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2026 ईरान क्रांति: मुल्ला शासन पर खतरा, रेजा पहलवी का बड़ा कदम

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ईरान की सड़कों पर इस समय जो हो रहा है, वह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि दशकों से दबे हुए गुस्से का एक ऐसा ज्वालामुखी है जो अब फट चुका है। तेहरान से लेकर छोटे कस्बों तक, जनता सड़कों पर है और उनके निशाने पर है देश का सर्वोच्च धार्मिक नेतृत्व। इस गहमागहमी के बीच, दुनिया की नजरें अब अमेरिका के फ्लोरिडा पर टिक गई हैं, जहां एक ऐसी मुलाकात होने की संभावना है जो ईरान के भविष्य की इबारत लिख सकती है। खबर है कि ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी अगले हफ्ते अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी आवास 'मार-ए-लागो' पहुंच सकते हैं।
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मार-ए-लागो में क्या होने वाला है?

क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी फ्लोरिडा में आयोजित होने वाले 'जेरूसलम प्रेयर ब्रेकफास्ट' में शामिल होने वाले हैं। यह कार्यक्रम डोनाल्ड ट्रंप के मशहूर क्लब मार-ए-लागो में होने जा रहा है। हालांकि अभी तक इस बात पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है कि ट्रंप और पहलवी के बीच वन-टू-वन मीटिंग होगी या नहीं, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में इस दौरे के कई मायने निकाले जा रहे हैं। यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब ईरान में अयातुल्ला खामेनेई की सत्ता को अब तक की सबसे बड़ी चुनौती मिल रही है और अमेरिका खुलकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन कर रहा है।

अगर यह मुलाकात होती है, तो यह ईरान के प्रदर्शनकारियों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश होगा। यह दिखाएगा कि दुनिया की महाशक्ति अमेरिका न सिर्फ उनके साथ है, बल्कि वह ईरान के भविष्य के नेतृत्व के तौर पर रेजा पहलवी को एक विकल्प के रूप में भी देख रहा है।


ट्रंप की सीधी चेतावनी: 'अगर लोगों को मारा, तो भारी कीमत चुकानी होगी'

डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा की तरह अपनी बेबाक शैली में ईरान सरकार को चेतावनी दे दी है। हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 'मैंने उन्हें बता दिया है कि अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं, जैसा कि वे अपने दंगों में करते हैं... तो हम उन्हें बहुत जोरदार जवाब देंगे.' ट्रंप ने पिछले महीने भी चेतावनी दी थी कि, अगर ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाएंगे तो परिणाम भुगतने होंगे। जब ट्रंप से प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि सभी मौतें सीधे सुरक्षा बलों की कार्रवाई का नतीजा नहीं थीं।

ईरान की सड़कों का हाल: 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे

ईरान के भीतर की तस्वीरें विचलित करने वाली हैं, लेकिन साथ ही वे जनता के साहस को भी दिखाती हैं। पिछले लगभग दो हफ्तों से लोग सड़कों पर डटे हुए हैं। यह विरोध प्रदर्शन अब 31 प्रांतों के 100 से ज्यादा शहरों में फैल चुका है। शुरुआत हुई थी गिरती हुई अर्थव्यवस्था और महंगाई से, लेकिन अब मांग सिर्फ एक है, 'इस्लामिक रिपब्लिक का खात्मा'।


सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे लोग अलाव जलाकर सड़कों को जाम कर रहे हैं और 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि कई जगहों पर 'रजा शाह, रूह है शाद' (राजा की आत्मा को शांति मिले) और 'शाह जिंदाबाद' जैसे नारे भी गूंज रहे हैं। यह वही ईरान है जहां कभी राजशाही के समर्थन को सबसे बड़ा अपराध माना जाता था। आज लोग उसी राजशाही के वारिस रजा पहलवी की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।

मानवाधिकार संगठनों के आंकड़ों की मानें तो इन प्रदर्शनों में अब तक 39 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें मासूम बच्चे भी शामिल हैं। हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है और इंटरनेट पर पाबंदी लगाकर सरकार सच को दबाने की कोशिश कर रही है। लेकिन जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

कौन हैं रेजा पहलवी और उनकी वापसी की चर्चा क्यों?

रेजा पहलवी ईरान के आखिरी बादशाह, मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद उनके परिवार को देश छोड़ना पड़ा था और तब से वे निर्वासन में रह रहे हैं। फिलहाल वे अमेरिका में रहते हैं। रेजा पहलवी खुद को किसी गद्दी का दावेदार नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ईरान का पैरोकार बताते हैं।

वे लगातार ईरान में मानवाधिकारों और महिलाओं की आजादी की बात करते रहे हैं। मौजूदा प्रदर्शनों में उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे एकजुट रहें और इस दमनकारी शासन को उखाड़ फेंकें। प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा तबका उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखता है जो ईरान को एकजुट रख सकता है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी आवाज बन सकता है।


भविष्य की ओर इशारा

रेजा पहलवी का मार-ए-लागो जाना महज एक यात्रा नहीं है। यह एक संकेत है कि ईरान में "सत्ता परिवर्तन" की स्क्रिप्ट पर काम हो रहा हो सकता है। एक तरफ ईरान की जनता सड़कों पर "मुल्लाओं को देश छोड़ना होगा" के नारे लगा रही है, और दूसरी तरफ अमेरिका में विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे का पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति के गढ़ में जाना, यह बताता है कि आने वाले दिन ईरान की राजनीति के लिए बेहद उथल-पुथल वाले हो सकते हैं।



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