राधा सहस्रनाम स्तोत्र 2025: आध्यात्मिक शक्ति और कृपा का अनमोल उपहार

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राधा सहस्रनाम स्तोत्र का संपूर्ण पाठ



राधा सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आते हैं। यह स्तोत्र राधा जी की अनंत रूपों, गुणों और उनकी श्रीकृष्ण के साथ प्रेमपूर्ण लीला को प्रदर्शित करता है। नीचे दिया गया है राधा सहस्रनाम स्तोत्र का संपूर्ण पाठ:

राधासहस्रनामस्तोत्रम् 1 अकारादि क्षकारान्तानि


वन्दे वृन्दावनानन्दा राधिका परमेश्वरी।

गोपिकां परमां श्रेष्ठां ह्लादिनीं शक्तिरूपिणीम्।।



श्रीराधां परमाराज्यां कृष्णसेवापरायणाम्।

श्रीकृष्णाङ्ग सदाध्यात्री नवधाभक्तिकारिणी।।


येषां गुणमयी-राधा वृषभानुकुमारिका।

दामोदरप्रिया-राधा मनोभीष्टप्रदायिनी।।



तस्या नामसहस्रं त्वं श्रुणु भागवतोत्तमा।।

मानसतन्त्रे अनुष्टुप्छन्दसे अकारादि क्षकारान्तानि श्रीराधिकासहस्रनामानि।।


अथ स्तोत्रम्

ॐ अनन्तरूपिणी-राधा अपारगुणसागरा।

अध्यक्षरा आदिरूपा अनादिराशेश्वरी।



अणिमादि सिद्धिदात्री अधिदेवी अधीश्वरी।

अष्टसिद्धिप्रदादेवी अभया अखिलेश्वरी।।


अनङ्गमञ्जरीभग्ना अनङ्गदर्पनाशिनी।

अनुकम्पाप्रदा-राधा अपराधप्रणाशिनी।।


अन्तर्वेत्री अधिष्ठात्री अन्तर्यामी सनातनी।


अमला अबला बाला अतुला च अनूपमा।।


अशेषगुणसम्पन्ना अन्तःकरणवासिनी।

अच्युता रमणी आद्या अङ्गरागविधायिनी।।


अरविन्दपदद्वन्द्वा अध्यक्षा परमेश्वरी।

अवनीधारिणीदेवी अचिन्त्याद्भुतरूपिणी।।



अशेषगुणसाराच अशोकाशोकनाशिनी।

अभीष्टदा अंशमुखी अक्षयाद्भुतरूपिणी।।


अवलम्बा अधिष्ठात्री अकिञ्चनवरप्रदा।

अखिलानन्दिनी आद्या अयाना कृष्णमोहिनी।।


अवधीसर्वशास्त्राणामापदुद्धारिणी शुभा।


आह्लादिनी आदिशक्तिरन्नदा अभयापि च।।


अन्नपूर्णा अहोधन्या अतुल्या अभयप्रदा।

इन्दुमुखी दिव्यहासा इष्टभक्तिप्रदायिनी।।


इच्छामयी इच्छारूपा इन्दिरा ईश्वरीऽपरा।

इष्टदायीश्वरी माया इष्टमन्त्रस्वरूपिणी।।



ओङ्काररूपिणीदेवी उर्वीसर्वजनेश्वरी।

ऐरावतवती पूज्या अपारगुणसागरा।।


कृष्णप्राणाधिकाराधा कृष्णप्रेमविनोदिनी।

श्रीकृष्णाङ्गसदाध्यायी कृष्णानन्दप्रदायिनी।।


कृष्णाऽह्लादिनीदेवी कृष्णध्यानपरायणा।


कृष्णसम्मोहिनीनित्या कृष्णानन्दप्रवर्धिनी।।


कृष्णानन्दा सदानन्दा कृष्णकेलि सुखास्वदा।

कृष्णप्रिया कृष्णकान्ता कृष्णसेवापरायणा।।


कृष्णप्रेमाब्धिसभरी कृष्णप्रेमतरङ्गिणी।

कृष्णचित्तहरादेवी कीर्तिदाकुलपद्मिनी।।



