GPS कभी-कभी आपको गलत जगह क्यों दिखाता है? Satellite सही होने के बावजूद होती है गलती

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आप Google Maps खोलते हैं और देखते हैं कि नीला dot सड़क पर नहीं, बल्कि किसी पास की गली या इमारत के अंदर दिखाई दे रहा है। कभी-कभी GPS आपको कुछ मीटर दूर दिखाता है, जबकि आप बिल्कुल सही जगह पर खड़े होते हैं। पहली नजर में लगता है कि शायद satellite ने गलत जानकारी भेजी है। लेकिन असल कहानी कुछ और है। GPS satellites लगातार बेहद सटीक signals भेजते हैं, फिर भी आपके फोन की दिखाई गई location में गलती हो सकती है। इसकी वजह satellite की गलती से ज्यादा आपके आसपास का वातावरण, फोन का receiver, इमारतें और signal के रास्ते में होने वाली छोटी-छोटी गड़बड़ियां हैं।
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GPS आपकी लोकेशन पता कैसे करता है?

GPS यानी Global Positioning System कई satellites से आने वाले radio signals का इस्तेमाल करता है। आपका device इन signals के पहुंचने में लगे समय के आधार पर satellite से अपनी दूरी का अनुमान लगाता है।

कम से कम चार satellites से मिले measurements का इस्तेमाल करके receiver अपनी तीन-dimensional position और timing error को निर्धारित कर सकता है। GPS की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, खुले आसमान के नीचे civilian GPS receivers आम तौर पर कुछ मीटर की accuracy हासिल कर सकते हैं। (gps.gov)


इसलिए satellite गलत होने की जरूरत नहीं है। छोटी-सी measurement error भी आपकी स्क्रीन पर location को कुछ मीटर इधर-उधर कर सकती है।

इमारतें GPS signal को बिगाड़ सकती हैं

शहरों में GPS की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक buildings हैं। ऊंची इमारतों के बीच satellite signal सीधे फोन तक पहुंचने के बजाय दीवारों या कांच जैसी सतहों से टकराकर दूसरी दिशा से receiver तक पहुंच सकता है।


इसे multipath error कहा जाता है। यानी फोन को ऐसा signal मिलता है जो satellite से सीधे नहीं आया, बल्कि रास्ते में reflect हुआ है। GPS.gov के अनुसार, buildings और दूसरे बड़े structures से signals के reflection से positioning accuracy प्रभावित हो सकती है। (gps.gov)

इसी वजह से किसी shopping complex, underground parking या घनी इमारतों वाले इलाके में आपका blue location dot ज्यादा भटक सकता है।

पेड़, मौसम और आसपास का वातावरण भी मायने रखता है

घने पेड़ों की छतरी और प्राकृतिक बाधाएं भी GPS signal को कमजोर या प्रभावित कर सकती हैं। सामान्य मौसम GPS को खत्म नहीं करता, लेकिन atmospheric conditions signal के travel time में छोटे बदलाव ला सकती हैं।

GPS signals ionosphere और troposphere से होकर गुजरते हैं। इन परतों की स्थिति बदलने से signal propagation में छोटी errors पैदा हो सकती हैं। Modern GPS systems इन प्रभावों को कम करने के लिए correction models और अतिरिक्त information का इस्तेमाल करते हैं। (gps.gov)

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यानी आसमान साफ होने का मतलब यह नहीं कि GPS हमेशा centimetre-level accuracy देगा।

फोन सिर्फ GPS पर निर्भर नहीं रहता

एक और दिलचस्प बात यह है कि smartphone की location सिर्फ GPS satellites से नहीं बनती। आधुनिक devices location को बेहतर करने के लिए Wi-Fi networks, cellular towers, Bluetooth और दूसरे sensors की जानकारी भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

Android के Location services जैसे systems कई sources को combine करके location estimate को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं। (developer.android.com)

यही कारण है कि कभी-कभी आपका फोन GPS signal कमजोर होने के बावजूद आपकी approximate location बता देता है।

GPS और Google Maps एक ही चीज नहीं हैं

यह अंतर भी समझना जरूरी है। GPS एक satellite-based positioning system है, जबकि Google Maps एक mapping and navigation service है। Maps में दिखाई देने वाली आपकी location कई technologies और data sources के combination पर निर्भर हो सकती है।


इसीलिए अगर blue dot कुछ metres दूर दिखाई देता है, तो जरूरी नहीं कि GPS satellite ने गलती की हो। कई बार समस्या signal के रास्ते, receiver या आसपास के environment में होती है।

GPS की गलती आज क्यों मायने रखती है?

आज हम GPS का इस्तेमाल सिर्फ रास्ता खोजने के लिए नहीं करते। Food delivery, ride-hailing, emergency services, logistics, aviation, agriculture और financial location-based services तक में satellite positioning महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

खासकर urban areas में कुछ metres की गलती सामान्य navigation के लिए मामूली लग सकती है, लेकिन autonomous systems, surveying या precision applications में वही अंतर महत्वपूर्ण बन सकता है।

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