FD vs SCSS: सीनियर सिटीजंस के लिए FD बेस्ट है या SCSS? जानें कहाँ मिलेगा ज्यादा फायदा
रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर लोग ऐसे निवेश के तरीकों की तलाश करते हैं जो पूरी तरह सुरक्षित हों और जहाँ से हर महीने या तय समय पर बंधी-बधाई कमाई होती रहे। इस मामले में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम (SCSS) सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले विकल्प हैं। आजकल कई बैंक सीनियर सिटीजंस को FD पर 8% से भी ज्यादा का ब्याज दे रहे हैं, वहीं SCSS पर इस समय 8.2% सालाना ब्याज मिल रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि बुजुर्गों के लिए इन दोनों में से कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद रहेगा।
ये भी पढ़ें: APY vs NPS: रिटायरमेंट के लिए कौन-सी स्कीम है बेहतर? जानिए दोनों में क्या है बड़ा अंतर
ये भी पढ़ें: How To Get 50,000 Pension: क्या है SWP? जो आपको रिटायरमेंट के बाद बना देगा मालामाल
FD पर कितना मिल रहा है ब्याज?
सीनियर सिटीजंस के लिए बैंक FD की ब्याज दरें इस बात पर निर्भर करती हैं कि आपने कौन सा बैंक और कितने समय (टेन्योर) के लिए निवेश चुना है। कई स्मॉल फाइनेंस बैंक तो बुजुर्गों को 8.30% तक का तगड़ा ब्याज दे रहे हैं। वहीं देश के बड़े सरकारी और प्राइवेट बैंक सीनियर सिटीजंस को आमतौर पर 7.45% से लेकर 8% तक का ब्याज ऑफर कर रहे हैं। FD का सबसे बड़ा फायदा इसकी फ्लेक्सिबिलिटी यानी लचीलापन है। आप अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ दिनों से लेकर पूरे 10 साल तक के लिए पैसे जमा कर सकते हैं। इसके अलावा ज्यादातर बैंक जरूरत पड़ने पर समय से पहले FD तोड़ने (प्रीमैच्योर क्लोजर) की सुविधा भी देते हैं।ये भी पढ़ें: APY vs NPS: रिटायरमेंट के लिए कौन-सी स्कीम है बेहतर? जानिए दोनों में क्या है बड़ा अंतर
SCSS में क्या है खास?
सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम (SCSS) भारत सरकार की एक भरोसेमंद बचत योजना है। इस पर अप्रैल से जून 2026 की तिमाही के लिए 8.2% की दर से सालाना ब्याज मिल रहा है। इस स्कीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सरकार की गारंटी मिलती है, जिससे आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है। SCSS में मिलने वाले ब्याज का भुगतान हर तीन महीने (क्वार्टरली) में किया जाता है, जो रिटायर हो चुके लोगों के लिए नियमित कमाई का एक बढ़िया जरिया बन जाता है। यही वजह है कि कई बुजुर्ग इसे पेंशन के एक अच्छे विकल्प के रूप में देखते हैं।FD और SCSS में क्या है मुख्य अंतर?
अगर सिर्फ ब्याज दर की बात करें तो कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक FD पर 8.3% तक का रिटर्न दे रहे हैं, लेकिन SCSS के मुकाबले इनमें थोड़ा जोखिम (रिस्क) ज्यादा हो सकता है। दूसरी तरफ, SCSS पूरी तरह सरकारी योजना है, इसलिए इसमें सुरक्षा की सौ फीसदी गारंटी होती है। FD में निवेश करने की कोई अधिकतम सीमा (मैक्सिमम लिमिट) नहीं होती है, जबकि SCSS में पैसे जमा करने की एक तय लिमिट होती है। इसके बावजूद, रिटायरमेंट के बाद आर्थिक मजबूती के लिए SCSS एक स्थिर और सुरक्षित इनकम का भरोसा देती है।ये भी पढ़ें: How To Get 50,000 Pension: क्या है SWP? जो आपको रिटायरमेंट के बाद बना देगा मालामाल
आपको कहाँ करना चाहिए निवेश?
अगर आपकी पहली प्राथमिकता पैसे की सुरक्षा और हर तीन महीने में तय कमाई है, तो आपके लिए SCSS एक बेहतरीन चुनाव है। लेकिन अगर आप थोड़ा बहुत रिस्क लेने को तैयार हैं और अलग-अलग बैंकों की ऊंची ब्याज दरों का फायदा उठाकर ज्यादा रिटर्न कमाना चाहते हैं, तो सीनियर सिटीजन FD भी एक अच्छा रास्ता है। कई फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स यह सलाह देते हैं कि बुजुर्गों को अपना पूरा पैसा किसी एक जगह लगाने के बजाय SCSS और FD दोनों में बांटकर निवेश करना चाहिए ताकि सुरक्षा और बेहतर रिटर्न का सही तालमेल बना रहे।Next Story