कृष्णमुखी हासमुखी सदाकृष्णकुतूहली।

कृष्णानुरागिणी धन्या किशोरी कृष्णवल्लभा।।


कृष्णकामा कृष्णवन्द्या कृष्णाब्धे सर्वकामना।

कृष्णप्रेममयी-राधा कल्याणी कमलानना।।


कृष्णसून्मादिनी काम्या कृष्णलीला शिरोमणी।


कृष्णसञ्जीवनी-राधा कृष्णवक्षस्थलस्थिता।।


कृष्णप्रेमसदोन्मत्ता कृष्णसङ्गविलासिनी।

श्रीकृष्णरमणीराधा कृष्णप्रेमाऽकलङ्किणी।।


कृष्णप्रेमवतीकर्त्री कृष्णभक्तिपरायणा।

श्रीकृष्णमहिषी पूर्णा श्रीकृष्णाङ्गप्रियङ्करी।।



कामगात्रा कामरूपा कलिकल्मषनाशिनी।

कृष्णसंयुक्तकामेशी श्रीकृष्णप्रियवादिनी।।


कृष्णशक्ति काञ्चनाभा कृष्णाकृष्णप्रियासती।

कृष्णप्राणेश्वरी धीरा कमलाकुञ्जवासिनी।।


कृष्णप्राणाधिदेवी च किशोरानन्ददायिनी।


कृष्णप्रसाध्यमाना च कृष्णप्रेमपरायणा।।


कृष्णवक्षस्थितादेवी श्रीकृष्णाङ्गसदाव्रता।

कुञ्जाधिराजमहिषी पूजन्नूपुररञ्जनी।।


कारुण्यामृतपाधोधी कल्याणी करुणामयी।

कुन्दकुसुमदन्ता च कस्तूरिबिन्दुभिः शुभा।।



कुचकुटमलसौन्दर्या कृपामयी कृपाकरी।

कुञ्जविहारिणी गोपी कुन्ददामसुशोभिनी।।


कोमलाङ्गी कमलाङ्घ्री कमलाऽकमलानना।

कन्दर्पदमनादेवी कौमारी नवयौवना।।


कुङ्कुमाचर्चिताङ्गी च केसरीमध्यमोत्तमा।


काञ्चनाङ्गी कुरङ्गाक्षी कनकाञ्गुलिधारिणी।।


करुणार्णवसम्पूर्णा कृष्णप्रेमतरङ्गिणी।

कल्पदृमा कृपाध्यक्षा कृष्णसेवा परायणा।।


खञ्जनाक्षी खनीप्रेम्णा अखण्डिता मानकारिणी।

गोलोकधामिनी-राधा गोकुलानन्ददायिनी।।



गोविन्दवल्लभादेवी गोपिनी गुणसागरा।

गोपालवल्लभा गोपी गौराङ्गी गोधनेश्वरी।।


गोपाली गोपिकाश्रेष्ठा गोपकन्या गणेश्वरी।

गजेन्द्रगामिनीगन्या गन्धर्वकुलपावनी।।


गुणाध्यक्षा गणाध्यक्षा गवोन्गती गुणाकरा।


गुणगम्या गृहलक्ष्मी गोप्येचूडाग्रमालिका।।


गङ्गागीतागतिर्दात्री गायत्री ब्रह्मरूपिणी।

गन्धपुष्पधरादेवी गन्धमाल्यादिधारिणी।।


गोविन्दप्रेयसी धीरा गोविन्दबन्धकारणा।

ज्ञानदागुणदागम्या गोपिनी गुणशोभिनी।।



गोदावरी गुणातीता गोवर्धनधनप्रिया।

गोपिनी गोकुलेन्द्राणी गोपिका गुणशालिनी।।


गन्धेश्वरी गुणालम्बा गुणाङ्गी गुणपावनी।

गोपालस्य प्रियाराधा कुञ्जपुञ्जविहारिणी।।


गोकुलेन्दुमुखी वृन्दा गोपालप्राणवल्लभा।


गोपाङ्गनाप्रियाराधा गौराङ्गी गौरवान्विता।।


गोवत्सधारिणीवत्सा सुबलावेशधारिणी।

गीर्वाणवन्द्या गीर्वाणी गोपिनी गणशोभिता।।


घनश्यामप्रियाधीरा घोरसंसारतारिणी।

घूर्णायमाननयना घोरकल्मषनाशिनी।।



चैतन्यरूपिणीदेवी चित्तचैतन्यदायिनी।

