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Explainer: हर महीने खत्म हो जाते हैं पैसे? इन आसान टिप्स को अपनाकर कई गुना बढ़ा सकते है इनकम

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हर महीने का बजट बनाना बहुत बड़ा सरदर्द है। चाहे बजट की कितनी भी प्लानिंग की जाए, फिर भी जरूरत से ज्यादा पैसे खर्च हो ही जाते हैं। बच्चों की फीस हो, मोटरसाइकिल की किस्त हो या कोई और खर्च, अगर आपको हमेशा ऐसा लगता है कि कितनी भी कोशिश कर लो, पैसे पूरे पड़ते ही नहीं, तो यह एक्सप्लेनर आपके लिए है। हम आपको ऐसे टिप्स बताते हैं, जिनसे न सिर्फ महीने का बजट आसानी से प्लान हो जाएगा, बल्कि आप हर जरूरी काम पूरा करते हुए भी अच्छी-खासी सेविंग्स कर सकेंगे।
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सबसे पहले इनकम का सही आकलन करें


किसी भी अच्छे बजट की शुरुआत परिवार की कुल मासिक इनकम को समझने से होती है। इसमें सैलरी, बिजनेस से होने वाली इनकम, किराये की इनकम या अन्य जगहों से होने वाली कमाई को शामिल करना चाहिए। बजट हमेशा उस रकम के हिसाब से बनाना चाहिए, जो सभी टैक्स और कटौतियों के बाद आपके हाथ में आती है। इससे खर्चों और बचे हुए पैसों की प्लानिंग ज्यादा प्रैक्टिकल और असरदार बनती है।


50-30-20 नियम को अपनाएं


एक्सपर्ट्स की मानें तो 50-30-20 रूल सबसे आसान और असरदार बजटिंग फॉर्मूला माना जाता है। इस रूल के अनुसार इनकम का 50 प्रतिशत हिस्सा घर के जरूरी खर्चों, जैसे किराया, राशन, बिजली-पानी और बच्चों की फीस पर खर्च होना चाहिए। 30 प्रतिशत पैसा कपड़े-गहने, घूमने-फिरने और मनोरंजन के लिए रखा जा सकता है, जबकि 20 प्रतिशत हिस्सा सेविंग्स और निवेश के लिए अलग रखना चाहिए। यह तरीका वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में मदद करता है।



जरूरी खर्चों को सबसे ऊपर रखें


मिडिल क्लास परिवारों को अपने बजट में सबसे पहले जरूरी खर्चों को शामिल करना चाहिए। इसमें घर का किराया या होम लोन की ईएमआई, राशन, बिजली-पानी के बिल, बच्चों की पढ़ाई और आने-जाने का खर्च शामिल होता है। इन खर्चों को सबसे पहले प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि ये परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े होते हैं। इससे आप गैर-जरूरी खर्चों पर आसानी से काबू रख सकते हैं।
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इमरजेंसी फंड बनाना न भूलें


जिंदगी में कब कौन-सी परेशानी आ जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। नौकरी छूटना, अचानक बीमारी या किसी बड़े खर्च की जरूरत कभी भी पड़ सकती है। ऐसे वक्त में इमरजेंसी फंड परिवार के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। जानकारों की सलाह है कि कम से कम छह महीने के घरेलू खर्च के बराबर पैसा इमरजेंसी फंड में रखना चाहिए, ताकि मुश्किल वक्त में कर्ज लेने की नौबत न आए।

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हर महीने निवेश जरूर करें


सिर्फ सेविंग्स करना काफी नहीं है, क्योंकि महंगाई वक्त के साथ पैसों की कीमत को कम कर देती है। इसलिए हर महीने इनकम का एक हिस्सा निवेश करना जरूरी है। म्यूचुअल फंड में SIP, PPF, NPS या किसी अन्य योजना के जरिए नियमित निवेश किया जा सकता है। लॉन्ग टर्म में निवेश पर मिलने वाला कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि) इफेक्ट बड़ा फंड तैयार करने में मदद करता है और आपके फाइनेंशियल गोल्स को हासिल करना आसान बनाता है।


गैर-जरूरी खर्चों की पहचान करें


कई बार छोटी-छोटी और बार-बार होने वाली खरीदारी बजट पर बुरा असर डालती है। ऑनलाइन शॉपिंग, फूड डिलीवरी, कई ओटीटी सब्सक्रिप्शन और बिना जरूरत के खर्च धीरे-धीरे बड़े खर्च में बदल जाते हैं। इसलिए हर महीने अपने खर्चों की समीक्षा करना जरूरी है। इससे पता चलता है कि कहां पैसे की बर्बादी हो रही है और किन खर्चों को कम करके सेविंग्स या निवेश बढ़ाया जा सकता है।


इंश्योरेंस को बजट का हिस्सा बनाएं


हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस को खर्च नहीं, बल्कि सुरक्षा के रूप में देखना चाहिए। एक बड़ी बीमारी या परिवार के कमाने वाले सदस्य के साथ कोई अनहोनी होने पर इंश्योरेंस आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। अगर आपके पास पर्याप्त इंश्योरेंस नहीं है, तो अचानक आने वाला बड़ा खर्च सालों की सेविंग्स को खत्म कर सकता है। इसलिए हर मिडिल क्लास परिवार को अपने मासिक बजट में इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए अलग राशि रखनी चाहिए।


बच्चों के भविष्य के लिए अलग फंड रखें


बच्चों की पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है और आने वाले सालों में शिक्षा और भी महंगी हो सकती है, खासकर हायर एजुकेशन। ऐसे में बच्चों के भविष्य के लिए पहले से प्लानिंग करना जरूरी है। मासिक बजट में एक निश्चित राशि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के लिए अलग रखी जा सकती है। नियमित निवेश के जरिए एक अच्छा फंड तैयार किया जा सकता है, जिससे हायर एजुकेशन के खर्चों को आसानी से पूरा किया जा सके।



हर महीने बजट को जांचें


बजट बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि समय-समय पर उसकी समीक्षा करना भी उतना ही जरूरी है। हर महीने यह देखना चाहिए कि किन चीजों में जरूरत से ज्यादा खर्च हुआ और कहां पैसे बचे। इससे अगले महीने के लिए बेहतर प्लानिंग की जा सकती है। लगातार बजट की समीक्षा करना आपकी वित्तीय योजना को ज्यादा असरदार बनाता है।


इनकम बढ़ने पर सेविंग्स भी बढ़ाएं


अक्सर लोग सैलरी बढ़ने के साथ अपने खर्च भी बढ़ा देते हैं, जिसे लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन कहा जाता है। यह आदत लंबे समय में आपकी फाइनेंशियल ग्रोथ को धीमा कर सकती है। जब भी इनकम बढ़े, तो उसका एक बड़ा हिस्सा सेविंग्स और निवेश में लगाना चाहिए। इससे भविष्य के लिए मजबूत फाइनेंशियल बेस तैयार होता है और बड़े लक्ष्य, जैसे घर खरीदना, बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट की तैयारी, आसान हो जाती है।

खर्चों को काबू में रखना ही सफलता की कुंजी है


एक आइडियल बजट तभी सफल माना जाता है, जब प्लानिंग के हिसाब से खर्च किया जाए। खर्चों को काबू में रखने का मतलब है कि व्यक्ति अपनी इनकम के हिसाब से खर्च करे, उधारी से बचे और नियमित रूप से सेविंग्स व निवेश करता रहे। यही छोटी-छोटी आदतें समय के साथ बड़ा बदलाव ला सकती हैं। यही कोशिशें मिडिल क्लास परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत और सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाती हैं






















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