जम्मू-कश्मीर राजनीति में नई दरारें? एनसी के उमर अब्दुल्ला को अंदरूनी बगावत का शक
राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में हलचल मचा दी है। एनसी को चौथी सीट गंवाने से पार्टी को गहरा सदमा लगा है। कुल 88 विधायकों वाली विधानसभा में एनसी और उसके सहयोगियों के पास मजबूत स्थिति थी, लेकिन आखिरी पल में वोटों का खेल सबकुछ बदल गया। भाजपा ने अप्रत्याशित तरीके से जीत दर्ज की, जो एनसी के लिए चिंता का विषय बन गया। यह हार न केवल वर्तमान गठबंधन की कमजोरी दिखाती है, बल्कि पुरानी राजनीतिक चालबाजियों की पुनरावृत्ति भी। उमर अब्दुल्ला की अगुवाई वाली पार्टी अब इस मामले की गहराई से जांच करने को तैयार है।
मतदान शुक्रवार को हुआ, जहां एनसी के इमरान नबी डार को 22 वोट ही मिल सके। जीत के लिए 29 वोटों की जरूरत थी, लेकिन 7 वोटों का फर्क निर्णायक साबित हुआ। भाजपा के सतीश शर्मा, जो जम्मू-कश्मीर भाजपा इकाई के अध्यक्ष हैं, ने 32 वोट पाकर चौथी सीट कब्जा ली। एनसी के दूसरे उम्मीदवार जीएस ओबेरॉय को 31 वोट मिले। एनसी को 30 वोटों के अलावा 7 अतिरिक्त वोटों पर भरोसा था, लेकिन इनमें से 4 भाजपा के पक्ष में चले गए और 3 अमान्य करार दिए गए। आप के विधायक मेहराज मलिक ने जेल से एनसी के समर्थन में वोट डाला, लेकिन यह व्यर्थ गया।
क्रॉस वोटिंग का इतिहास: पुरानी चालें फिर सामने
जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग कोई नई बात नहीं। 2011 में भाजपा के 11 विधायकों में से 7 ने पार्टी लाइन तोड़कर एनसी को वोट दिया था। 1996 में एनसी के दो विधायकों की भूल से भाजपा के दयाकृष्ण कोटवाल को फायदा हुआ। 2003 में कांग्रेस-पीडीपी गठबंधन के क्रॉस वोट से एनसी के त्रिलोचन सिंह वज़ीर की जीत हुई। इस बार भी संख्या बल के बावजूद एनसी सहयोगियों और निर्दलीयों के वोट संभाल नहीं पाई। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने कहा, ‘अगर एनसी निर्दलीय विधायकों के समर्थन के बावजूद अपने वोट मैनेज नहीं कर पाई, तो हम कैसे करते?’
नेताओं के बयान: धोखे की बात उठी
मुख्यमंत्री और एनसी उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने हार पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा: ‘चौथी सीट पर हमारी हार धोखे का नतीजा है. हमें आखिरी वक्त पर छोड़ दिया गया।’ उन्होंने भाजपा को मिले चार अतिरिक्त वोटों पर सवाल खड़े किए और जानबूझकर गलत प्रेफरेंस मार्क करने का आरोप लगाया। आप विधायक मेहराज मलिक ने जेल से बयान दिया: ‘मैंने एनसी के पक्ष में वोट दिया, लेकिन अब उनके कुछ नेता मुझ पर सवाल उठा रहे हैं। सच तो यह है कि एनसी इस सीट को जीतने के लिए कभी गंभीर ही नहीं थी. मैंने सोचा था कि मेरा वोट फर्क ला सकता है, लेकिन अब समझ आया कि उनके कुछ लोग पहले से ही भाजपा के साथ समझौता कर चुके थे।’ आप नेता जुनैद अज़ीम मट्टू ने एक्स पर लिखा: ‘एनसी का मेहराज मलिक पर भाजपा के साथ जाने का आरोप लगाना बेहद शर्मनाक और हास्यास्पद है।’
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चुनाव नतीजे: एनसी की अप्रत्याशित हार
मतदान शुक्रवार को हुआ, जहां एनसी के इमरान नबी डार को 22 वोट ही मिल सके। जीत के लिए 29 वोटों की जरूरत थी, लेकिन 7 वोटों का फर्क निर्णायक साबित हुआ। भाजपा के सतीश शर्मा, जो जम्मू-कश्मीर भाजपा इकाई के अध्यक्ष हैं, ने 32 वोट पाकर चौथी सीट कब्जा ली। एनसी के दूसरे उम्मीदवार जीएस ओबेरॉय को 31 वोट मिले। एनसी को 30 वोटों के अलावा 7 अतिरिक्त वोटों पर भरोसा था, लेकिन इनमें से 4 भाजपा के पक्ष में चले गए और 3 अमान्य करार दिए गए। आप के विधायक मेहराज मलिक ने जेल से एनसी के समर्थन में वोट डाला, लेकिन यह व्यर्थ गया।
क्रॉस वोटिंग का इतिहास: पुरानी चालें फिर सामने
जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग कोई नई बात नहीं। 2011 में भाजपा के 11 विधायकों में से 7 ने पार्टी लाइन तोड़कर एनसी को वोट दिया था। 1996 में एनसी के दो विधायकों की भूल से भाजपा के दयाकृष्ण कोटवाल को फायदा हुआ। 2003 में कांग्रेस-पीडीपी गठबंधन के क्रॉस वोट से एनसी के त्रिलोचन सिंह वज़ीर की जीत हुई। इस बार भी संख्या बल के बावजूद एनसी सहयोगियों और निर्दलीयों के वोट संभाल नहीं पाई। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने कहा, ‘अगर एनसी निर्दलीय विधायकों के समर्थन के बावजूद अपने वोट मैनेज नहीं कर पाई, तो हम कैसे करते?’
नेताओं के बयान: धोखे की बात उठी
मुख्यमंत्री और एनसी उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने हार पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा: ‘चौथी सीट पर हमारी हार धोखे का नतीजा है. हमें आखिरी वक्त पर छोड़ दिया गया।’ उन्होंने भाजपा को मिले चार अतिरिक्त वोटों पर सवाल खड़े किए और जानबूझकर गलत प्रेफरेंस मार्क करने का आरोप लगाया। आप विधायक मेहराज मलिक ने जेल से बयान दिया: ‘मैंने एनसी के पक्ष में वोट दिया, लेकिन अब उनके कुछ नेता मुझ पर सवाल उठा रहे हैं। सच तो यह है कि एनसी इस सीट को जीतने के लिए कभी गंभीर ही नहीं थी. मैंने सोचा था कि मेरा वोट फर्क ला सकता है, लेकिन अब समझ आया कि उनके कुछ लोग पहले से ही भाजपा के साथ समझौता कर चुके थे।’ आप नेता जुनैद अज़ीम मट्टू ने एक्स पर लिखा: ‘एनसी का मेहराज मलिक पर भाजपा के साथ जाने का आरोप लगाना बेहद शर्मनाक और हास्यास्पद है।’





