EPFO Insurance Scheme: पीएफ खाताधारक की मृत्यु के बाद किसे मिलता है 7 लाख का बीमा और पेंशन? जानिए नियम
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ अपने सदस्यों को केवल रिटायरमेंट के बाद फंड की सुविधा ही नहीं देता, बल्कि कामकाजी जीवन के दौरान उनके परिवार को एक बड़ी सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा भी प्रदान करता है। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले बहुत से नौकरीपेशा लोग इस बात से अनजान हैं कि ईपीएफओ अपने हर एक्टिव मेंबर को एक मुफ्त जीवन बीमा की सुविधा भी देता है। अगर किसी कारणवश किसी ईपीएफओ सदस्य की सेवा अवधि के दौरान असमय मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिवार या रजिस्टर्ड नॉमिनी को 7 लाख रुपये तक की बीमा राशि और मासिक पेंशन का लाभ दिया जाता है।
इस कल्याणकारी योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके लिए कर्मचारी को अपनी जेब से एक भी रुपया प्रीमियम के तौर पर नहीं देना पड़ता। ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, पीएफ खाताधारक के नामांकित व्यक्ति या कानूनी वारिस इस सहायता राशि के हकदार होते हैं। संकट की घड़ी में यह पैसा प्रभावित परिवार को आर्थिक रूप से संभलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे जरूरी शर्त यह है कि दिवंगत सदस्य ने अपनी मृत्यु से पहले कम से कम लगातार 12 महीनों तक नौकरी की हो। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इन 12 महीनों के दौरान उन्होंने अपनी कंपनी बदली थी या नहीं, बशर्ते उनका पीएफ योगदान लगातार जमा होता रहा हो। यदि सदस्य इस शर्त को पूरा करता है, तो उनका नॉमिनी इस 7 लाख रुपये तक के क्लेम के लिए पूरी तरह पात्र माना जाता है।
इस योजना के तहत दिवंगत कर्मचारी की पत्नी या पति को जीवनभर के लिए विधवा या विधुर पेंशन दी जाती है। इसके साथ ही, उनके दो बच्चों को भी 25 वर्ष की आयु पूरी होने तक मासिक बाल पेंशन का लाभ मिलता है। यदि दुर्भाग्य से बच्चे पूरी तरह से अनाथ हो जाते हैं, तो उन्हें मिलने वाली पेंशन राशि को बढ़ाकर अनाथ पेंशन के रूप में तब्दील कर दिया जाता है। यदि कोई सदस्य अविवाहित था, तो यह मासिक पेंशन लाभ उनके माता-पिता को दिया जाता है।
दावा प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के पूरा करने के लिए कुछ बेहद जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, जिनमें सदस्य का मृत्यु प्रमाण पत्र, नॉमिनी का बैंक खाता विवरण, आईएफएससी कोड, रद्द चेक, आधार कार्ड और पैन कार्ड शामिल हैं। यदि दावा करने वाले सदस्य बच्चे हैं और उनकी उम्र 25 वर्ष से कम है, तो उनका जन्म प्रमाण पत्र भी साथ में लगाना पड़ता है। ईपीएफओ इस पूरी वेरिफिकेशन प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करके क्लेम की राशि सीधे नॉमिनी के रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर देता है। यही वजह है कि हर नौकरीपेशा व्यक्ति को अपने पीएफ अकाउंट में ई-नॉमिनेशन की प्रक्रिया को हमेशा अपडेट रखना चाहिए।
इस कल्याणकारी योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके लिए कर्मचारी को अपनी जेब से एक भी रुपया प्रीमियम के तौर पर नहीं देना पड़ता। ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, पीएफ खाताधारक के नामांकित व्यक्ति या कानूनी वारिस इस सहायता राशि के हकदार होते हैं। संकट की घड़ी में यह पैसा प्रभावित परिवार को आर्थिक रूप से संभलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।
ईडीएलआई योजना के तहत मिलता है 7 लाख का मुफ्त इंश्योरेंस
ईपीएफओ के तहत मिलने वाले इस मुफ्त लाइफ इंश्योरेंस को "कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना" यानी ईडीएलआई (EDLI) स्कीम कहा जाता है। इस सरकारी योजना के अंतर्गत मिलने वाली न्यूनतम बीमा राशि 2.5 लाख रुपये तय की गई है, जबकि अधिकतम क्लेम की सीमा 7 लाख रुपये तक हो सकती है।You may also like
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इस योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे जरूरी शर्त यह है कि दिवंगत सदस्य ने अपनी मृत्यु से पहले कम से कम लगातार 12 महीनों तक नौकरी की हो। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इन 12 महीनों के दौरान उन्होंने अपनी कंपनी बदली थी या नहीं, बशर्ते उनका पीएफ योगदान लगातार जमा होता रहा हो। यदि सदस्य इस शर्त को पूरा करता है, तो उनका नॉमिनी इस 7 लाख रुपये तक के क्लेम के लिए पूरी तरह पात्र माना जाता है।
परिवार को कैसे मिलती है ईपीएफओ मासिक पेंशन?
बीमा राशि के साथ-साथ ईपीएफओ सदस्य की मृत्यु के बाद उनके आश्रित परिवार को नियमित आय सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारी पेंशन योजना 1995 यानी ईपीएस (EPS) के तहत मासिक पेंशन भी दी जाती है। इस नियम के अनुसार, यदि सदस्य ने केवल एक महीने की भी सेवा पूरी की हो और उनका ईपीएस योगदान जमा हुआ हो, तो उनका परिवार इस पेंशन का हकदार बन जाता है।इस योजना के तहत दिवंगत कर्मचारी की पत्नी या पति को जीवनभर के लिए विधवा या विधुर पेंशन दी जाती है। इसके साथ ही, उनके दो बच्चों को भी 25 वर्ष की आयु पूरी होने तक मासिक बाल पेंशन का लाभ मिलता है। यदि दुर्भाग्य से बच्चे पूरी तरह से अनाथ हो जाते हैं, तो उन्हें मिलने वाली पेंशन राशि को बढ़ाकर अनाथ पेंशन के रूप में तब्दील कर दिया जाता है। यदि कोई सदस्य अविवाहित था, तो यह मासिक पेंशन लाभ उनके माता-पिता को दिया जाता है।
क्लेम करने का आसान ऑनलाइन तरीका और जरूरी दस्तावेज
इस राशि को प्राप्त करने के लिए नामांकित व्यक्ति या परिवार के सदस्यों को ईपीएफओ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से क्लेम फॉर्म भरना होता है। इसके लिए मुख्य रूप से फॉर्म 5 आईएफ (ईडीएलआई क्लेम के लिए) और फॉर्म 10 डी (मासिक पेंशन के लिए) को भरकर जमा करना आवश्यक है।दावा प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के पूरा करने के लिए कुछ बेहद जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, जिनमें सदस्य का मृत्यु प्रमाण पत्र, नॉमिनी का बैंक खाता विवरण, आईएफएससी कोड, रद्द चेक, आधार कार्ड और पैन कार्ड शामिल हैं। यदि दावा करने वाले सदस्य बच्चे हैं और उनकी उम्र 25 वर्ष से कम है, तो उनका जन्म प्रमाण पत्र भी साथ में लगाना पड़ता है। ईपीएफओ इस पूरी वेरिफिकेशन प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करके क्लेम की राशि सीधे नॉमिनी के रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर देता है। यही वजह है कि हर नौकरीपेशा व्यक्ति को अपने पीएफ अकाउंट में ई-नॉमिनेशन की प्रक्रिया को हमेशा अपडेट रखना चाहिए।









