500% टैरिफ का सच: क्या ट्रंप का नया बिल भारत की मुश्किलें बढ़ाएगा?
अमेरिका एक ऐसे कानून पर विचार कर रहा है जो उसे रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 500 फीसदी तक का टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की शक्ति देगा। इस बिल को राष्ट्रपति ट्रंप की मंजूरी भी मिल चुकी है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर भारत या चीन जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से सस्ता कच्चा तेल या यूरेनियम खरीदना जारी रखते हैं, तो अमेरिका उन पर भारी आर्थिक जुर्माना लगा सकता है या उनके सामानों पर अमेरिका में एंट्री टैक्स को 500 गुना तक बढ़ा सकता है।
यह कदम खास तौर पर ब्रिक्स (BRICS) देशों के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है, जो अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने और रूस के साथ अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने की कोशिश कर रहे हैं।
आंकड़े बताते हैं कि चीन के अलावा, अमेरिका रूसी यूरेनियम का एक बहुत बड़ा खरीदार है। अमेरिका विशेष रूप से अपने परमाणु रिएक्टरों के लिए रूस से 'लो-एनरिच्ड यूरेनियम' (Low-Enriched Uranium) खरीदता है। यह यूरेनियम अमेरिकी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
साल 2023 के आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिका ने रूस से लगभग 701 टन यूरेनियम खरीदा था। इस खरीद की कुल कीमत करीब 1.2 अरब डॉलर (लगभग 10,000 करोड़ रुपये) थी। यह व्यापार पुराने परमाणु आपूर्ति समझौतों और लाइसेंस व्यवस्था के तहत किया जा रहा है, जिसे अमेरिका ने अब तक अपनी सुविधा के अनुसार जारी रखा है।
यह स्थिति जिओ-पॉलिटिक्स (भू-राजनीति) के उस कड़वे सच को उजागर करती है जहां नियम ताकतवर देश अपनी सुविधानुसार बनाते और तोड़ते हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह एक कूटनीतिक चुनौती है। भारत ने हमेशा अपनी ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दी है और रूस से तेल खरीदकर अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा है। अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप प्रशासन वाकई इस 500% टैरिफ की धमकी को हकीकत में बदलता है, या यह केवल एक मोलभाव (Negotiation) की रणनीति है।
यह कदम खास तौर पर ब्रिक्स (BRICS) देशों के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है, जो अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने और रूस के साथ अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने की कोशिश कर रहे हैं।
खुद यूरेनियम खरीद रहा अमेरिका
इस पूरे प्रकरण में सबसे हैरान करने वाली बात अमेरिका का अपना व्यापारिक व्यवहार है। एक तरफ जहां वह भारत और चीन को रूस से दूर रहने की हिदायत दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह खुद रूस से भारी मात्रा में यूरेनियम खरीद रहा है।You may also like
- Agencies 'weaponised', says Abhishek Banerjee after ED raids
- Rooted in Tradition, Served with Warmth: Pongal at Madras Kitchen, Marriott Executive Apartments Bengaluru UB City
- "BJP is scared because all their corruption is about to be exposed": Congress' Gaurav Gogoi
- Section 163 of BNSS imposed near Faiz-e-Ilahi Mosque in Delhi
- Himachal High Court orders Panchayat elections before April 30, says Disaster law can't override constitutional mandate
आंकड़े बताते हैं कि चीन के अलावा, अमेरिका रूसी यूरेनियम का एक बहुत बड़ा खरीदार है। अमेरिका विशेष रूप से अपने परमाणु रिएक्टरों के लिए रूस से 'लो-एनरिच्ड यूरेनियम' (Low-Enriched Uranium) खरीदता है। यह यूरेनियम अमेरिकी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
साल 2023 के आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिका ने रूस से लगभग 701 टन यूरेनियम खरीदा था। इस खरीद की कुल कीमत करीब 1.2 अरब डॉलर (लगभग 10,000 करोड़ रुपये) थी। यह व्यापार पुराने परमाणु आपूर्ति समझौतों और लाइसेंस व्यवस्था के तहत किया जा रहा है, जिसे अमेरिका ने अब तक अपनी सुविधा के अनुसार जारी रखा है।
यह दोहरा मापदंड क्यों?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम विशुद्ध रूप से 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति से प्रेरित है, लेकिन इसमें नैतिकता की कमी साफ झलकती है। अमेरिका की दलील यह हो सकती है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूसी यूरेनियम जरूरी है क्योंकि उसके पास अभी तक इसका पर्याप्त विकल्प मौजूद नहीं है। लेकिन जब यही तर्क भारत या चीन अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए देते हैं, तो अमेरिका उसे 'प्रतिबंधों का उल्लंघन' या 'रूस की मदद' करार देता है।यह स्थिति जिओ-पॉलिटिक्स (भू-राजनीति) के उस कड़वे सच को उजागर करती है जहां नियम ताकतवर देश अपनी सुविधानुसार बनाते और तोड़ते हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह एक कूटनीतिक चुनौती है। भारत ने हमेशा अपनी ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दी है और रूस से तेल खरीदकर अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा है। अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप प्रशासन वाकई इस 500% टैरिफ की धमकी को हकीकत में बदलता है, या यह केवल एक मोलभाव (Negotiation) की रणनीति है।