चन्द्राननी चन्द्रकान्ती चन्द्रकोटिसमप्रभा।।


चन्द्रावली शुक्लपक्षा चन्द्राच कृष्णवल्लभा।

चन्द्रार्कनखरज्योती चारुवेणीशिखारुचिः।।


चन्दनैश्चर्चिताङ्गी च चतुराचञ्चलेक्षणा।


चारुगोरोचनागौरी चतुर्वर्गप्रदायिनी।।


श्रीमतीचतुराध्यक्षा चरमागतिदायिनी।

चराचरेश्वरीदेवी चिन्तातीता जगन्मयी।।


चतुःषष्टिकलालम्बा चम्पापुष्पविधारिणी।

चिन्मयी चित्शक्तिरूपा चर्चिताङ्गी मनोरमा।।



चित्रलेखाच श्रीरात्री चन्द्रकान्तिजितप्रभा।

चतुरापाङ्गमाधुर्या चारुचञ्चललोचना।।


छन्दोमयी छन्दरूपा छिद्रछन्दोविनाशिनी।

जगत्कर्त्री जगद्धात्री जगदाधाररूपिणी।।


जयङ्करी जगन्माता जयदादियकारिणी।


जयप्रदाजयालक्ष्मी जयन्ती सुयशप्रदा।।


जाम्बूनदा हेमकान्ती जयावती यशस्विनी।

जगहिता जगत्पूज्या जननी लोकपालिनी।।


जगद्धात्री जगत्कर्त्री जगद्बीजस्वरूपिणी।

जगन्माता योगमाया जीवानां गतिदायिनी।।



जीवाकृतिर्योगगम्या यशोदानन्ददायिनी।

जपाकुसुमसङ्काशा पादाब्जामणिमण्डिता।।


जानुद्युतिजितोत्फुल्ला यन्त्रणाविघ्नघातिनी।

जितेन्द्रिया यज्ञरूपा यज्ञाङ्गी जलशायिनी।।


जानकीजन्मशून्याच जन्ममृत्युजराहरा।


जाह्नवी यमुनारूपा जाम्बूनदस्वरूपिणी।।


झणत्कृतपदाम्भोजा जडतारिनिवारिणी।

टङ्कारिणी महाध्याना दिव्यवाद्यविनोदिनी।।


तप्तकाञ्चनवर्णाभा त्रैलोक्यलोकतारिणी।

तिलपुष्पजितानासा तुलसीमञ्जरीप्रिया।।



त्रैलोक्याऽकर्षिणी-राधा त्रिवर्गफलदायिनी।

तुलसीतोषकर्त्री च कृष्णचन्द्रतपस्विनी।।


तरुणादित्यसङ्काशा नखश्रेणिसमप्रभा।

त्रैलोक्यमङ्गलादेवी दिग्धमूलपदद्वयी।।


त्रैलोक्यजननी-राधा तापत्रयनिवारिणी।


त्रैलोक्यसुन्दरी धन्या तन्त्रमन्त्रस्वरूपिणी।।


त्रिकालज्ञा त्राणकर्त्री त्रैलोक्यमङ्गलासदा।

तेजस्विनी तपोमूर्ती तापत्रयविनाशिनी।।


त्रिगुणाधारिणी देवी तारिणी त्रिदशेश्वरी।

त्रयोदशवयोनित्या तरुणीनवयौवना।।



हृत्पद्मेस्थितिमति स्थानदात्री पदाम्बुजे।

स्थितिरूपा स्थिरा शान्ता स्थितसंसारपालिनी।।


दामोदरप्रियाधीरा दुर्वासोवरदायिनी।

दयामयी दयाध्यक्षा दिव्ययोगप्रदर्शिनी।।


दिव्यानुलेपनारागा दिव्यालङ्कारभूषणा।


दुर्गतिनाशिनी-राधा दुर्गा दुःखविनाशिनी।।


देवदेवीमहादेवी दयाशीला दयावती।

दयार्द्रसागराराधा महादारिद्र्यनाशिनी।।


देवतानां दुराराध्या महापापविनाशिनी।

द्वारकावासिनी देवी दुःखशोकविनाशिनी।।



दयावती द्वारकेशा दोलोत्सवविहारिणी।

दान्ता शान्ता कृपाध्यक्षा दक्षिणायज्ञकारिणी।।


