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Explainer: NEET-UG का प्रश्नपत्र कैसे तैयार होता है? जानिए NTA की पूरी प्रक्रिया

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NEET-UG का री-एग्जाम 21 जून को होने वाला है। NTA ने अनुमान लगाया है कि इसमें इस बार 20 लाख से भी ज्यादा बच्चे शामिल होंगे। भारत में मेडिकल कॉलेजों के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षाओं में NEET-UG को सबसे प्रतिष्ठित माना जाता है। भारत में लाखों बच्चे सालों-साल NEET परीक्षा की तैयारी में लगे रहते हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों से NEET-UG परीक्षा पेपर लीक के कारण विवादों में रही है। ऐसे में हर बच्चे और परिवार वालों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर बार-बार पेपर लीक कैसे हो जाता है या पेपर कौन तैयार करता है। इस एक्सप्लेनर में आइए जानते हैं कि NEET-UG का पेपर तैयार कैसे होता है।
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NTA की भूमिका क्या है?



भारत में NEET-UG परीक्षा NTA यानी National Testing Agency करवाती है। NTA भारत सरकार द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था है। इसकी स्थापना साल 2017 में शिक्षा मंत्रालय के आदेशों के तहत की गई थी।



NTA का सबसे अहम काम देशभर में होने वाली प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और बिना किसी परेशानी के आयोजित करना है। इससे पहले कई परीक्षाएं अलग-अलग संस्थाओं द्वारा आयोजित की जाती थीं, लेकिन अब NTA कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को करवाती है।


NTA कौन-कौन सी परीक्षाएं आयोजित करती है?



  • NEET (UG) – मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए
  • JEE Main – इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए
  • CUET UG/PG – केंद्रीय और अन्य विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए
  • UGC NET – असिस्टेंट प्रोफेसर और JRF के लिए
  • अन्य विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएं

NTA का मुख्य काम क्या है?



  • परीक्षा का आयोजन करना
  • प्रश्नपत्र तैयार करवाना
  • परीक्षा केंद्रों का मैनेजमेंट
  • Answer Key जारी करना
  • रिजल्ट जारी करना
  • परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखना
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NEET-UG का पेपर कैसे तैयार होता है?



एक्सपर्ट टीम का गठन – बायोलॉजी (जीवविज्ञान), फिजिक्स (भौतिकी) और केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) के अनुभवी प्रोफेसर, सब्जेक्ट एक्सपर्ट और टीचरों की टीम बनाई जाती है।


NCERT आधारित सवाल तैयार करना – मुख्य रूप से सवाल NCERT की किताबों और सिलेबस के आधार पर तैयार किए जाते हैं।

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क्वेश्चन बैंक तैयार किया जाता है – एक्सपर्ट बड़ी संख्या में सवाल तैयार करते हैं। इनमें आसान, मध्यम और कठिन स्तर के सवाल शामिल होते हैं।


मॉडरेशन और समीक्षा – सवालों की कई स्तरों पर जांच की जाती है, ताकि गलत या आउट-ऑफ-सिलेबस सवालों को पेपर से बाहर रखा जाए।


मुख्य क्वेश्चन पेपर का चयन – बड़े क्वेश्चन बैंक में से अंतिम सवाल चुने जाते हैं। इन सवालों से कुछ सेट तैयार किए जाते हैं। आमतौर पर एक से अधिक सेट तैयार किए जाते हैं, ताकि सुरक्षा बनी रहे।


सुरक्षा और एन्क्रिप्शन – क्वेश्चन पेपर को बहुत ही सुरक्षित डिजिटल सिस्टम में रखा जाता है। प्रिंटिंग, पैकेजिंग और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी कड़ी निगरानी में होती है।

गोपनीयता बनाए रखना – क्वेश्चन पेपर बनाने से जुड़े लोगों को गोपनीयता बनाए रखने के लिए सख्त सुरक्षा कायदे-कानूनों का पालन करना होता है।


परीक्षा केंद्र तक क्वेश्चन पेपर कैसे पहुंचता है?


क्वेश्चन पेपर तैयार होने के बाद उसे कड़ी सुरक्षा के साथ सीलबंद पैकेटों में रखा जाता है। इसके बाद सुरक्षित वाहनों के जरिए इन्हें अलग-अलग परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखी जाती है और सिर्फ कुछ खास अधिकारियों को ही इसकी जानकारी होती है। परीक्षा शुरू होने से पहले तक क्वेश्चन पेपर सीलबंद रहते हैं। इससे गोपनीयता बनी रहती है और क्वेश्चन पेपर लीक होने के खतरे को कम किया जाता है।

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कैसे लीक हुआ 2026 NEET-UG का पेपर


2026 NEET-UG का पेपर लीक तब सामने आया, जब कुछ बच्चों ने एक वायरल गेस पेपर और NEET-UG 2026 के मुख्य क्वेश्चन पेपर का मिलान किया। दरअसल, NEET-UG 2026 परीक्षा के कुछ दिनों पहले से ही एक कथित गेस पेपर तेजी से टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर वायरल हो रहा था। इस गेस पेपर के कई सवाल मुख्य पेपर से मेल खा रहे थे। जिसके बाद कथित पेपर लीक की पुष्टि करते हुए खुद NTA ने परीक्षा रद्द कर दी।

पेपर लीक की जांच में पता चला कि NEET-UG परीक्षा के पेपर तैयार करने वाली एक्सपर्ट टीम के कुछ एक्सपर्ट्स ने ही कथित पेपर लीक किया। जिसे लाखों रुपयों में बच्चों को बेचा गया।

NTA की सुरक्षा व्यवस्था में हालिया बदलाव


पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक के आरोपों और विवादों के बाद NTA ने परीक्षा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए कई नए कदम उठाए हैं। अब प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया पर बहु-स्तरीय निगरानी रखी जाती है। प्रश्नपत्रों को सुरक्षित डिजिटल सिस्टम में एन्क्रिप्ट करके रखा जाता है और उनकी पहुंच केवल चुनिंदा अधिकारियों तक सीमित होती है। इसके अलावा, परीक्षा केंद्रों पर CCTV निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन और कड़ी सुरक्षा जांच की व्यवस्था की गई है। NTA ने प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग, पैकेजिंग और परिवहन प्रक्रिया में भी अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए हैं। इन उपायों का उद्देश्य परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखना और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या पेपर लीक की संभावना को न्यूनतम करना है।















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