राजधानी एक्सप्रेस या वंदे भारत? जानिए सुविधाओं और स्पीड में कौन सी ट्रेन है बेहतर
अगर आप अक्सर ट्रेन से सफर करते हैं, तो यह जानकारी आपके काफी काम आ सकती है। भारतीय रेलवे के नेटवर्क में राजधानी एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस दोनों ही प्रीमियम श्रेणी की ट्रेनें मानी जाती हैं। हालांकि, इन दोनों ट्रेनों की शुरुआत, बनावट और उद्देश्य में काफी अंतर है। देखा जाए तो यह दोनों ट्रेनें एक-दूसरे की विरोधी नहीं हैं, बल्कि इन्हें यात्रियों की अलग-अलग जरूरतों और सफर की दूरी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
देश की पहली राजधानी एक्सप्रेस साल 1969 में नई दिल्ली से हावड़ा के बीच चलाई गई थी। इसका मुख्य मकसद देश की राजधानी दिल्ली को अलग-अलग राज्यों की राजधानियों और बड़े शहरों से जोड़ना था, ताकि लोग रातभर में आरामदायक सफर पूरा कर सकें। वहीं, देश की पहली सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन यानी वंदे भारत एक्सप्रेस फरवरी 2019 में नई दिल्ली से वाराणसी के बीच शुरू की गई थी।
स्पीड और पिकअप के मामले में कौन आगे?
वंदे भारत एक्सप्रेस को 180 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है और यह उपयुक्त ट्रैकों पर 160 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चल सकती है। इसके मुकाबले ज्यादातर राजधानी ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 130 किमी प्रति घंटा होती है। राजधानी में इंजन अलग से लगाना पड़ता है, जबकि वंदे भारत एक 'सेल्फ-प्रोपेल्ड' यानी बिना अलग इंजन वाली ट्रेन है। यह ट्रेन महज 52 सेकंड में 0 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है और स्पीड कम होने के बाद दोबारा तेजी से रफ्तार पकड़ सकती है।
सीटिंग क्लास और कोच की सुविधाएं
वंदे भारत एक्सप्रेस में आपको स्टैंडर्ड चेयर कार (Chair Car) और एग्जीक्यूटिव चेयर कार (Executive Chair Car) की सुविधा मिलती है। इसमें ऑटोमैटिक स्लाइडिंग दरवाजे, जीपीएस आधारित पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम, आधुनिक सस्पेंशन और 180 डिग्री तक घूमने वाली सीटें मौजूद हैं।
दूसरी तरफ, राजधानी एक्सप्रेस में लंबे सफर के लिए स्लीपर सुविधाएं होती हैं, जिसमें फर्स्ट एसी, सेकंड एसी और थर्ड एसी कोच शामिल हैं। अब कुछ रूट्स पर आधुनिक 'तेजस-राजधानी' कोच भी लगाए गए हैं, जिनमें ऑटोमैटिक दरवाजे और बायो-वैक्यूम टॉयलेट दिए गए हैं। इसके अलावा, रात के लंबे सफर को ध्यान में रखते हुए वंदे भारत का स्लीपर मॉडल भी पेश किया जा रहा है। इसमें गद्देदार बर्थ, कम आवाज वाली तकनीक, सेंसर आधारित लाइटें और फर्स्ट एसी में गर्म पानी जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
खाने-पीने की कैसी है व्यवस्था?
