हरियाली तीज और हरे रंग का महत्व: सावन में क्यों पहना जाता है हरा रंग?

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भारत में ऋतुओं के साथ जुड़ी परंपराएँ और त्यौहार संस्कृति की गहराई को दर्शाते हैं। ऐसा ही एक सुंदर पर्व है हरियाली तीज, जो सावन मास में मनाया जाता है। यह पर्व महिलाओं के लिए विशेष रूप से अहम होता है और इस दिन हरे रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा अत्यंत लोकप्रिय है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सावन में हरा रंग ही क्यों प्रमुख है? इसका उत्तर केवल फैशन या परंपरा तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति, अध्यात्म और समाज से जुड़ा हुआ है।


हरियाली तीज: प्रेम और पुनर्मिलन का पावन पर्व

हरियाली तीज को भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह त्यौहार विवाहित और कुंवारी दोनों ही स्त्रियों के लिए अत्यंत श्रद्धा और उत्साह का दिन होता है। महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं, झूले झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और सुंदरता से सज-धज कर हरा रंग पहनती हैं।

सावन और हरियाली: प्रकृति का उत्सव

सावन के महीने में जब बारिश से धरती हरी-भरी हो जाती है, पेड़-पौधों में नया जीवन आता है, तब वातावरण में हरेपन की बहार आ जाती है। ऐसे में हरा रंग सिर्फ एक वस्त्र का रंग नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ाव और उर्वरता का प्रतीक बन जाता है। हरियाली तीज इसी प्राकृतिक सौंदर्य और नारी शक्ति के उत्थान का पर्व है।


हरे रंग का धार्मिक महत्व

  1. भगवान विष्णु और शिव से जुड़ाव: हरा रंग भगवान विष्णु की कृपा और शिव की शांति का प्रतीक माना जाता है।

  2. मंगलकामना का प्रतीक: हरा रंग आशा, जीवन और पुनर्जन्म का संकेत है।


  • विवाहित स्त्रियों के लिए सौभाग्य का रंग: यह रंग उनके वैवाहिक जीवन में स्थायित्व और समृद्धि की कामना दर्शाता है।

  • हरा रंग और नारी शक्ति

    हरियाली तीज पर महिलाएं मेंहदी, चूड़ियाँ, साड़ियों और लहरियाओं में हरे रंग का प्रयोग करती हैं, जो उनकी प्रसन्नता, उत्साह और ऊर्जा को दर्शाता है। यह रंग उनके अंदर की सृजनात्मक शक्ति और मातृत्व के भाव का प्रतीक बनता है।

    सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू

    • समूहिकता का प्रतीक: महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा, गीत और नृत्य करती हैं – यह सामाजिक एकता को प्रोत्साहन देता है।

    • रंगों से जुड़ी भावनाएँ: हरा रंग आंखों को सुकून देने वाला और मन को शांत करने वाला माना जाता है।


  • पारंपरिक विरासत का उत्सव: हरे रंग की पोशाकें, मेंहदी, गीत और साज-सज्जा लोकसंस्कृति के जीवंत स्वरूप को बनाए रखते हैं।

  • हरा रंग: आयुर्वेद और मानसिक संतुलन

    आयुर्वेद के अनुसार हरा रंग शरीर में वात और पित्त को संतुलित करता है। यह रंग मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है और प्राकृतिक ऊर्जा का संचार करता है। इसलिए, सावन की ठंडी हवा और हरियाली के बीच यह रंग शरीर और मन को संतुलन प्रदान करता है।

    विवाह और प्रेम में हरे रंग की भूमिका

    हरियाली तीज पर हरा रंग पहनना वैवाहिक प्रेम, पति की लंबी उम्र, और दांपत्य सुख की कामना से जुड़ा होता है। कुंवारी कन्याएं भी यह रंग पहनकर मनचाहा वर पाने की प्रार्थना करती हैं। यह रंग उनके समर्पण और भविष्य की आशाओं का द्योतक होता है।

    आधुनिक युग में परंपरा का महत्व

    भले ही समय बदला हो, लेकिन हरियाली तीज पर हरे रंग की परंपरा आज भी जस की तस बनी हुई है। आज की महिलाएं इस त्यौहार को पारंपरिक साज-सज्जा के साथ आधुनिक परिधानों में मनाती हैं, लेकिन रंगों का सम्मान वैसा ही है जैसा सदियों पहले था।