बादल ऊपर नहीं बल्कि नीचे दिखाई देते हैं, इस अनोखी प्राकृतिक घटना का रहस्य

Newspoint
कल्पना कीजिए कि आप सुबह-सुबह किसी ऊंचे पहाड़ की चोटी पर खड़े हैं और नीचे का पूरा इलाका गायब नजर आता है। उसकी जगह दूर तक फैली सफेद चादर दिखाई देती है, जैसे पहाड़ के नीचे बादलों का पूरा समंदर बन गया हो। कभी-कभी कुछ दूसरी चोटियां इस सफेद परत से बाहर निकलती हुई नजर आती हैं, जिससे पूरा दृश्य किसी दूसरी दुनिया जैसा लगता है। इस घटना को आम तौर पर Sea of Clouds यानी बादलों का समंदर कहा जाता है। जापान के ह्योगो प्रीफेक्चर में स्थित ताकेदा कैसल इस तरह के नजारे के लिए खास तौर पर प्रसिद्ध है। सही मौसम में यहां पहाड़ी के नीचे जमा बादल किले को हवा में तैरता हुआ दिखा सकते हैं।
Hero Image


नीचे कैसे बन जाते हैं बादल?

आमतौर पर हम बादलों को आसमान में देखते हैं, लेकिन पहाड़ी इलाकों में परिस्थितियां कुछ अलग हो सकती हैं। रात के दौरान जमीन तेजी से ठंडी होती है और उसके आसपास की नम हवा भी ठंडी होने लगती है।

अगर ठंडी हवा किसी घाटी में फंस जाए और उसके ऊपर अपेक्षाकृत गर्म हवा की परत मौजूद हो, तो हवा का सामान्य ऊपर-नीचे मिश्रण रुक सकता है। इसे Temperature Inversion यानी तापमान प्रतिलोमन कहा जाता है।


नमी वाली ठंडी हवा जब संघनित होती है तो घाटी में कोहरा या निचले स्तर के बादल बन सकते हैं। पहाड़ की ऊंचाई इन बादलों से ऊपर हो तो वहां खड़ा व्यक्ति उन्हें नीचे से नहीं, बल्कि ऊपर से देखता है।

जापान का मशहूर ‘कैसल इन द स्काई’

जापान का ताकेदा कैसल इस प्राकृतिक घटना का शानदार उदाहरण है। ह्योगो में लगभग 353 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस पुराने किले के खंडहरों को कभी-कभी "Castle in the Sky" कहा जाता है।

You may also like



सुबह के समय आसपास की घाटियों में धुंध जमा होने पर किले के आसपास का निचला हिस्सा सफेद बादलों से ढक जाता है। पास के रित्सुंक्यो व्यूपॉइंट से यह दृश्य और भी प्रभावशाली दिखाई देता है। जापान के आधिकारिक पर्यटन संगठन के अनुसार, अक्टूबर और नवंबर में सूर्योदय के आसपास इस घटना को देखने की संभावना अच्छी रहती है, हालांकि मौसम की गारंटी नहीं होती।

हर सुबह ऐसा नजारा क्यों नहीं दिखता?

बादलों का यह समंदर बनने के लिए कई परिस्थितियों का एक साथ मिलना जरूरी है। रात साफ और ठंडी होनी चाहिए, हवा में पर्याप्त नमी होनी चाहिए और घाटी में ठंडी हवा जमा होनी चाहिए।

इसी वजह से एक ही जगह पर जाकर भी हर दिन यह दृश्य दिखाई दे, ऐसा जरूरी नहीं है। फोटोग्राफर अक्सर सूर्योदय से पहले पहुंचते हैं, क्योंकि कुछ ही समय में सूरज की गर्मी घाटी की धुंध को कमजोर कर सकती है।

पहाड़ और बादलों का खास रिश्ता

पहाड़ खुद भी बादल बनने में भूमिका निभा सकते हैं। जब नम हवा पहाड़ से टकराकर ऊपर उठती है, तो ऊंचाई बढ़ने के साथ वह ठंडी होती है। पर्याप्त नमी होने पर जलवाष्प संघनित होकर बादल बना सकती है। इसे Orographic Cloud Formation कहा जाता है।


इसलिए पहाड़ केवल बादलों के ऊपर खड़े होने का मौका नहीं देते, बल्कि कई बार उनके बनने की प्रक्रिया को भी प्रभावित करते हैं।

एक खूबसूरत नजारे से कहीं ज्यादा

बादलों का समंदर देखने में जितना जादुई लगता है, उसके पीछे उतना ही दिलचस्प विज्ञान छिपा है। तापमान, नमी, हवा और पहाड़ों की ऊंचाई मिलकर कुछ घंटों के लिए ऐसा दृश्य बना सकते हैं जो किसी पेंटिंग जैसा लगता है।

शायद यही प्रकृति की सबसे दिलचस्प बात है। कभी-कभी बादलों को देखने के लिए आसमान की ओर देखने की जरूरत नहीं होती। सही पहाड़ पर खड़े होकर आप उन्हें अपने पैरों के नीचे भी देख सकते हैं।

Loving Newspoint? Download the app now
Newspoint