RBI Rate Hike Alert: क्या फिर महंगी होगी बैंक EMI? जानें बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट का दावा
नई दिल्ली: आने वाले दिनों में देश भर के आम लोगों और कर्ज लेने वालों की बैंक लोन EMI बढ़ सकती है। बैंक ऑफ बड़ौदा की हाल ही में शनिवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) महंगाई पर लगाम लगाने और बाजार में नकदी के संतुलन को सुधारने के लिए मौजूदा चक्र में ब्याज दरों में 0.50 से 0.75 प्रतिशत (50-75 bps) की बढ़ोतरी कर सकता है।

केंद्रीय बैंक ने लगभग चार वर्षों में पहली बार अपनी नीतिगत ब्याज दरों में 0.25% की वृद्धि की है। इसके अलावा, RBI ने अपना रुख "न्यूट्रल" से बदलकर "कैलिब्रेटेड टाइटनिंग" कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त नकदी को सोखने के बाद RBI अपनी आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों को बढ़ाने पर विचार कर सकता है।
त्यौहारी सीजन में मांग और खपत में तेजी
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देश में त्यौहारी सीजन के दौरान खपत काफी मजबूत रही है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि सितंबर के महीने में मांग का माहौल काफी बेहतर था। इस दौरान ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और गैर-तेल व गैर-सोने के आयात में बड़ा उछाल देखा गया। इसके साथ ही बिजली की बढ़ती मांग, स्टील की खपत में तेजी और पर्सनल लोन क्षेत्र में दर्ज की गई बढ़त देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है। हालांकि, RBI के सर्वे का हवाला देते हुए रिपोर्ट में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उपभोक्ता आत्मविश्वास में आई गिरावट पर चिंता भी जताई गई है।
कमजोर मानसून और कृषि क्षेत्र की चुनौतियां
कृषि क्षेत्र की बात करें तो अल नीनो (El Nino) के प्रभाव के कारण भारत में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से 13% कम रहा है। इस कमजोर मानसून का सीधा असर खरीफ फसलों की पैदावार पर पड़ा है। इसके अलावा, देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर घट गया है, जिससे आने वाली रबी फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। यह स्थिति आने वाले समय में खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव बढ़ा सकती है।
सरकारी खजाना और टैक्स कलेक्शन की स्थिति
रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार का वित्तीय घाटा सितंबर 2026 तक सुधरकर 4.4 प्रतिशत पर आ गया है, जो बीते साल सितंबर में 5.1 प्रतिशत था। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में सरकार के कुल राजस्व में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस दौरान प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) संग्रह में 13.1 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जिससे सरकार को राहत मिली है। वहीं दूसरी ओर, अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) संग्रह में 4.9 प्रतिशत की गिरावट आई है। हालांकि, इस अवधि में सरकार का खर्च 10.7 प्रतिशत के साथ मजबूत बना हुआ है।





