Aadhaar Offline Verification: बिना इंटरनेट ऐसे करें आधार वेरिफाई, जानिए आसान तरीका
आधार कार्ड हमारे देश में एक बेहद जरूरी दस्तावेज बन चुका है। बैंक खाता खुलवाना हो, सरकारी योजनाओं का लाभ लेना हो, मोबाइल सिम खरीदना हो, अस्पताल में रजिस्ट्रेशन कराना हो, होटल में चेक-इन करना हो, यात्रा करनी हो या वित्तीय सेवाएं लेनी हों, हर जगह आधार की जरूरत पड़ती है। डिजिटल सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए यूआईडीएआई (UIDAI) ने 'आधार ऑफलाइन वेरिफिकेशन' की सुविधा शुरू की है, ताकि वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित, तेज और निजता (प्राइवेसी) के अनुकूल बनाया जा सके।
इस सुविधा की सबसे खास बात यह है कि इसमें पहचान की पुष्टि के लिए इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं होती है। इसके अलावा, आपकी व्यक्तिगत जानकारी केवल आपकी सहमति से ही शेयर की जाती है। इससे आधार कार्ड की फोटोकॉपी जमा करने या गैर-जरूरी कागजी कार्रवाई की झंझट खत्म हो जाती है और बिना वजह जानकारी शेयर होने का खतरा भी नहीं रहता। आज कई सरकारी विभाग, प्राइवेट कंपनियां, अस्पताल, होटल और फिनटेक कंपनियां इस सुविधा का इस्तेमाल कर रही हैं। आइए जानते हैं कि यह कैसे काम करता है और इसका उपयोग कहां-कहां होता है।
आधार ऑफलाइन वेरिफिकेशन एक डिजिटल पहचान पुष्टि प्रणाली है, जिसके जरिए आपके आधार से जुड़ी जरूरी जानकारी को बिना इंटरनेट के भी वेरीफाई किया जा सकता है। यूआईडीएआई द्वारा शुरू की गई इस सुविधा का मकसद पहचान की प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित और प्राइवेसी के लिहाज से मजबूत बनाना है। इसमें आपका पूरा डेटा शेयर नहीं होता, बल्कि केवल वही जानकारी सामने आती है जिसकी उस सेवा के लिए जरूरत होती है, और वह भी आपकी अनुमति के बाद।
ये भी पढ़ें: आधार कार्ड में मोबाइल नंबर कैसे बदलें, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की डोरस्टेप सर्विस से काम हुआ आसान
पहले ज्यादातर जगहों पर आधार की फोटोकॉपी जमा करनी पड़ती थी। इससे व्यक्तिगत जानकारी के गलत इस्तेमाल की चिंता बनी रहती थी, क्योंकि बिना किसी ठोस जरूरत के कई जगहों पर फोटोकॉपी जमा हो जाती थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए यूआईडीएआई ने ऑफलाइन वेरिफिकेशन की व्यवस्था बनाई है।
यह पूरी प्रक्रिया उपयोगकर्ता की सहमति पर आधारित होती है। जब भी किसी संस्था को आपकी पहचान की पुष्टि करनी होती है, तो आप अपने मोबाइल में मौजूद आधार ऐप के जरिए या यूआईडीएआई द्वारा दिए गए अन्य तरीकों से जरूरी जानकारी शेयर करते हैं। इस प्रक्रिया में संस्था को केवल वही जानकारी मिलती है जो वेरिफिकेशन के लिए आवश्यक है।
यूआईडीएआई ऑफलाइन वेरिफिकेशन के लिए दो प्रमुख विकल्प देता है। पहला तरीका है 'सिक्योर क्यूआर कोड' (Secure QR Code) और दूसरा है 'पेपरलेस ऑफलाइन ई-केवाईसी' (Aadhaar Paperless Offline e-KYC)।
पहला तरीका आधार ऐप में मौजूद सिक्योर क्यूआर कोड का इस्तेमाल करता है। इस क्यूआर कोड को स्कैन किया जाता है और उसमें मौजूद डिजिटल जानकारी को वेरीफाई कर लिया जाता है। यह काम काफी तेजी से पूरा होता है।
दूसरे तरीके में यूआईडीएआई सिस्टम के जरिए एक डिजिटली साइन्ड एक्सएमएल (XML) फाइल बनती है। यूजर इस फाइल को सेवा प्रदाता के साथ शेयर करता है, जो इसे वेरीफाई कर लेता है। इस तरह बिना इंटरनेट के भी पहचान की पुष्टि हो जाती है। यह तरीका पूरी तरह से सुरक्षित माना जाता है।