दीनबन्धुप्रियादेवी शुभा दुर्घटनाशिनी।

ध्वजवज्राब्जपाशाङ्घ्री धीमहीचरणाम्बुजा।।


धर्मातीता धराध्यक्षा धनधान्यप्रदायिनी।


धर्माध्यक्षा ध्यानगम्या धरणीभारनाशिनी।।


धर्मदाधैर्यदाधात्री धन्यधन्यधुरन्धरी।

धरणीधारिणीधन्या धर्मसङ्कटरक्षिणी।।


धर्माधिकारिणीदेवी धर्मशास्त्रविशारदा।

धर्मसंस्थापनाधाग्रा ध्रुवानन्दप्रदायिनी।।



नवगोरोचना गौरी नीलवस्त्रविधारिणी।

नवयौवनसम्पन्ना नन्दनन्दनकारिणी।।


नित्यानन्दमयी नित्या नीलकान्तमणिप्रिया।

नानारत्नविचित्राङ्गी नानासुखमयीसुधा।।


निगूढरसरासज्ञा नित्यानन्दप्रदायिनी।


नवीनप्रवणाधन्या नीलपद्मविधारिणी।।


नन्दाऽनन्दा सदानन्दा निर्मला मुक्तिदायिनी।

निर्विकारा नित्यरूपा निष्कलङ्का निरामया।।


नलिनी नलिनाक्षी च नानालङ्कारभूषिता।

नितम्बिनि निराकाङ्क्षा नित्या सत्या सनातनी।।



नीलाम्बरपरीधाना नीलाकमललोचना।

निरपेक्षा निरूपमा नारायणी नरेश्वरी।।


निरालम्बा रक्षकर्त्री निगमार्थप्रदायिनी।

निकुञ्जवासिनी-राधा निर्गुणागुणसागरा।।


नीलाब्जा कृष्णमहिषी निराश्रयगतिप्रदा।


निधूवनवनानन्दा निकुञ्जशी च नागरी।।


निरञ्जना नित्यरक्ता नागरी चित्तमोहिनी।

पूर्णचन्द्रमुखी देवी प्रधानाप्रकृतिपरा।।


प्रेमरूपा प्रेममयी प्रफुल्लजलजानना।

पूर्णानन्दमयी-राधा पूर्णब्रह्मसनातनी।।



परमार्थप्रदा पूज्या परेशा पद्मलोचना।

पराशक्ति पराभक्ति परमानन्ददायिनी।।


पतितोद्धारिणी पुण्या प्रवीणा धर्मपावनी।

पङ्कजाक्षी महालक्ष्मी पीनोन्नतपयोधरा।।


प्रेमाश्रुपरिपूर्णाङ्गी पद्मेलसदृषानना।


पद्मरागधरादेवी पौर्णमासीसुखास्वदा।।


पूर्णोत्तमो परञ्ज्योती प्रियङ्करी प्रियंवदा।

प्रेमभक्तिप्रदा-राधा प्रेमानन्दप्रदायिनी।।


पद्मगन्धा पद्महस्ता पद्माङ्घ्री पद्ममालिनी।

पद्मासना महापद्मा पद्ममाला-विधारिणी।।



प्रबोधिनी पूर्णलक्ष्मी पूर्णेन्दुसदृषानना।

पुण्डरीकाक्षप्रेमाङ्गी पुण्डरीकाक्षरोहिनी।।


परमार्थप्रदापद्मा तथा प्रणवरूपिणी।

फलप्रिया स्फूर्तिदात्री महोत्सवविहारिणी।।


फुल्लाब्जदिव्यनयना फणिवेणिसुशोभिता।


वृन्दावनेश्वरी-राधा वृन्दावनविलासिनी।।


वृषभानुसुतादेवी व्रजवासीगणप्रिया।

वृन्दा वृन्दावनानन्दा व्रजेन्द्रा च वरप्रदा।।


विद्युत्गौरी सुवर्णाङ्गी वंशीनादविनोदिनी।

वृषभानुराधेकन्या व्रजराजसुतप्रिया।।



विचित्रपट्टचमरी विचित्राम्बरधारिणी।

वेणुवाद्यप्रियाराधा वेणुवाद्यपरायणा।।


विश्वम्भरी विचित्राङ्गी ब्रह्माण्डोदरीकासती।

