क्या आइने में आत्मा कैद हो सकती है? जानिए क्यों लोग शीशों से डरते थे

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आजकल हम दिन में दस बार आइना देखते हैं, कभी बाल संवारने के लिए तो कभी सेल्फी लेने के लिए। लेकिन एक वक्त ऐसा था जब लोग आइने के सामने खड़े होने से कतराते थे। उन्हें लगता था कि जो अक्स उन्हें दिखाई दे रहा है, वह सिर्फ एक प्रतिबिंब नहीं बल्कि उनकी रूह का एक हिस्सा है। यह अंधविश्वास इतना गहरा था कि इसने दुनिया भर की संस्कृतियों में अपनी जगह बना ली।
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आत्मा के कैद होने का डर

प्राचीन काल में शीशे आज की तरह साफ और सस्ते नहीं थे। वे पीतल या चांदी जैसी धातुओं को घिसकर बनाए जाते थे। लोगों का मानना था कि पानी की सतह या चमकदार धातु में दिखने वाला अक्स हमारी आत्मा को खींच सकता है। रोमन लोगों का मानना था कि एक इंसान की किस्मत हर सात साल में बदलती है, इसलिए अगर आइना टूट गया तो उसमें कैद आत्मा भी जख्मी हो जाएगी और सात साल तक दुर्भाग्य बना रहेगा।

घर के जानवरों और शीशों का संबंध

पुराने घरों में जब किसी की मौत होती थी, तो सबसे पहले घर के सभी आइनों को कपड़े से ढंक दिया जाता था। लोगों को डर था कि मरने वाले की आत्मा कहीं शीशे में न फंस जाए और भटकती रहे। यहाँ तक कि घर के पालतू कुत्ते और बिल्ली को भी उन कमरों से दूर रखा जाता था जहाँ आइने खुले हों। उन्हें लगता था कि जानवर इन अदृश्य ऊर्जाओं को महसूस कर सकते हैं और अगर उन्होंने शीशे में कुछ देख लिया, तो वे डर से पागल हो सकते हैं।


लोक कथाओं में आईने का खौफ

दुनिया भर की डरावनी कहानियों में आइने का इस्तेमाल होता है। चाहे वह 'ब्लडी मैरी' की कहानी हो या जादुई आईने, यह विचार हमेशा से रहा है कि शीशा एक खिड़की है जो दूसरी दुनिया की तरफ खुलती है। लोग मानते थे कि सोते समय अपने बिस्तर के सामने शीशा नहीं रखना चाहिए क्योंकि जब हम सोते हैं, तो हमारी आत्मा शरीर से बाहर निकलती है और वह शीशे के मायाजाल में फंस सकती है।

आज विज्ञान ने हमें बता दिया है कि आइना सिर्फ लाइट को रिफ्लेक्ट करता है, लेकिन फिर भी जब रात के अंधेरे में हम अचानक शीशे के सामने आते हैं, तो एक हल्की सी सिहरन महसूस होती ही है। यह हमारी पुरानी विरासत का ही हिस्सा है।

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