रिटायरमेंट के लिए कौन सी स्कीम है सबसे बेहतर? जानें EPF, PPF और NPS का पूरा गणित
भारत में नौकरीपेशा लोगों के पास सुरक्षित रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए कई शानदार निवेश विकल्प मौजूद हैं। इनमें सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद विकल्प हैं EPF , PPF और NPS। ये तीनों स्कीम लंबे समय में बड़ा फंड तैयार करने में मदद करती हैं और टैक्स बचाने का भी मौका देती हैं।
हर स्कीम की अपनी अलग खासियत है। EPF नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए अनिवार्य बचत योजना मानी जाती है, जबकि PPF सुरक्षित और टैक्स फ्री रिटर्न के लिए जाना जाता है। वहीं NPS बाजार से जुड़ी स्कीम होने के कारण लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखती है।
इस स्कीम में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। निवेशक हर वित्त वर्ष में कम से कम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक निवेश कर सकते हैं।
PPF की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश पर टैक्स छूट मिलती है। साथ ही मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि भी पूरी तरह टैक्स फ्री रहती है। 15 साल पूरे होने के बाद निवेशक इसे 5-5 साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ा सकते हैं।
फिलहाल सरकार इस योजना पर 7.10 प्रतिशत सालाना ब्याज दे रही है। अगर कोई निवेशक लगातार 30 साल तक हर साल 1.5 लाख रुपये निवेश करता है, तो उसका कुल निवेश 45 लाख रुपये होगा। इस पर लगभग 1.09 करोड़ रुपये ब्याज मिल सकता है और मैच्योरिटी राशि करीब 1.54 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
EPF में कर्मचारी की बेसिक सैलरी और DA का 12 प्रतिशत हिस्सा जमा होता है और उतना ही योगदान कंपनी भी देती है। फिलहाल सरकार इस स्कीम पर 8.25 प्रतिशत का आकर्षक ब्याज दे रही है, जो तय शर्तों के बाद पूरी तरह टैक्स फ्री हो जाता है।
इस योजना की एक और खास बात यह है कि कर्मचारी चाहें तो अनिवार्य 12 प्रतिशत से ज्यादा निवेश भी कर सकते हैं। इसे VPF यानी Voluntary Provident Fund कहा जाता है। VPF पर भी EPF जितना ही ब्याज मिलता है।
मान लीजिए कोई कर्मचारी 30 साल की उम्र में 50,000 रुपये मासिक बेसिक सैलरी पाता है और उसकी सैलरी हर साल 5 प्रतिशत बढ़ती है। ऐसे में 8.25 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से 60 साल की उम्र तक उसके पास लगभग 2.6 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड तैयार हो सकता है।
NPS में इक्विटी और डेट दोनों का मिश्रण होता है, इसलिए इसमें लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। यह योजना टैक्स बचाने का अतिरिक्त फायदा भी देती है।
NPS के नियमों के अनुसार निवेशक 60 साल की उम्र तक अपना पेंशन फंड तैयार कर सकते हैं। रिटायरमेंट के समय कुल राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह टैक्स फ्री निकाला जा सकता है। बाकी 40 प्रतिशत रकम से एन्युटी खरीदनी होती है, जिससे हर महीने पेंशन मिलती है।
अगर कोई 30 साल का व्यक्ति हर महीने 12,500 रुपये NPS में निवेश करता है और उसे औसतन 10 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है, तो 60 साल की उम्र तक उसका कुल निवेश 45 लाख रुपये होगा। रिटायरमेंट के समय यह राशि बढ़कर लगभग 2.84 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
इसमें से करीब 1.70 करोड़ रुपये टैक्स फ्री निकाले जा सकते हैं, जबकि बाकी राशि एन्युटी में जाएगी, जिससे लगभग 56,000 रुपये मासिक पेंशन मिल सकती है।
निवेश का सही विकल्प आपकी आय, जोखिम लेने की क्षमता, टैक्स प्लानिंग और भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों पर निर्भर करता है।
हर स्कीम की अपनी अलग खासियत है। EPF नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए अनिवार्य बचत योजना मानी जाती है, जबकि PPF सुरक्षित और टैक्स फ्री रिटर्न के लिए जाना जाता है। वहीं NPS बाजार से जुड़ी स्कीम होने के कारण लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखती है।
PPF में मिलता है सुरक्षित और पूरी तरह टैक्स फ्री रिटर्न
पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF उन निवेशकों के लिए शानदार विकल्प माना जाता है जो बिना जोखिम के लंबी अवधि में सुरक्षित और टैक्स फ्री फंड बनाना चाहते हैं। यह केंद्र सरकार समर्थित योजना है, इसलिए इसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है।इस स्कीम में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। निवेशक हर वित्त वर्ष में कम से कम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक निवेश कर सकते हैं।
PPF की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश पर टैक्स छूट मिलती है। साथ ही मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि भी पूरी तरह टैक्स फ्री रहती है। 15 साल पूरे होने के बाद निवेशक इसे 5-5 साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ा सकते हैं।
फिलहाल सरकार इस योजना पर 7.10 प्रतिशत सालाना ब्याज दे रही है। अगर कोई निवेशक लगातार 30 साल तक हर साल 1.5 लाख रुपये निवेश करता है, तो उसका कुल निवेश 45 लाख रुपये होगा। इस पर लगभग 1.09 करोड़ रुपये ब्याज मिल सकता है और मैच्योरिटी राशि करीब 1.54 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
नौकरीपेशा लोगों की पहली पसंद है EPF
Employees’ Provident Fund यानी EPF देश के ज्यादातर सैलरीड कर्मचारियों के लिए सबसे मजबूत रिटायरमेंट सेविंग स्कीम मानी जाती है। इस योजना को EPFO संचालित करता है।EPF में कर्मचारी की बेसिक सैलरी और DA का 12 प्रतिशत हिस्सा जमा होता है और उतना ही योगदान कंपनी भी देती है। फिलहाल सरकार इस स्कीम पर 8.25 प्रतिशत का आकर्षक ब्याज दे रही है, जो तय शर्तों के बाद पूरी तरह टैक्स फ्री हो जाता है।
इस योजना की एक और खास बात यह है कि कर्मचारी चाहें तो अनिवार्य 12 प्रतिशत से ज्यादा निवेश भी कर सकते हैं। इसे VPF यानी Voluntary Provident Fund कहा जाता है। VPF पर भी EPF जितना ही ब्याज मिलता है।
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मान लीजिए कोई कर्मचारी 30 साल की उम्र में 50,000 रुपये मासिक बेसिक सैलरी पाता है और उसकी सैलरी हर साल 5 प्रतिशत बढ़ती है। ऐसे में 8.25 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से 60 साल की उम्र तक उसके पास लगभग 2.6 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड तैयार हो सकता है।
NPS से बन सकता है बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस
National Pension System यानी NPS एक वॉलंटरी और मार्केट लिंक्ड रिटायरमेंट स्कीम है। इसमें 18 से 70 साल तक का कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है।NPS में इक्विटी और डेट दोनों का मिश्रण होता है, इसलिए इसमें लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। यह योजना टैक्स बचाने का अतिरिक्त फायदा भी देती है।
NPS के नियमों के अनुसार निवेशक 60 साल की उम्र तक अपना पेंशन फंड तैयार कर सकते हैं। रिटायरमेंट के समय कुल राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह टैक्स फ्री निकाला जा सकता है। बाकी 40 प्रतिशत रकम से एन्युटी खरीदनी होती है, जिससे हर महीने पेंशन मिलती है।
अगर कोई 30 साल का व्यक्ति हर महीने 12,500 रुपये NPS में निवेश करता है और उसे औसतन 10 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है, तो 60 साल की उम्र तक उसका कुल निवेश 45 लाख रुपये होगा। रिटायरमेंट के समय यह राशि बढ़कर लगभग 2.84 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
इसमें से करीब 1.70 करोड़ रुपये टैक्स फ्री निकाले जा सकते हैं, जबकि बाकी राशि एन्युटी में जाएगी, जिससे लगभग 56,000 रुपये मासिक पेंशन मिल सकती है।
किस स्कीम में निवेश करना चाहिए?
EPF, PPF और NPS तीनों ही रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। अगर आप पूरी तरह सुरक्षित और टैक्स फ्री रिटर्न चाहते हैं, तो PPF अच्छा विकल्प हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF सबसे भरोसेमंद स्कीम मानी जाती है, जबकि लंबी अवधि में बड़ा रिटर्न और पेंशन फंड बनाने के लिए NPS बेहतर साबित हो सकता है।निवेश का सही विकल्प आपकी आय, जोखिम लेने की क्षमता, टैक्स प्लानिंग और भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों पर निर्भर करता है।









