Mental Health को बिगाड़ रहा है Social Media, जानिए इससे बचने के तरीके
सोशल मीडिया की लत कैसे बनती है?
जब हम बार-बार फोन चेक करते हैं, नये नोटिफिकेशन का इंतज़ार करते हैं, या अपने पोस्ट पर लाइक और कमेंट्स के बारे में सोचते हैं, तो यह आदत धीरे-धीरे लत का रूप ले लेती है। यह मस्तिष्क में डोपामिन रिलीज करता है, जिससे हम इसे बार-बार करने के लिए प्रेरित होते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
- तनाव और चिंता: सोशल मीडिया पर दूसरों की ज़िंदगी को देखकर तुलना करने की आदत बढ़ती है, जिससे आत्मसम्मान पर असर पड़ता है।
- डिप्रेशन: निरंतर डिजिटल जुड़ाव, नकारात्मक टिप्पणियों और ऑनलाइन ट्रोलिंग से डिप्रेशन की संभावना बढ़ जाती है।
- एकाकीपन: अधिकतर लोग ऑनलाइन तो जुड़े होते हैं, लेकिन असल जीवन में अकेलापन महसूस करते हैं।
- नींद में बाधा: रात को देर तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
इससे कैसे बचें?
- स्क्रीन टाइम ट्रैक करें: फोन की सेटिंग्स में जाकर प्रतिदिन का स्क्रीन टाइम देखें और उसे सीमित करें।
- सोशल मीडिया डिटॉक्स: हफ्ते में कम से कम एक दिन सभी सोशल मीडिया ऐप्स से दूरी बनाएं।
- नोटिफिकेशन बंद करें: हर बार फोन वाइब्रेट करने से ध्यान भटकता है, इसलिए नोटिफिकेशन को ऑफ कर दें।
- ऑफलाइन एक्टिविटीज अपनाएं: दोस्तों से मिलना, खेलना या घूमना बेहतर विकल्प हैं।
- सोने से पहले 1 घंटा डिजिटल फ्री रखें: इससे नींद की गुणवत्ता बढ़ती है और मस्तिष्क को विश्राम मिलता है।
युवा वर्ग पर प्रभाव
विशेष रूप से किशोर और युवा सोशल मीडिया की लत के शिकार हो रहे हैं। यह उनके आत्मविश्वास, पढ़ाई, रिश्तों और जीवन के लक्ष्यों पर नकारात्मक असर डालता है। माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका अहम है कि वे बच्चों को डिजिटल संतुलन की सीख दें।
सोशल मीडिया एक सशक्त माध्यम है, लेकिन इसका संतुलित उपयोग ही लाभकारी है। लत बन जाने पर यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। जरूरत है सचेत रहने की, और समय-समय पर डिजिटल डिटॉक्स को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की। यह न सिर्फ हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, बल्कि हमारे संबंधों और जीवन की गुणवत्ता के लिए भी अनिवार्य है।