एक ही तापमान पर लकड़ी से ज्यादा ठंडी क्यों लगती है धातु? जानिए विज्ञान
सर्दियों की सुबह अगर आप लोहे की रेलिंग और लकड़ी की मेज को छुएं, तो दोनों का अनुभव बिल्कुल अलग होगा। लोहे की सतह तुरंत बर्फ जैसी ठंडी महसूस हो सकती है, जबकि लकड़ी अपेक्षाकृत गर्म लगेगी। पहली नजर में लगता है कि धातु का तापमान कम होगा। लेकिन अगर दोनों वस्तुएं कई घंटों से एक ही कमरे में रखी हैं, तो उनका तापमान लगभग समान हो सकता है। फिर ऐसा क्यों लगता है कि एक ज्यादा ठंडी है? इसका जवाब तापमान में नहीं, बल्कि हमारे शरीर और पदार्थ के बीच होने वाले heat transfer में छिपा है।
धातु ऊष्मा की बहुत अच्छी चालक होती है। जैसे ही आप किसी धातु को छूते हैं, आपके हाथ की गर्मी तेजी से धातु में फैलने लगती है। इससे त्वचा जल्दी ठंडी होती है और दिमाग इसे ज्यादा ठंडक के रूप में महसूस करता है।
लकड़ी ऊष्मा की खराब चालक होती है। इसलिए आपके हाथ की गर्मी लकड़ी के भीतर उतनी तेजी से नहीं जाती। नतीजा यह होता है कि त्वचा अपेक्षाकृत गर्म बनी रहती है और लकड़ी कम ठंडी महसूस होती है।
यही कारण है कि धातु की रेलिंग, कार का दरवाजा या स्टील की बोतल छूने पर सर्दियों में ज्यादा ठंडी लगती है। गर्मियों में इसका उल्टा अनुभव भी हो सकता है। गर्म धातु आपके शरीर तक ऊष्मा तेजी से पहुंचा सकती है।
इसी सिद्धान्त का इस्तेमाल इमारतों में insulation बनाने के लिए भी किया जाता है। दीवारों और छतों में ऐसे पदार्थ लगाए जाते हैं जो गर्मी के प्रवाह को धीमा करें।
अगली बार जब लकड़ी और धातु दोनों को छूकर आपको अलग तापमान महसूस हो, तो याद रखिए, दोनों शायद समान तापमान पर हों। फर्क वस्तु के तापमान में नहीं, बल्कि गर्मी के सफर की गति में है।
तापमान और ठंडक में अंतर
हमारी त्वचा किसी वस्तु का तापमान सीधे नहीं बताती। वह मुख्य रूप से यह महसूस करती है कि उसके संपर्क में आने के बाद शरीर से गर्मी कितनी तेजी से बाहर जा रही है।धातु ऊष्मा की बहुत अच्छी चालक होती है। जैसे ही आप किसी धातु को छूते हैं, आपके हाथ की गर्मी तेजी से धातु में फैलने लगती है। इससे त्वचा जल्दी ठंडी होती है और दिमाग इसे ज्यादा ठंडक के रूप में महसूस करता है।
लकड़ी ऊष्मा की खराब चालक होती है। इसलिए आपके हाथ की गर्मी लकड़ी के भीतर उतनी तेजी से नहीं जाती। नतीजा यह होता है कि त्वचा अपेक्षाकृत गर्म बनी रहती है और लकड़ी कम ठंडी महसूस होती है।
एक आसान घरेलू उदाहरण
मान लीजिए कमरे का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस है। लकड़ी की कुर्सी और धातु की कुर्सी दोनों कई घंटे से उसी कमरे में हैं। दोनों लगभग 20 डिग्री पर हो सकती हैं, फिर भी धातु ज्यादा ठंडी लगेगी।You may also like
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यही कारण है कि धातु की रेलिंग, कार का दरवाजा या स्टील की बोतल छूने पर सर्दियों में ज्यादा ठंडी लगती है। गर्मियों में इसका उल्टा अनुभव भी हो सकता है। गर्म धातु आपके शरीर तक ऊष्मा तेजी से पहुंचा सकती है।
क्या यह सिर्फ धातु के साथ होता है?
नहीं। यह पदार्थ की thermal conductivity पर निर्भर करता है। तांबा और एल्युमिनियम जैसी धातुएं ऊष्मा तेजी से स्थानांतरित करती हैं, जबकि लकड़ी, प्लास्टिक और कई कपड़े ऊष्मा के प्रवाह को धीमा करते हैं।इसी सिद्धान्त का इस्तेमाल इमारतों में insulation बनाने के लिए भी किया जाता है। दीवारों और छतों में ऐसे पदार्थ लगाए जाते हैं जो गर्मी के प्रवाह को धीमा करें।
रोजमर्रा की जिंदगी में इसका महत्व
यह छोटी सी अनुभूति हमें एक बड़ी बात समझाती है: तापमान और गर्म या ठंडा महसूस होना एक ही चीज नहीं हैं। हमारा शरीर केवल संख्या नहीं पढ़ता, बल्कि आसपास की वस्तुओं के साथ ऊर्जा के आदान-प्रदान को महसूस करता है।अगली बार जब लकड़ी और धातु दोनों को छूकर आपको अलग तापमान महसूस हो, तो याद रखिए, दोनों शायद समान तापमान पर हों। फर्क वस्तु के तापमान में नहीं, बल्कि गर्मी के सफर की गति में है।





