ के संबंध में एक और बड़ा झटका लगा है। न्यूयॉर्क स्थित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने यह निर्णय सुनाया है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत और अन्य देशों से आयात पर लगाया गया 10% सार्वभौमिक टैरिफ अवैध है। इस फैसले ने वैश्विक कंपनियों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
यह निर्णय अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा फरवरी में अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत वैश्विक टैरिफ लागू करने के ट्रंप के प्रयासों को खारिज करने के बाद आया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद, ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत सभी वैश्विक आयातों पर 10% शुल्क लगाने का निर्णय लिया। यह कानूनी प्रावधान राष्ट्रपति को अमेरिका के गंभीर भुगतान संतुलन घाटे को दूर करने के लिए शुल्क लगाने का अधिकार देता है.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने 2-1 के बहुमत से यह पाया कि ट्रंप प्रशासन ने आवश्यक शर्तों का दावा नहीं किया था। न्यायालय के अनुसार, राष्ट्रपति की घोषणा यह साबित करने में असफल रही कि वे आवश्यक शर्तें पूरी हुई हैं। पूर्व व्यापार वार्ताकारों का मानना है कि यह निर्णय ट्रंप के लिए एक झटका है, लेकिन इससे उनका प्रशासन वैश्विक शुल्क लागू करने के अन्य तरीकों से पीछे नहीं हटेगा।
वाशिंगटन ने पहले ही 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत नए वैश्विक शुल्क लगाने की योजना बनाई है, जो उन देशों पर शुल्क लगाने की अनुमति देता है जो अमेरिका के खिलाफ अनुचित व्यापार प्रथाओं का उपयोग करते हैं।
विशेषज्ञों की राय
यूएस इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम के व्यापार नीति के वरिष्ठ सलाहकार मार्क लिन्स्कॉट का कहना है कि यह ट्रंप प्रशासन के लिए एक स्पष्ट झटका है, लेकिन इससे धारा 301 की जांच का उपयोग करने की योजना में कोई बदलाव नहीं आएगा। प्रशासन भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए मजबूत स्थिति में होगा और यह स्पष्ट है कि वे इन टैरिफ का लाभ उठाकर अपने पूर्व समझौतों को बनाए रखने और भारत के साथ लंबित समझौतों को पूरा करने की योजना बना रहे हैं।