वेरिफिकेशन की मुख्य प्रक्रिया पूरी तरह से ऑफलाइन होती है, यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। हालांकि, ऐप को डाउनलोड करने, अपडेट करने या कुछ शुरुआती सेवाओं के लिए इंटरनेट की जरूरत पड़ सकती है।
आधार ऐप यूआईडीएआई का आधिकारिक मोबाइल एप्लीकेशन है। इसके जरिए आप अपनी आधार प्रोफाइल देखने, सिक्योर क्यूआर कोड का इस्तेमाल करने, ऑफलाइन ई-केवाईसी और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।
यूआईडीएआई ने इस सुविधा को पूरी तरह सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया है। उपयोगकर्ता की सहमति, डिजिटली साइन्ड डेटा, सीमित जानकारी शेयर करना और सुरक्षित क्यूआर कोड जैसी विशेषताएं आपके डेटा के गलत इस्तेमाल के जोखिम को लगभग खत्म कर देती हैं।
ओवीएसई (Offline Verification Seeking Entity) उन संस्थाओं को कहा जाता है जो यूआईडीएआई के नियमों के तहत ऑफलाइन आधार वेरिफिकेशन की सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए रजिस्टर्ड हैं। इनमें सरकारी विभाग, बैंक, फिनटेक कंपनियां और प्राइवेट संस्थान शामिल हैं।
भारत में डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ ही आधार के ऑफलाइन वेरिफिकेशन का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। सरकारी सेवाओं, हेल्थकेयर, बैंकिंग, ट्रैवल, एजुकेशन और डिजिटल फाइनेंस के क्षेत्र में यह एक बेहद सुरक्षित और तेज तरीका साबित हो रहा है। आने वाले समय में जैसे-जैसे ज्यादा संस्थान इसे अपनाएंगे, कागजरहित डिजिटल पहचान की यह व्यवस्था और भी मजबूत होगी।
इस सुविधा की सबसे खास बात यह है कि इसमें पहचान की पुष्टि के लिए इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं होती है। इसके अलावा, आपकी व्यक्तिगत जानकारी केवल आपकी सहमति से ही शेयर की जाती है। इससे आधार कार्ड की फोटोकॉपी जमा करने या गैर-जरूरी कागजी कार्रवाई की झंझट खत्म हो जाती है और बिना वजह जानकारी शेयर होने का खतरा भी नहीं रहता। आज कई सरकारी विभाग, प्राइवेट कंपनियां, अस्पताल, होटल और फिनटेक कंपनियां इस सुविधा का इस्तेमाल कर रही हैं। आइए जानते हैं कि यह कैसे काम करता है और इसका उपयोग कहां-कहां होता है।
आधार ऑफलाइन वेरिफिकेशन क्या है?
आधार ऑफलाइन वेरिफिकेशन एक डिजिटल पहचान पुष्टि प्रणाली है, जिसके जरिए आपके आधार से जुड़ी जरूरी जानकारी को बिना इंटरनेट के भी वेरीफाई किया जा सकता है। यूआईडीएआई द्वारा शुरू की गई इस सुविधा का मकसद पहचान की प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित और प्राइवेसी के लिहाज से मजबूत बनाना है। इसमें आपका पूरा डेटा शेयर नहीं होता, बल्कि केवल वही जानकारी सामने आती है जिसकी उस सेवा के लिए जरूरत होती है, और वह भी आपकी अनुमति के बाद।
ये भी पढ़ें: आधार कार्ड में मोबाइल नंबर कैसे बदलें, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की डोरस्टेप सर्विस से काम हुआ आसान
क्यों शुरू की गई यह सुविधा?
पहले ज्यादातर जगहों पर आधार की फोटोकॉपी जमा करनी पड़ती थी। इससे व्यक्तिगत जानकारी के गलत इस्तेमाल की चिंता बनी रहती थी, क्योंकि बिना किसी ठोस जरूरत के कई जगहों पर फोटोकॉपी जमा हो जाती थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए यूआईडीएआई ने ऑफलाइन वेरिफिकेशन की व्यवस्था बनाई है।
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कैसे काम करता है यह सिस्टम?
