राशन कार्ड के नियमों में बड़ा बदलाव: अब किसे मिलेगा हर महीने 7.5 किलो अनाज?
भारत में करोड़ों परिवारों के लिए राशन कार्ड सिर्फ एक पहचान पत्र नहीं बल्कि उनके घर के चूल्हे जलने का आधार है। केंद्र सरकार अब इसी राशन वितरण प्रणाली (PDS) में एक ऐसा ऐतिहासिक बदलाव करने जा रही है जो दशकों से चली आ रही असमानता को दूर कर सकता है। अगर आप या आपका कोई जानने वाला अंत्योदय अन्न योजना (AAY) का लाभार्थी है तो यह खबर सीधे आपके घर के बजट पर असर डालने वाली है।
इसका नतीजा यह होता है कि छोटे परिवारों के पास जरूरत से ज्यादा अनाज जमा हो जाता है जबकि बड़े परिवारों के लिए 35 किलो में पूरे महीने का गुजारा करना मुश्किल हो जाता है। इसी विसंगति को दूर करने के लिए सरकार अब 'प्रति परिवार' के बजाय 'प्रति व्यक्ति' मॉडल की ओर कदम बढ़ा रही है।
यह मात्रा सामान्य राशन कार्डधारकों को मिलने वाले 5 किलो प्रति व्यक्ति से अधिक रखी गई है क्योंकि अंत्योदय श्रेणी में समाज के सबसे गरीब और वंचित वर्ग के लोग आते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इस नई व्यवस्था को मार्च 2026 तक पूरे देश में लागू कर दिया जाए।
बड़े परिवारों को राहत: जिस परिवार में 5 या उससे ज्यादा सदस्य हैं उन्हें पहले के 35 किलो के मुकाबले अब अधिक अनाज मिलेगा। उदाहरण के लिए अगर किसी परिवार में 6 सदस्य हैं तो उन्हें 7.5 किलो के हिसाब से कुल 45 किलो राशन मिलेगा।
छोटे परिवारों पर असर: जिन परिवारों में 4 या उससे कम सदस्य हैं उनके राशन की कुल मात्रा में थोड़ी कमी आ सकती है। जैसे 4 सदस्यों वाले परिवार को अब 30 किलो राशन मिलेगा जो पहले मिलने वाले 35 किलो से 5 किलो कम होगा।
अगर सरकार इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दे देती है तो यह भारत की खाद्य सुरक्षा नीति में एक मानवीय और तार्किक बदलाव होगा। यह सुधार सीधे तौर पर 'इंसान' को केंद्र में रखता है न कि 'परिवार' की संख्या को। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के गरीब परिवारों को बढ़ती महंगाई के दौर में एक मजबूत संबल मिलेगा।
मौजूदा व्यवस्था की चुनौती क्या है?
फिलहाल अंत्योदय राशन कार्ड (गुलाबी या पीला कार्ड) धारकों को प्रति परिवार हर महीने 35 किलो अनाज मिलता है। सुनने में यह एक अच्छी मात्रा लगती है लेकिन इसमें एक बड़ी व्यावहारिक समस्या छिपी है। यह नियम सभी परिवारों पर एक समान लागू होता है चाहे उस परिवार में सिर्फ 2 सदस्य हों या 7 सदस्य हों।इसका नतीजा यह होता है कि छोटे परिवारों के पास जरूरत से ज्यादा अनाज जमा हो जाता है जबकि बड़े परिवारों के लिए 35 किलो में पूरे महीने का गुजारा करना मुश्किल हो जाता है। इसी विसंगति को दूर करने के लिए सरकार अब 'प्रति परिवार' के बजाय 'प्रति व्यक्ति' मॉडल की ओर कदम बढ़ा रही है।
क्या है 7.5 किलो का नया नियम?
केंद्रीय खाद्य मंत्रालय की रिपोर्टों के अनुसार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत नियमों में संशोधन की तैयारी है। नए प्रस्ताव के मुताबिक अंत्योदय लाभार्थियों को अब प्रति व्यक्ति 7.5 किलो अनाज दिया जाएगा।यह मात्रा सामान्य राशन कार्डधारकों को मिलने वाले 5 किलो प्रति व्यक्ति से अधिक रखी गई है क्योंकि अंत्योदय श्रेणी में समाज के सबसे गरीब और वंचित वर्ग के लोग आते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इस नई व्यवस्था को मार्च 2026 तक पूरे देश में लागू कर दिया जाए।
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किसे होगा फायदा और किसे नुकसान?
इस नए नियम के लागू होने से करीब 1.71 करोड़ अंत्योदय परिवारों के समीकरण बदल जाएंगे:बड़े परिवारों को राहत: जिस परिवार में 5 या उससे ज्यादा सदस्य हैं उन्हें पहले के 35 किलो के मुकाबले अब अधिक अनाज मिलेगा। उदाहरण के लिए अगर किसी परिवार में 6 सदस्य हैं तो उन्हें 7.5 किलो के हिसाब से कुल 45 किलो राशन मिलेगा।
छोटे परिवारों पर असर: जिन परिवारों में 4 या उससे कम सदस्य हैं उनके राशन की कुल मात्रा में थोड़ी कमी आ सकती है। जैसे 4 सदस्यों वाले परिवार को अब 30 किलो राशन मिलेगा जो पहले मिलने वाले 35 किलो से 5 किलो कम होगा।
इस बदलाव के पीछे सरकार की सोच
सरकार का मानना है कि इस कदम से राशन की बर्बादी रुकेगी और यह सुनिश्चित होगा कि सहायता उन लोगों तक अधिक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। "जरूरत के हिसाब से वितरण" के इस मॉडल से न केवल खाद्यान्न की बचत होगी बल्कि वितरण प्रणाली में पारदर्शिता भी आएगी।अंत्योदय अन्न योजना के बारे में
अंत्योदय अन्न योजना जिसे कई राज्यों में 'गुलाबी राशन कार्ड' के नाम से भी जाना जाता है राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा का एक अहम हिस्सा है। यह योजना मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जिनके पास आय का कोई निश्चित साधन नहीं है जैसे:- भूमिहीन कृषि मजदूर और सीमांत किसान।
- विधवाएं या गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति।
- 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग जिनका कोई सहारा नहीं है।
- झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले और दिहाड़ी मजदूर।
अगर सरकार इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दे देती है तो यह भारत की खाद्य सुरक्षा नीति में एक मानवीय और तार्किक बदलाव होगा। यह सुधार सीधे तौर पर 'इंसान' को केंद्र में रखता है न कि 'परिवार' की संख्या को। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के गरीब परिवारों को बढ़ती महंगाई के दौर में एक मजबूत संबल मिलेगा।





