VPF Benefits: क्या होता है वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड? अधिक ब्याज और टैक्स बचत के लिए ऐसे उठाएं लाभ
भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए जब निवेश की बात आती है तो नौकरीपेशा लोगों के मन में ईपीएफ (EPF) का नाम सबसे पहले आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ईपीएफ के अलावा एक और विकल्प है जो आपको और भी अधिक बचत करने की आजादी देता है? इसे वीपीएफ (VPF) यानी वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड कहा जाता है।
ईपीएफ और वीपीएफ: अपनी मेहनत की कमाई को सही जगह निवेश करने का स्मार्ट तरीका
नौकरी करने वाले हर व्यक्ति की सैलरी का एक हिस्सा हर महीने कटता है जिसे हम पीएफ या ईपीएफ कहते हैं। यह हमारी भविष्य की जमापूंजी होती है। लेकिन कई बार हमें लगता है कि काश हम अपनी बचत को थोड़ा और बढ़ा पाते ताकि रिटायरमेंट के समय हमारे पास एक बड़ी रकम हो। यहीं पर काम आता है वीपीएफ।
बहुत से लोग ईपीएफ और वीपीएफ को एक ही समझते हैं लेकिन इन दोनों के बीच कुछ बुनियादी अंतर हैं जिन्हें समझना आपके लिए बहुत जरूरी है।
ईपीएफ (EPF) क्या है?
ईपीएफ यानी एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड एक अनिवार्य बचत योजना है। इसमें आपकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 12 प्रतिशत हिस्सा कटता है और ठीक उतना ही हिस्सा आपकी कंपनी (एम्प्लॉयर) की ओर से भी जमा किया जाता है। यह हर नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए जरूरी होता है और इसमें निवेश की एक तय सीमा होती है।
वीपीएफ (VPF) क्या है?
वीपीएफ का मतलब है वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड। जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, यह 'स्वैच्छिक' है। इसका मतलब है कि अगर कोई कर्मचारी चाहता है कि उसकी सैलरी से 12 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा पीएफ में जमा हो, तो वह वीपीएफ का चुनाव कर सकता है। इसमें निवेश करने की कोई अनिवार्य सीमा नहीं है और आप अपनी बेसिक सैलरी का 100 प्रतिशत तक हिस्सा इसमें जमा करवा सकते हैं।
दोनों के बीच मुख्य अंतर
अनिवार्यता: ईपीएफ सभी पात्र कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है जबकि वीपीएफ पूरी तरह से आपकी इच्छा पर निर्भर करता है।
कंपनी का योगदान: ईपीएफ में कंपनी भी आपके बराबर का योगदान देती है। लेकिन वीपीएफ में केवल कर्मचारी ही अतिरिक्त पैसा जमा करता है, कंपनी इसमें कोई अतिरिक्त योगदान नहीं देती है।
ब्याज दर: सबसे अच्छी बात यह है कि वीपीएफ पर भी आपको वही ब्याज दर मिलती है जो ईपीएफ पर मिलती है। यह अक्सर बैंक एफडी या अन्य बचत योजनाओं के मुकाबले ज्यादा आकर्षक होती है।
वीपीएफ चुनने के बड़े फायदे
सुरक्षित निवेश: क्योंकि यह सरकारी गारंटी के साथ आता है, इसलिए इसमें आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
टैक्स में छूट: वीपीएफ में निवेश करने पर आपको इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत टैक्स छूट का लाभ मिलता है। इसके साथ ही मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम भी टैक्स फ्री होती है।
बचत की आदत: वीपीएफ का पैसा सीधे आपकी सैलरी से कटकर जमा होता है, इसलिए यह बचत करने का एक अनुशासित तरीका है। आपको अलग से कहीं पैसे जमा करने जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
कैसे शुरू करें वीपीएफ?
