आज की पसंदीदा सब्जी, कभी थी डर का कारण, टमाटर का अनोखा इतिहास

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आज हम टमाटर के बिना अपनी रसोई की कल्पना भी नहीं कर सकते। लेकिन यूरोप में लगभग 200 सालों तक टमाटर को 'जहरीला सेब' कहा जाता था। लोग इसे देखकर ही डर जाते थे और इसे खाने की हिम्मत कोई नहीं करता था। यह सुनकर अजीब लगता है, लेकिन उस समय के लोगों के पास इस डर की एक बहुत ही ठोस वजह थी।
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चांदी के बर्तन और मौत का खेल

1700 के दशक में अमीर लोग पीनट या लेड (सीसा) मिली हुई चांदी की प्लेटों में खाना खाते थे। टमाटर स्वभाव से थोड़ा एसिडिक (अम्लीय) होता है। जब टमाटर को उन प्लेटों पर रखा जाता था, तो वह प्लेट के सीसे के साथ रियेक्ट करता था और जहर छोड़ देता था। जो लोग टमाटर खाते थे, वे सीसे के जहर की वजह से बीमार पड़ जाते या मर जाते थे। बेचारे टमाटर को बलि का बकरा बनाया गया, जबकि असली कातिल तो वे प्लेटें थीं।

प्रकृति और गलत पहचान

एक और वजह यह थी कि टमाटर 'नाइटशेड' परिवार का पौधा है, जिसमें सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीवों के आसपास पाए जाने वाले कुछ बेहद घातक पौधे भी आते हैं। इसकी पत्तियां और तना सच में जहरीले हो सकते हैं। लोगों ने देखा कि इसके फल चमकदार लाल हैं, जो अक्सर कुदरत में खतरे का निशान होते हैं। उन्हें लगा कि यह फल भी जानलेवा है।


पिज्जा ने बदली किस्मत

टमाटर की किस्मत तब बदली जब इटली के गरीब लोगों ने इसे खाना शुरू किया। उनके पास चांदी की प्लेटें नहीं थीं, वे लकड़ी या मिट्टी के बर्तनों में खाते थे, इसलिए उन्हें कुछ नहीं हुआ। जब नेपल्स में पिज्जा का आविष्कार हुआ और उसमें टमाटर का इस्तेमाल बढ़ा, तो धीरे-धीरे पूरी दुनिया को समझ आया कि यह फल जहरीला नहीं बल्कि स्वादिष्ट है।

टमाटर की कहानी हमें सिखाती है कि कई बार हम गलत चीजों को दोष देते हैं क्योंकि हम गहराई तक नहीं देख पाते। आज वही 'जहरीला सेब' हमारी सेहत के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

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