Range Rover से लेकर Rolls-Royce तक, भारत में 3 करोड़ रुपये तक सस्ती हुईं ब्रिटेन की कारें
भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) 15 जुलाई 2026 को पूरी तरह से लागू हो गया है। यह ऐतिहासिक समझौता कपड़ा, जूते-चप्पल, कपड़े और प्रोसेस्ड फूड जैसे कई सेक्टर्स के लिए तो फायदेमंद साबित होगा ही, साथ ही यह भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में बाहर से आने वाली लग्जरी कारों की पूरी तस्वीर को बदल कर रख देगा।
भारत और ब्रिटेन के बीच 25 जुलाई 2025 को इस व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) पर दस्तखत किए गए थे। इस डील की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि इसके तहत ब्रिटेन में बनने वाले वाहनों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी में धीरे-धीरे बड़ी कटौती की जाएगी। इस समझौते की वजह से ब्रिटेन में बनी लग्जरी कारों की कीमतें भारत में 3 करोड़ रुपये तक कम हो गई हैं। आइए जानते हैं कि इस समझौते का ऑटो सेक्टर पर क्या असर पड़ा है और कौन से ब्रांड्स सस्ते हुए हैं।
इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा जगुआर लैंड रोवर, रोल्स-रॉयस, बेंटले, एस्टन मार्टिन और मैकलारेन जैसे मशहूर कार ब्रांड्स को मिल रहा है। आपको बता दें कि जगुआर लैंड रोवर ने 2026 की शुरुआत में ही ब्रिटेन में बने अपने कुछ पॉपुलर मॉडल्स, जैसे कि रेंज रोवर एसवी (Range Rover SV) और range rover स्पोर्ट एसवी पर 75 लाख रुपये तक की कटौती की घोषणा कर दी थी। हालांकि मैकलारेन ने अभी तक आधिकारिक तौर पर कीमतों को कम करने का एलान नहीं किया है, लेकिन उम्मीद है कि उनकी कारों की कीमतों में 3 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की कमी आएगी। इसके अलावा रोल्स-रॉयस, एस्टन मार्टिन और बेंटले की तरफ से भी कीमतों में कटौती की आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
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कारों पर लगने वाले टैक्स या इंपोर्ट ड्यूटी को एक तय कोटे (Quota) के तहत और इंजन की क्षमता व फ्यूल के प्रकार के आधार पर अलग-अलग चरणों में कम किया जा रहा है:
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जहां एक तरफ पेट्रोल और डीजल गाड़ियों पर टैक्स कटौती का फायदा तुरंत मिलना शुरू हो गया है, वहीं बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs), हाइब्रिड गाड़ियों और हाइड्रोजन से चलने वाली गाड़ियों के शौकीनों को इस फायदे के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। इन गाड़ियों को इस समझौते के छठे साल से फायदा मिलना शुरू होगा। इस समझौते के तहत शुरुआती 5 सालों के लिए ईवी, हाइब्रिड और हाइड्रोजन वाहनों को इस छूट के दायरे से बाहर रखा गया है। हालांकि, 40,000 ब्रिटिश पाउंड (लगभग 51.49 लाख रुपये) से अधिक कीमत वाले कुछ चुनिंदा वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों (Alternative Fuel Vehicles) को कोटे के आधार पर टैक्स में थोड़ी राहत मिल सकेगी।
भारत और ब्रिटेन के बीच 25 जुलाई 2025 को इस व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) पर दस्तखत किए गए थे। इस डील की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि इसके तहत ब्रिटेन में बनने वाले वाहनों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी में धीरे-धीरे बड़ी कटौती की जाएगी। इस समझौते की वजह से ब्रिटेन में बनी लग्जरी कारों की कीमतें भारत में 3 करोड़ रुपये तक कम हो गई हैं। आइए जानते हैं कि इस समझौते का ऑटो सेक्टर पर क्या असर पड़ा है और कौन से ब्रांड्स सस्ते हुए हैं।
कौन से कार ब्रांड्स हुए सस्ते?
इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा जगुआर लैंड रोवर, रोल्स-रॉयस, बेंटले, एस्टन मार्टिन और मैकलारेन जैसे मशहूर कार ब्रांड्स को मिल रहा है। आपको बता दें कि जगुआर लैंड रोवर ने 2026 की शुरुआत में ही ब्रिटेन में बने अपने कुछ पॉपुलर मॉडल्स, जैसे कि रेंज रोवर एसवी (Range Rover SV) और range rover स्पोर्ट एसवी पर 75 लाख रुपये तक की कटौती की घोषणा कर दी थी। हालांकि मैकलारेन ने अभी तक आधिकारिक तौर पर कीमतों को कम करने का एलान नहीं किया है, लेकिन उम्मीद है कि उनकी कारों की कीमतों में 3 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की कमी आएगी। इसके अलावा रोल्स-रॉयस, एस्टन मार्टिन और बेंटले की तरफ से भी कीमतों में कटौती की आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
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कैसे कम हुई इंपोर्ट ड्यूटी?
कारों पर लगने वाले टैक्स या इंपोर्ट ड्यूटी को एक तय कोटे (Quota) के तहत और इंजन की क्षमता व फ्यूल के प्रकार के आधार पर अलग-अलग चरणों में कम किया जा रहा है:
- पहले साल में, 3,000cc से बड़े इंजन वाली पेट्रोल कारों और 2,500cc से बड़े इंजन वाली diesel कारों पर लगने वाली ड्यूटी मौजूदा 110 प्रतिशत से घटकर 80 प्रतिशत रह गई है।
- इन दोनों कैटेगरी की कारों के लिए हर साल अधिकतम 10,000 यूनिट्स का कोटा तय किया गया है।
- इससे पहले तक, 1,500cc से 3,000cc के बीच की पेट्रोल कारों और 2,500cc तक की डीजल कारों पर 66 प्रतिशत तक ड्यूटी लगती थी। इस समझौते के बाद यह घटकर 50 प्रतिशत रह गई है, जिसके लिए सालाना 5,000 यूनिट्स का कोटा होगा।
- इसके साथ ही, 1,500cc तक के इंजन वाली पेट्रोल कारों पर भी टैक्स घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है और इसके लिए भी सालाना 5,000 यूनिट्स का कोटा तय है।
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इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों को करना होगा इंतजार
जहां एक तरफ पेट्रोल और डीजल गाड़ियों पर टैक्स कटौती का फायदा तुरंत मिलना शुरू हो गया है, वहीं बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs), हाइब्रिड गाड़ियों और हाइड्रोजन से चलने वाली गाड़ियों के शौकीनों को इस फायदे के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। इन गाड़ियों को इस समझौते के छठे साल से फायदा मिलना शुरू होगा। इस समझौते के तहत शुरुआती 5 सालों के लिए ईवी, हाइब्रिड और हाइड्रोजन वाहनों को इस छूट के दायरे से बाहर रखा गया है। हालांकि, 40,000 ब्रिटिश पाउंड (लगभग 51.49 लाख रुपये) से अधिक कीमत वाले कुछ चुनिंदा वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों (Alternative Fuel Vehicles) को कोटे के आधार पर टैक्स में थोड़ी राहत मिल सकेगी।





