बंगाल में खिला कमल तो लखनऊ में बढ़ी धड़कनें, समझिए ममता बनर्जी की हार से कैसे बढ़ेंगी अखिलेश यादव की मुश्किलें

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की करारी हार सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं रहने वाली है। इसके नतीजे साल 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश बीजेपी के कैडर में जबरदस्त जोश भर सकते हैं। आइए समझते हैं कि बंगाल में होने वाली बीजेपी की यह बड़ी जीत यूपी में समाजवादी पार्टी की मुश्किलें कैसे बढ़ा सकती है।
Hero Image


बंगाल की जीत का यूपी में मिलेगा फायदा!

वैसे तो लखनऊ से कोलकाता की दूरी करीब एक हजार किलोमीटर है, लेकिन बीजेपी को भरोसा है कि बंगाल की जीत का सीधा असर 2027 के यूपी चुनाव पर पड़ेगा। इस जीत ने बीजेपी कार्यकर्ताओं के मुरझाए चेहरों पर रौनक ला दी है। बीजेपी के एक सीनियर नेता की मानें तो लगातार सत्ता में रहने की वजह से कार्यकर्ताओं में जो थोड़ी सुस्ती या असंतोष दिख रहा था, वह अब खत्म हो जाएगा। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी में जो नुकसान हुआ था, उसकी भरपाई के लिए यह जीत एक संजीवनी की तरह है।

ये भी पढ़ें: बंगाल में पहली बार खिलने जा रहा कमल, तमिलनाडु में आई सुपरस्टार विजय की आंधी; 5 राज्यों के चुनावी नतीजों के क्या हैं मायने?


बूस्टर की तरह काम करेगी जीत

पार्टी को अब लग रहा है कि पश्चिम बंगाल के नतीजे यूपी के कार्यकर्ताओं के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं हैं। बीजेपी का मानना है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता, हिंदुत्व और बेहतर कानून व्यवस्था के मुद्दे पर वे तीसरी बार यूपी में सरकार बना लेंगे। इसके साथ ही, बंगाल में ममता की हार से इंडिया गठबंधन और यूपी में विपक्ष का मनोबल टूटना तय माना जा रहा है।

BJP ने तोड़ा 30 फीसदी मुस्लिम वोटों का मिथक

ध्यान देने वाली बात यह है कि बंगाल में करीब 25 से 30 फीसदी मुस्लिम वोट हैं। वहां बीजेपी की जीत ने यह साबित कर दिया है कि भारी मुस्लिम आबादी वाले राज्यों में भी कमल खिल सकता है। अब बीजेपी के लिए तर्क आसान है कि जब बंगाल जीता जा सकता है, तो 19 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले यूपी में योगी आदित्यनाथ जैसे बड़े हिंदुत्व चेहरे के साथ तीसरी बार सरकार बनाना कोई मुश्किल काम नहीं है।


ममता बनर्जी का हारना सपा के लिए झटका!

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लगातार ममता बनर्जी की जीत की उम्मीद जता रहे थे। अब बंगाल के नतीजे इंडिया गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका हैं। हालांकि, सपा नेताओं का कहना है कि बंगाल और यूपी के चुनाव में जमीन आसमान का फर्क है। वहां मुद्दे अलग थे और यूपी के जातीय समीकरण एकदम अलग हैं।

दोगुनी ताकत से बीजेपी को घेरने की तैयारी

सपा का तर्क है कि बंगाल में ममता 15 साल से सत्ता में थीं और वहां एंटी-इनकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) थी। इसके उलट यूपी में बीजेपी 10 साल से सत्ता में है और लोग अब बदलाव चाहते हैं। पार्टी मानती है कि ममता की हार से दुख जरूर है, लेकिन इससे यूपी का विपक्ष डरेगा नहीं बल्कि दोगुनी ताकत से बीजेपी का मुकाबला करेगा।

PDA फॉर्मूले पर टिकी सपा की उम्मीद

पिछले लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव का पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला सुपरहिट रहा था। इंडिया गठबंधन ने यूपी में 43 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था। समाजवादी पार्टी को पूरा भरोसा है कि बंगाल के नतीजों का यूपी की जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा और उनका पीडीए फॉर्मूला 2027 में भी कमाल दिखाएगा।