FASTag Wrong Deduction Rules: फास्टैग से कट गए ज्यादा पैसे? अब टोल कंपनी को हर हाल में देना होगा पूरा रिफंड
अगर आप भी गाड़ी चलाते हैं और फास्टैग का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके बहुत काम की है। हमारे देश में हाईवे टोल प्लाजा पर फास्टैग से ज्यादा पैसे कट जाना, घर बैठे-बैठे टोल कटने का मैसेज आ जाना या छोटी गाड़ी होने पर भी बड़ी गाड़ी का चार्ज लग जाना कोई नई बात नहीं है। सरकारी आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं। सरकार ने खुद राज्य सभा में बताया था कि साल 2024 में हुए कुल 4.1 अरब फास्टैग ट्रांजैक्शन में से 12.55 लाख ट्रांजैक्शन में गलत तरीके से पैसे कटे थे।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी जनवरी 2026 में लोक सभा में एक लिखित जवाब में बताया कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच गलत टोल कटौती की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए 17.66 लाख फास्टैग ट्रांजैक्शन का पैसा लोगों को रिफंड किया है।
अक्सर देखा जाता है कि लोग थोड़े से पैसों के चक्कर में ज्यादा कटे हुए टोल की शिकायत दर्ज नहीं कराते, जिससे इन टोल कंपनियों को बड़ा फायदा होता है। लेकिन अब आम जनता के पक्ष में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला आया है। यह फैसला पूरे देश के लिए एक मिसाल बनने वाला है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अब अगर किसी टोल कंपनी ने फास्टैग के जरिए ज्यादा पैसे काटे, तो उसे हर हाल में 100% रिफंड करना ही होगा। इस मामले में एक कंपनी से 11 करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम की रिकवरी भी की गई है।
यह पूरा मामला भोपाल देवास फोरलेन सड़क से जुड़ा है, जहाँ एक टोल कंपनी फास्टैग के जरिए तीन एक्सल वाली बसों से तय सीमा से कहीं ज्यादा टोल वसूल रही थी। इस तरह कंपनी ने गलत तरीके से 11 करोड़ रुपये से ज्यादा कमा लिए। जब मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) ने इस पर रोक लगाने का नियम बनाया, तो कंपनी नाराज होकर हाई कोर्ट पहुंच गई। लेकिन एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रुशिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने कंपनी को तगड़ा झटका देते हुए उसकी याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।
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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी जनवरी 2026 में लोक सभा में एक लिखित जवाब में बताया कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच गलत टोल कटौती की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए 17.66 लाख फास्टैग ट्रांजैक्शन का पैसा लोगों को रिफंड किया है।
अक्सर देखा जाता है कि लोग थोड़े से पैसों के चक्कर में ज्यादा कटे हुए टोल की शिकायत दर्ज नहीं कराते, जिससे इन टोल कंपनियों को बड़ा फायदा होता है। लेकिन अब आम जनता के पक्ष में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला आया है। यह फैसला पूरे देश के लिए एक मिसाल बनने वाला है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अब अगर किसी टोल कंपनी ने फास्टैग के जरिए ज्यादा पैसे काटे, तो उसे हर हाल में 100% रिफंड करना ही होगा। इस मामले में एक कंपनी से 11 करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम की रिकवरी भी की गई है।
यह पूरा मामला भोपाल देवास फोरलेन सड़क से जुड़ा है, जहाँ एक टोल कंपनी फास्टैग के जरिए तीन एक्सल वाली बसों से तय सीमा से कहीं ज्यादा टोल वसूल रही थी। इस तरह कंपनी ने गलत तरीके से 11 करोड़ रुपये से ज्यादा कमा लिए। जब मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) ने इस पर रोक लगाने का नियम बनाया, तो कंपनी नाराज होकर हाई कोर्ट पहुंच गई। लेकिन एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रुशिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने कंपनी को तगड़ा झटका देते हुए उसकी याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट के इस फैसले के क्या फायदे होंगे?
- यह फैसला देश भर में एक मिसाल बनेगा और ज्यादा टोल टैक्स वसूलने वाली कंपनियों पर लगाम कसेगा।
- अगर किसी आम इंसान से ज्यादा पैसे वसूले जाते हैं, तो वह इस अदालती फैसले का हवाला देकर कानूनी लड़ाई में अपना पक्ष बेहद मजबूत कर सकता है।
- यूं तो ज्यादा पैसे कटने पर रिफंड का नियम पहले से है, लेकिन कंपनियों के पास शिकायतें हफ्तों पेंडिंग रहती हैं। इस फैसले के बाद कंपनियां डरेंगी क्योंकि कोर्ट जाने पर रिफंड के साथ-साथ उन पर भारी जुर्माना भी लग सकता है।
फास्टैग से ज्यादा पैसे कटने की मुख्य वजहें
- डबल स्कैनिंग: कई बार टोल बूथ पर लगा स्कैनर एक ही समय में दो बार फास्टैग को रीड कर लेता है, जिससे डबल पैसे कट जाते हैं।
- गलत गाड़ी की कैटेगरी: गलती से छोटी गाड़ी को बड़ी गाड़ी की कैटेगरी में डाल दिया जाता है, जिससे ज्यादा टोल कट जाता है।
- रिटर्न डिस्काउंट न मिलना: सिस्टम में खराबी के कारण कई बार 24 घंटे के भीतर वापस आने पर मिलने वाली छूट नहीं मिल पाती और पूरा पैसा कट जाता है।
- सॉफ्टवेयर में खराबी: टोल प्लाजा के सिस्टम में धीमे इंटरनेट या तकनीकी गड़बड़ी की वजह से भी गलत कटौती हो जाती है।





