Corporate Life छोड़ 35 की उम्र में लिया रिटायरमेंट, जानिए क्यों वायरल हुई यह कहानी

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आज के दौर में जहां ज्यादातर लोग नौकरी में स्थिरता तलाशते हैं, वहीं 35 साल के एक भारतीय प्रोफेशनल का फैसला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। 11 साल तक कॉर्पोरेट दुनिया में काम करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया और कहा कि अब वह पारंपरिक वर्क लाइफ से बाहर निकल रहे हैं। यह कहानी सिर्फ एक इस्तीफे की नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट लाइफ, बर्नआउट और काम के मतलब पर नई बहस छेड़ने वाली बन गई है।
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11 साल की नौकरी के बाद क्यों लिया यह फैसला


रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोफेशनल का नाम बिस्वजीत मोहंती है। उन्होंने एक वीडियो में बताया कि 12 साल की स्कूली पढ़ाई, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए लिया गया एजुकेशन लोन और फिर 11 साल का कॉर्पोरेट करियर, इन सबके बाद उन्होंने खुद से गंभीर सवाल पूछने शुरू किए।

करीब तीन साल पहले उन्हें महसूस हुआ कि वह अपनी पूरी जिंदगी इसी तरह कॉर्पोरेट नौकरी में नहीं बिताना चाहते। इसी आत्ममंथन ने उन्हें 35 की उम्र में नौकरी छोड़ने का फैसला लेने की ओर बढ़ाया। यह फैसला अचानक नहीं था, बल्कि लंबे समय से चल रही सोच का नतीजा था।



दो सवालों ने बदल दी सोच


बिस्वजीत मोहंती के मुताबिक, उन्होंने खुद से दो अहम सवाल पूछे। पहला, क्या उनका काम सच में किसी के जीवन में फर्क ला रहा है। दूसरा, अगर उनके पास आर्थिक सुरक्षा पहले से हो, तो क्या वह फिर भी यही काम करना चाहेंगे।

इन सवालों का जवाब ढूंढते-ढूंढते उन्हें एहसास हुआ कि सिर्फ बैंक बैलेंस ही संतोष नहीं देता। यही सोच उनके लिए कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने की सबसे बड़ी वजह बनी। हाल के दिनों में यही बात सोशल मीडिया पर लोगों को सबसे ज्यादा जोड़ती हुई दिखाई दी है।

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पिछले तीन साल से कर रहे थे तैयारी


यह फैसला एक दिन में नहीं लिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिस्वजीत पिछले तीन साल से खुद को इस बदलाव के लिए तैयार कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपने समय और ऊर्जा को खुद को समझने, नई दिशा खोजने और अपने भीतर की प्राथमिकताओं को पहचानने में लगाया।

उन्होंने यह भी माना कि इस रास्ते में अनिश्चितता है, लेकिन फिर भी उन्हें लगा कि अब वही करना चाहिए जिसमें उन्हें मानसिक शांति और व्यक्तिगत अर्थ महसूस हो। यही वजह है कि उनका यह early retirement फैसला कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है।


सोशल मीडिया पर क्यों हो रही है इतनी चर्चा


35 साल की उम्र में कॉर्पोरेट जीवन छोड़ने का यह फैसला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने इसे millennial burnout और work-life balance से जोड़कर देखा।

ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं में बड़ी संख्या में लोगों ने कहा कि यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन तमाम प्रोफेशनल्स की है जो लंबे समय से लगातार काम के दबाव, थकान और उद्देश्यहीनता से जूझ रहे हैं। यही वजह है कि यह कॉर्पोरेट रिटायरमेंट चर्चा सिर्फ एक वायरल पोस्ट तक सीमित नहीं रही।



क्या यह सिर्फ नौकरी छोड़ना है या बदलती सोच का संकेत


यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति के नौकरी छोड़ने की खबर नहीं है। यह उस बदलती सोच की झलक भी है जिसमें अब युवा प्रोफेशनल्स सिर्फ सैलरी या स्थिरता नहीं, बल्कि मानसिक शांति, व्यक्तिगत संतोष और जीवन के अर्थ को भी उतनी ही अहमियत देने लगे हैं।

बिस्वजीत मोहंती का फैसला हर किसी के लिए सही रास्ता हो, यह जरूरी नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि इसने कॉर्पोरेट लाइफ, सफलता की परिभाषा और निजी संतुलन पर नई बातचीत शुरू कर दी है।








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