तूफानों के बीच भी उड़ते हैं ये पक्षी, जानिए कैसे बचा लेते हैं अपनी जान
हरिकेन या चक्रवात का नाम सुनते ही तेज़ हवाएँ, मूसलाधार बारिश और भारी तबाही की तस्वीर सामने आ जाती है। ऐसे मौसम में इंसान ही नहीं, ज्यादातर जानवर भी सुरक्षित जगह तलाशने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ पक्षी ऐसे भी हैं जो हरिकेन जैसी भीषण परिस्थितियों में उड़ान भरने की क्षमता रखते हैं? यह सुनने में अविश्वसनीय लग सकता है, लेकिन कई समुद्री पक्षियों ने लाखों वर्षों के विकास के दौरान ऐसी अनोखी उड़ान तकनीक विकसित की है जो उन्हें तेज़ हवाओं और उफनते समुद्र के बीच भी जीवित रहने में मदद करती है। यही कारण है कि वैज्ञानिक लंबे समय से इन पक्षियों का अध्ययन कर रहे हैं।
इन पक्षियों का शरीर, पंखों की बनावट और उड़ने का तरीका उन्हें सामान्य पक्षियों से अलग बनाता है। वे हवा की दिशा और गति का इस्तेमाल अपने लाभ के लिए करते हैं, जिससे ऊर्जा की खपत भी कम होती है।
इस दौरान पक्षी अलग-अलग ऊँचाई पर बहने वाली हवाओं का उपयोग करते हुए बिना अधिक पंख फड़फड़ाए लंबी दूरी तय कर लेते हैं। इससे वे तेज़ तूफानों के दौरान भी अपनी ऊर्जा बचाए रखते हैं।
इसी वजह से कई पक्षी तूफान के रास्ते से दूर चले जाते हैं, जबकि कुछ समुद्री प्रजातियाँ हवा के प्रवाह का उपयोग करते हुए तूफान के किनारों पर उड़ती रहती हैं।
वैज्ञानिकों ने यह भी देखा है कि फ्रिगेटबर्ड कई दिनों तक समुद्र के ऊपर बिना जमीन पर उतरे उड़ सकता है। उसकी लंबी और पतली पंख संरचना उसे तेज़ हवाओं में भी संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
साथ ही, जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री तूफानों की तीव्रता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में यह समझना भी जरूरी है कि बदलते मौसम का इन पक्षियों के जीवन और प्रवास पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
क्या पक्षी सचमुच हरिकेन के बीच उड़ते हैं?
हर पक्षी ऐसा नहीं कर सकता। अधिकांश पक्षी हरिकेन आने से पहले ही सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाते हैं। लेकिन कुछ समुद्री पक्षी, जैसे फ्रिगेटबर्ड, पेट्रेल और शियरवॉटर, तेज़ हवाओं के बीच भी उड़ान जारी रखने की क्षमता रखते हैं।इन पक्षियों का शरीर, पंखों की बनावट और उड़ने का तरीका उन्हें सामान्य पक्षियों से अलग बनाता है। वे हवा की दिशा और गति का इस्तेमाल अपने लाभ के लिए करते हैं, जिससे ऊर्जा की खपत भी कम होती है।
हवा को दुश्मन नहीं, साथी बनाते हैं ये पक्षी
समुद्री पक्षी हवा से लड़ने की कोशिश नहीं करते। इसके बजाय वे तेज़ हवाओं के साथ तालमेल बिठाकर उड़ते हैं। वैज्ञानिक इस तकनीक को डायनेमिक सोअरिंग कहते हैं।इस दौरान पक्षी अलग-अलग ऊँचाई पर बहने वाली हवाओं का उपयोग करते हुए बिना अधिक पंख फड़फड़ाए लंबी दूरी तय कर लेते हैं। इससे वे तेज़ तूफानों के दौरान भी अपनी ऊर्जा बचाए रखते हैं।
You may also like
- बेटी ने पिता को दिया अनमोल तोहफा: 50वें जन्मदिन पर बाइक का सरप्राइज
- 'अच्छी खासी शक्ल का जुलूस निकाल दिया..', अनन्या पांडे का ब्राइडल लुक निशाने पर, फैंस बोले बेस्ट, लोग कह रहे बकवास
- वजन बढ़ने से घुटनों पर पड़ने वाला प्रभाव और स्वास्थ्य सुझाव
- सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल: स्वास्थ्य पर प्रभाव और डॉक्टरों की सलाह
- चलती ट्रेन में मोबाइल चोरी की कोशिश: यात्रियों ने चोर को खिड़की से लटकाया
हरिकेन आने से पहले मिल जाते हैं संकेत
दिलचस्प बात यह है कि कई पक्षी हरिकेन के आने से पहले ही उसके संकेत महसूस कर लेते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि वे वायुदाब में होने वाले बदलाव और हवा की दिशा में परिवर्तन को इंसानों से काफी पहले पहचान लेते हैं।इसी वजह से कई पक्षी तूफान के रास्ते से दूर चले जाते हैं, जबकि कुछ समुद्री प्रजातियाँ हवा के प्रवाह का उपयोग करते हुए तूफान के किनारों पर उड़ती रहती हैं।
कम लोगों को पता हैं ये रोचक तथ्य
सैटेलाइट ट्रैकिंग से पता चला है कि कुछ शियरवॉटर पक्षी हरिकेन के आसपास कई सौ किलोमीटर तक उड़ सकते हैं और तूफान की दिशा के अनुसार अपना मार्ग बदल लेते हैं। यह उनकी असाधारण नेविगेशन क्षमता का उदाहरण है।वैज्ञानिकों ने यह भी देखा है कि फ्रिगेटबर्ड कई दिनों तक समुद्र के ऊपर बिना जमीन पर उतरे उड़ सकता है। उसकी लंबी और पतली पंख संरचना उसे तेज़ हवाओं में भी संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
आज के समय में इन पक्षियों का महत्व
इन पक्षियों का अध्ययन केवल वन्यजीव विज्ञान तक सीमित नहीं है। एयरोस्पेस इंजीनियर और ड्रोन डिज़ाइन करने वाले वैज्ञानिक भी इनके उड़ने के तरीकों से प्रेरणा ले रहे हैं। भविष्य में अधिक ईंधन-कुशल विमान और बेहतर स्वचालित ड्रोन विकसित करने में यह जानकारी उपयोगी साबित हो सकती है।साथ ही, जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री तूफानों की तीव्रता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में यह समझना भी जरूरी है कि बदलते मौसम का इन पक्षियों के जीवन और प्रवास पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।