विश्वोदरी विशालाक्षी व्रजलक्ष्मी वरप्रदा।।


ब्रह्ममयी ब्रह्मरूपा वेदाङ्गी वार्षभानवी।


वराङ्गना कराम्भोजा वल्लवी वृजमोहिनी।।


विष्णुप्रिया विश्वमाता ब्रह्माण्डप्रतिपालिनी।

विश्वेश्वरी विश्वकर्त्री वेद्यमन्त्रस्वरूपिणी।।


विश्वमाया विष्णुकान्ता विश्वाङ्गी विश्वपावनी।

व्रजेश्वरी विश्वरूपा वैष्णवी विघ्ननाशिनी।।



ब्रह्माण्डजननी-राधा वत्सला व्रजवत्सला।

वरदा वाक्यसिद्धा च बुद्धिदा वाक्प्रदायिनी।।


विशाखाप्राणसर्वस्वा वृषभानुकुमारिका।

विशाखासख्यविजिता वंशीवटविहारिणी।।


वेदमाता वेदगम्या वेद्यवर्णा शुभङ्करी।


वेदातीता गुणातीता विदग्धा विजनप्रिया।।

भक्तभक्तिप्रिया-राधा भक्तमङ्गलदायिनी।

भगवन्मोहिनी देवी भवक्लेशविनाशिनी।।


भाविनी भवती भाव्या भारती भक्तिदायिनी।

भागीरथी भाग्यवती भूतेशी भवकारिणी।।



भवार्णवत्राणकर्त्री भद्रदा भुवनेश्वरी।

भक्तात्मा भुवनानन्दा भाविका भक्तवत्सला।।


भुक्तिमुक्तिप्रदा-राधा शुभा भुजमृणालिका।

भानुशक्तिच्छलाधीरा भक्तानुग्रहकारिणी।।


माधवी माधवायुक्ता मुकुन्दाद्यासनातनी।


महालक्ष्मी महामान्या माधवस्वान्तमोहिनी।।


महाधन्या महापुण्या महामोहविनाशिनी।

मोक्षदा मानदा भद्रा मङ्गलाऽमङ्गलात्पदा।।


मनोभीष्टप्रदादेवी महाविष्णुस्वरूपिणी।

माधव्याङ्गी मनोरामा रम्या मुकुररञ्जनी।।



मनीशा वनदाधारा मुरलीवादनप्रिया।

मुकुन्दाङ्गकृतापाङ्गी मालिनी हरिमोहिनी।।


मानग्राही मधुवती मञ्जरी मृगलोचना।

नित्यवृन्दा महादेवी महेन्द्रकृतशेखरी।।


मुकुन्दप्राणदाहन्त्री मनोहरमनोहरा।


माधवमुखपद्मस्या मथुपानमधुव्रता।।


मुकुन्दमधुमाधुर्या मुख्यावृन्दावनेश्वरी।

मन्त्रसिद्धिकृता-राधा मूलमन्त्रस्वरूपिणी।।


मन्मथा सुमतीधात्री मनोज्ञमतिमानिता।

मदनामोहिनीमान्या मञ्जीरचरणोत्पला।।



यशोदासुतपत्नी च यशोदानन्ददायिनी।

यौवनापूर्णसौन्दर्या यमुनातटवासिनी।।


यशस्विनी योगमाया युवराजविलासिनी।

युग्मश्रीफलसुवत्सा युग्माङ्गदविधारिणी।।


यन्त्रातिगाननिरता युवतीनांशिरोमणी।


श्रीराधा परमाराध्या राधिका कृष्णमोहिनी।।


रूपयौवनसम्पन्ना रासमण्डलकारिणी।

राधादेवी पराप्राप्ता श्रीराधापरमेश्वरी।।


राधावाग्मी रसोन्मादी रसिका रसशेखरी।

राधारासमयीपूर्णा रसज्ञा रसमञ्जरी।।



राधिका रसदात्री च राधारासविलासिनी।

रञ्जनी रसवृन्दाच रत्नालङ्कारधारिणी।।


रामारत्नारत्नमयी रत्नमालाविधारिणी।

रमणीरामणीरम्या राधिकारमणीपरा।।


रासमण्डलमध्यस्था राजराजेश्वरी शुभा।


राकेन्दुकोटिसौन्दर्या रत्नाङ्गदविधारिणी।।