वीपीएफ शुरू करना बहुत आसान है। आपको बस अपनी कंपनी के एचआर या फाइनेंस विभाग को एक आवेदन देना होता है कि आप अपनी सैलरी का एक निश्चित प्रतिशत वीपीएफ के रूप में कटवाना चाहते हैं। इसे आप कभी भी शुरू कर सकते हैं और साल में एक बार इसमें बदलाव भी कर सकते हैं।
अगर आप कम जोखिम में अपनी बचत को बढ़ाना चाहते हैं और टैक्स बचाना चाहते हैं, तो ईपीएफ के साथ वीपीएफ का तालमेल आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। यह न केवल आपके बुढ़ापे का सहारा बनेगा बल्कि आपकी वित्तीय स्थिति को भी मजबूती देगा।
ईपीएफ और वीपीएफ: अपनी मेहनत की कमाई को सही जगह निवेश करने का स्मार्ट तरीका
नौकरी करने वाले हर व्यक्ति की सैलरी का एक हिस्सा हर महीने कटता है जिसे हम पीएफ या ईपीएफ कहते हैं। यह हमारी भविष्य की जमापूंजी होती है। लेकिन कई बार हमें लगता है कि काश हम अपनी बचत को थोड़ा और बढ़ा पाते ताकि रिटायरमेंट के समय हमारे पास एक बड़ी रकम हो। यहीं पर काम आता है वीपीएफ। बहुत से लोग ईपीएफ और वीपीएफ को एक ही समझते हैं लेकिन इन दोनों के बीच कुछ बुनियादी अंतर हैं जिन्हें समझना आपके लिए बहुत जरूरी है।
ईपीएफ (EPF) क्या है?
ईपीएफ यानी एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड एक अनिवार्य बचत योजना है। इसमें आपकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 12 प्रतिशत हिस्सा कटता है और ठीक उतना ही हिस्सा आपकी कंपनी (एम्प्लॉयर) की ओर से भी जमा किया जाता है। यह हर नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए जरूरी होता है और इसमें निवेश की एक तय सीमा होती है। वीपीएफ (VPF) क्या है?
वीपीएफ का मतलब है वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड। जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, यह 'स्वैच्छिक' है। इसका मतलब है कि अगर कोई कर्मचारी चाहता है कि उसकी सैलरी से 12 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा पीएफ में जमा हो, तो वह वीपीएफ का चुनाव कर सकता है। इसमें निवेश करने की कोई अनिवार्य सीमा नहीं है और आप अपनी बेसिक सैलरी का 100 प्रतिशत तक हिस्सा इसमें जमा करवा सकते हैं।You may also like
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दोनों के बीच मुख्य अंतर
अनिवार्यता: ईपीएफ सभी पात्र कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है जबकि वीपीएफ पूरी तरह से आपकी इच्छा पर निर्भर करता है। कंपनी का योगदान: ईपीएफ में कंपनी भी आपके बराबर का योगदान देती है। लेकिन वीपीएफ में केवल कर्मचारी ही अतिरिक्त पैसा जमा करता है, कंपनी इसमें कोई अतिरिक्त योगदान नहीं देती है।
ब्याज दर: सबसे अच्छी बात यह है कि वीपीएफ पर भी आपको वही ब्याज दर मिलती है जो ईपीएफ पर मिलती है। यह अक्सर बैंक एफडी या अन्य बचत योजनाओं के मुकाबले ज्यादा आकर्षक होती है।
वीपीएफ चुनने के बड़े फायदे
सुरक्षित निवेश: क्योंकि यह सरकारी गारंटी के साथ आता है, इसलिए इसमें आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है।टैक्स में छूट: वीपीएफ में निवेश करने पर आपको इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत टैक्स छूट का लाभ मिलता है। इसके साथ ही मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम भी टैक्स फ्री होती है।
बचत की आदत: वीपीएफ का पैसा सीधे आपकी सैलरी से कटकर जमा होता है, इसलिए यह बचत करने का एक अनुशासित तरीका है। आपको अलग से कहीं पैसे जमा करने जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
कैसे शुरू करें वीपीएफ?
वीपीएफ शुरू करना बहुत आसान है। आपको बस अपनी कंपनी के एचआर या फाइनेंस विभाग को एक आवेदन देना होता है कि आप अपनी सैलरी का एक निश्चित प्रतिशत वीपीएफ के रूप में कटवाना चाहते हैं। इसे आप कभी भी शुरू कर सकते हैं और साल में एक बार इसमें बदलाव भी कर सकते हैं। अगर आप कम जोखिम में अपनी बचत को बढ़ाना चाहते हैं और टैक्स बचाना चाहते हैं, तो ईपीएफ के साथ वीपीएफ का तालमेल आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। यह न केवल आपके बुढ़ापे का सहारा बनेगा बल्कि आपकी वित्तीय स्थिति को भी मजबूती देगा।