यह पूरी प्रक्रिया उपयोगकर्ता की सहमति पर आधारित होती है। जब भी किसी संस्था को आपकी पहचान की पुष्टि करनी होती है, तो आप अपने मोबाइल में मौजूद आधार ऐप के जरिए या यूआईडीएआई द्वारा दिए गए अन्य तरीकों से जरूरी जानकारी शेयर करते हैं। इस प्रक्रिया में संस्था को केवल वही जानकारी मिलती है जो वेरिफिकेशन के लिए आवश्यक है।
ऑफलाइन वेरिफिकेशन के दो मुख्य तरीके
यूआईडीएआई ऑफलाइन वेरिफिकेशन के लिए दो प्रमुख विकल्प देता है। पहला तरीका है 'सिक्योर क्यूआर कोड' (Secure QR Code) और दूसरा है 'पेपरलेस ऑफलाइन ई-केवाईसी' (Aadhaar Paperless Offline e-KYC)।
पहला तरीका आधार ऐप में मौजूद सिक्योर क्यूआर कोड का इस्तेमाल करता है। इस क्यूआर कोड को स्कैन किया जाता है और उसमें मौजूद डिजिटल जानकारी को वेरीफाई कर लिया जाता है। यह काम काफी तेजी से पूरा होता है।
दूसरे तरीके में यूआईडीएआई सिस्टम के जरिए एक डिजिटली साइन्ड एक्सएमएल (XML) फाइल बनती है। यूजर इस फाइल को सेवा प्रदाता के साथ शेयर करता है, जो इसे वेरीफाई कर लेता है। इस तरह बिना इंटरनेट के भी पहचान की पुष्टि हो जाती है। यह तरीका पूरी तरह से सुरक्षित माना जाता है।
क्या इसके लिए इंटरनेट जरूरी है?
वेरिफिकेशन की मुख्य प्रक्रिया पूरी तरह से ऑफलाइन होती है, यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। हालांकि, ऐप को डाउनलोड करने, अपडेट करने या कुछ शुरुआती सेवाओं के लिए इंटरनेट की जरूरत पड़ सकती है।
क्या है आधार ऐप?
आधार ऐप यूआईडीएआई का आधिकारिक मोबाइल एप्लीकेशन है। इसके जरिए आप अपनी आधार प्रोफाइल देखने, सिक्योर क्यूआर कोड का इस्तेमाल करने, ऑफलाइन ई-केवाईसी और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।
मोबाइल में आधार ऐप कैसे सेटअप करें?
- सबसे पहले अपने स्मार्टफोन के ऑफिशियल ऐप स्टोर पर जाएं।
- वहां से ऑफिशियल यूआईडीएआई आधार ऐप डाउनलोड करें।
- ऐप को इंस्टॉल करें और मांगी गई जरूरी परमिशन दें।
- अपनी पहचान की पुष्टि करें।
- अब आप ऐप की सेवाओं का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं।
कितना सुरक्षित है यह सिस्टम?
यूआईडीएआई ने इस सुविधा को पूरी तरह सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया है। उपयोगकर्ता की सहमति, डिजिटली साइन्ड डेटा, सीमित जानकारी शेयर करना और सुरक्षित क्यूआर कोड जैसी विशेषताएं आपके डेटा के गलत इस्तेमाल के जोखिम को लगभग खत्म कर देती हैं।
क्या है ओवीएसई (OVSE)?
ओवीएसई (Offline Verification Seeking Entity) उन संस्थाओं को कहा जाता है जो यूआईडीएआई के नियमों के तहत ऑफलाइन आधार वेरिफिकेशन की सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए रजिस्टर्ड हैं। इनमें सरकारी विभाग, बैंक, फिनटेक कंपनियां और प्राइवेट संस्थान शामिल हैं।
भविष्य में कितना बढ़ेगा इसका इस्तेमाल?
भारत में डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ ही आधार के ऑफलाइन वेरिफिकेशन का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। सरकारी सेवाओं, हेल्थकेयर, बैंकिंग, ट्रैवल, एजुकेशन और डिजिटल फाइनेंस के क्षेत्र में यह एक बेहद सुरक्षित और तेज तरीका साबित हो रहा है। आने वाले समय में जैसे-जैसे ज्यादा संस्थान इसे अपनाएंगे, कागजरहित डिजिटल पहचान की यह व्यवस्था और भी मजबूत होगी।