रासप्रिया रासगम्या रासोत्सवविहारिणी।

लक्ष्मीरूपा च ललना ललितादिसखिप्रिया।।


लोकमाता लोकधात्री लोकानुग्रहकारिणी।

लोलाक्षी ललिताङ्गी च ललिताजीवतारका।।



लोकालया लज्जारूपा लास्यविद्यालताशुभा।

ललिताप्रेमललितानुग्धप्रेमलिलावती।।


लीलालावण्यसम्पन्ना नागरीचित्तमोहिनी।

लीलारङ्गीरती रम्या लीलागानपरायणा।।


लीलावती रतिप्रीता ललिताकुलपद्मिनी।


शुद्धकाञ्चनगौराङ्गी शङ्खकङ्कणधारिणी।।


शक्तिसञ्चारिणी देवी शक्तीनां शक्तिदायिनी।

सुचारुकबरीयुक्ता शशिरेखा शुभङ्करी।।


सुमती सुगतिर्दात्री श्रीमती श्रीहरिपिया।

सुन्दराङ्गी सुवर्णाङ्गी सुशीला शुभदायिनी।।



शुभदा सुखदा साध्वी सुकेशी सुमनोरमा।

सुरेश्वरी सुकुमारी शुभाङ्गी सुमशेखरा।।


शाकम्भरी सत्यरूपा शस्ता शान्ता मनोरमा।

सिद्धिधात्री महाशान्ती सुन्दरी शुभदायिनी।।


शब्दातीता सिन्धुकन्या शरणागतपालिनी।


शालग्रामप्रिया-राधा सर्वदा नवयौवना।।


सुबलानन्दिनीदेवी सर्वशास्त्रविशारदा।

सर्वाङ्गसुन्दरी-राधा सर्वसल्लक्षणान्विता।।


सर्वगोपीप्रधाना च सर्वकामफलप्रदा।

सदानन्दमयीदेवी सर्वमङ्गलदायिनी।।



सर्वमण्डलजीवातु सर्वसम्पत्प्रदायिनी।

संसारपारकरणी सदाकृष्णकुतूहला।।


सर्वागुणमयी-राधा साध्या सर्वगुणान्विता।

सत्यस्वरूपा सत्या च सत्यनित्या सनातनी।।


सर्वमाधव्यलहरी सुधामुखशुभङ्करी।


सदाकिशोरिकागोष्ठी सुबलावेशधारिणी।।


सुवर्णमालिनी-राधा श्यामसुन्दरमोहिनी।

श्यामामृतरसेमग्ना सदासीमन्तिनीसखी।।


षोडशीवयसानित्या षडरागविहारिणी।

हेमाङ्गीवरदाहन्त्री भूमाता हंसगामिनी।।



हासमुखी व्रजाध्यक्षा हेमाब्जा कृष्णमोहिनी।

हरिविनोदिनी-राधा हरिसेवापरायणा।।


हेमारम्भा मदारम्भा हरिहारविलोचना।

हेमाङ्गवर्णारम्या श्रेषहृत्पद्मवासिनी।।


हरिपादाब्जमधुपा मधुपानमधुव्रता।

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क्षेमङ्करी क्षीणमध्या क्षमारूपा क्षमावती।।


क्षेत्राङ्गी श्रीक्षमादात्री क्षितिवृन्दावनेश्वरी।

क्षमाशीला क्षमादात्री क्षौमवासोविधारिणी।

क्षान्तिनामावयवती क्षीरोदार्णवशायिनी।।


राधानामसहस्राणि पठेद्वा श्रुणुयादपि।


इष्टसिद्धिर्भवेत्तस्य मन्त्रसिद्धिर्भवेत् ध्रुवम्।।


धर्मार्थकाममोक्षांश्च लभते नात्र संशयः।

वाञ्छासिद्धिर्भवेत्तस्य भक्तिस्यात् प्रेमलक्षण।।


लक्ष्मीस्तस्यवसेत्गेहे मुखेभातिसरस्वती।

अन्तकालेभवेत्तस्य राधाकृष्णेचसंस्थितिः।।

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