वंदे भारत एक्सप्रेस में आईआरसीटीसी (IRCTC) की तरफ से स्नैक्स, ब्रेकफास्ट, लंच या डिनर सर्व किया जाता है। यात्री टिकट बुक करते समय चाहें तो खाने का विकल्प हटा भी सकते हैं, जिससे टिकट का किराया कम हो जाता है।
क्योंकि राजधानी एक्सप्रेस का सफर काफी लंबा होता है, इसलिए इसमें सुबह की चाय, नाश्ता, दोपहर का खाना, शाम की चाय-नाश्ता, सूप और रात के खाने की तय व्यवस्था होती है। फर्स्ट एसी के यात्रियों को स्पेशल मेन्यू और सूप भी दिया जाता है।
अस्वीकरण: यह केवल सामान्य जागरूकता और सूचना के उद्देश्य से दी गई है। भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी की ट्रेनों के समय, सुविधाओं, किराए और कैटरिंग नियमों में समय-समय पर बदलाव हो सकते हैं। यात्रा से जुड़ी सटीक और ताजा जानकारी के लिए हमेशा भारतीय रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट (IRCTC) या रेलवे पूछताछ नंबर 139 से पुष्टि करें।
देश की पहली राजधानी एक्सप्रेस साल 1969 में नई दिल्ली से हावड़ा के बीच चलाई गई थी। इसका मुख्य मकसद देश की राजधानी दिल्ली को अलग-अलग राज्यों की राजधानियों और बड़े शहरों से जोड़ना था, ताकि लोग रातभर में आरामदायक सफर पूरा कर सकें। वहीं, देश की पहली सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन यानी वंदे भारत एक्सप्रेस फरवरी 2019 में नई दिल्ली से वाराणसी के बीच शुरू की गई थी।
स्पीड और पिकअप के मामले में कौन आगे?
वंदे भारत एक्सप्रेस को 180 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है और यह उपयुक्त ट्रैकों पर 160 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चल सकती है। इसके मुकाबले ज्यादातर राजधानी ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 130 किमी प्रति घंटा होती है। राजधानी में इंजन अलग से लगाना पड़ता है, जबकि वंदे भारत एक 'सेल्फ-प्रोपेल्ड' यानी बिना अलग इंजन वाली ट्रेन है। यह ट्रेन महज 52 सेकंड में 0 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है और स्पीड कम होने के बाद दोबारा तेजी से रफ्तार पकड़ सकती है।
सीटिंग क्लास और कोच की सुविधाएं
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वंदे भारत एक्सप्रेस में आपको स्टैंडर्ड चेयर कार (Chair Car) और एग्जीक्यूटिव चेयर कार (Executive Chair Car) की सुविधा मिलती है। इसमें ऑटोमैटिक स्लाइडिंग दरवाजे, जीपीएस आधारित पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम, आधुनिक सस्पेंशन और 180 डिग्री तक घूमने वाली सीटें मौजूद हैं।
दूसरी तरफ, राजधानी एक्सप्रेस में लंबे सफर के लिए स्लीपर सुविधाएं होती हैं, जिसमें फर्स्ट एसी, सेकंड एसी और थर्ड एसी कोच शामिल हैं। अब कुछ रूट्स पर आधुनिक 'तेजस-राजधानी' कोच भी लगाए गए हैं, जिनमें ऑटोमैटिक दरवाजे और बायो-वैक्यूम टॉयलेट दिए गए हैं। इसके अलावा, रात के लंबे सफर को ध्यान में रखते हुए वंदे भारत का स्लीपर मॉडल भी पेश किया जा रहा है। इसमें गद्देदार बर्थ, कम आवाज वाली तकनीक, सेंसर आधारित लाइटें और फर्स्ट एसी में गर्म पानी जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
खाने-पीने की कैसी है व्यवस्था?
वंदे भारत एक्सप्रेस में आईआरसीटीसी (IRCTC) की तरफ से स्नैक्स, ब्रेकफास्ट, लंच या डिनर सर्व किया जाता है। यात्री टिकट बुक करते समय चाहें तो खाने का विकल्प हटा भी सकते हैं, जिससे टिकट का किराया कम हो जाता है।
क्योंकि राजधानी एक्सप्रेस का सफर काफी लंबा होता है, इसलिए इसमें सुबह की चाय, नाश्ता, दोपहर का खाना, शाम की चाय-नाश्ता, सूप और रात के खाने की तय व्यवस्था होती है। फर्स्ट एसी के यात्रियों को स्पेशल मेन्यू और सूप भी दिया जाता है।
अस्वीकरण: यह केवल सामान्य जागरूकता और सूचना के उद्देश्य से दी गई है। भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी की ट्रेनों के समय, सुविधाओं, किराए और कैटरिंग नियमों में समय-समय पर बदलाव हो सकते हैं। यात्रा से जुड़ी सटीक और ताजा जानकारी के लिए हमेशा भारतीय रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट (IRCTC) या रेलवे पूछताछ नंबर 139 से पुष्टि करें।





