Nominee Update: नॉमिनी अपडेट न करने पर अटक सकता है आपका पैसा, जानें नियम और जरूरी डॉक्युमेंट्स
आजकल हर कोई अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करने के लिए कहीं न कहीं निवेश करता है। अगर आपने बैंक अकाउंट, एफडी, आरडी, पीपीएफ, एनपीएस या इंश्योरेंस पॉलिसी में पैसे लगाए हैं, तो सिर्फ पैसे जमा करना ही काफी नहीं है। इसके साथ ही सही और अपडेटेड नॉमिनी की जानकारी दर्ज होना भी उतना ही जरूरी है। बहुत से लोग पैसे लगाते वक्त नॉमिनी तो चुन लेते हैं, लेकिन शादी, तलाक, बच्चे के जन्म या परिवार में किसी की मौत जैसी बड़ी घटनाओं के बाद उसे अपडेट करना भूल जाते हैं।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि समय-समय पर अपनी नॉमिनी डिटेल्स को चेक करते रहना चाहिए। अगर आपके नॉमिनी की मौत हो चुकी है, उनकी जानकारी बदल गई है या फिर आप किसी और को यह हक देना चाहते हैं, तो पुरानी जानकारी बनाए रखना आगे चलकर आपके परिवार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। ऐसे में आपके न रहने पर पैसे मिलने में काफी देर हो सकती है और कानूनी उलझनें भी बढ़ सकती हैं।
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एक्सपर्ट्स मानते हैं कि समय-समय पर अपनी नॉमिनी डिटेल्स को चेक करते रहना चाहिए। अगर आपके नॉमिनी की मौत हो चुकी है, उनकी जानकारी बदल गई है या फिर आप किसी और को यह हक देना चाहते हैं, तो पुरानी जानकारी बनाए रखना आगे चलकर आपके परिवार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। ऐसे में आपके न रहने पर पैसे मिलने में काफी देर हो सकती है और कानूनी उलझनें भी बढ़ सकती हैं।
नॉमिनी क्या होता है?
नॉमिनी वह इंसान होता है जिसे आप अपने बैंक खाते, इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार या पीपीएफ जैसे इन्वेस्टमेंट के लिए चुनते हैं। इसका फायदा यह होता है कि अगर निवेशक को कुछ हो जाता है, तो बैंक या कंपनी उस पैसे को तुरंत उस खास इंसान को सौंप देती है। यहाँ यह समझना बहुत जरूरी है कि ज्यादातर मामलों में नॉमिनी उस पैसे का असली कानूनी मालिक नहीं होता, बल्कि सिर्फ पैसा पाने का हकदार होता है। असली मालिकाना हक वसीयत या कानून के हिसाब से ही तय होता है।नॉमिनी अपडेट करना क्यों जरूरी है?
नॉमिनी अपडेट करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपके जाने के बाद आपकी मेहनत की कमाई बिना किसी झगड़े या देरी के आपके परिवार तक पहुंच जाए। पुरानी या गलत जानकारी होने पर क्लेम की प्रक्रिया बहुत लंबी खिंच जाती है। ऐसे मामलों में बैंक और वित्तीय संस्थान बहुत सारे कागजात मांगते हैं, जिससे परिवार को पैसों की तंगी के साथ-साथ दिमागी परेशानी भी झेलनी पड़ती है।अगर नॉमिनी की मौत हो जाए तो क्या होगा?
अगर आपके चुने हुए नॉमिनी की मौत हो जाती है, तो वह नॉमिनेशन अपने आप खत्म हो जाता है। ऐसी हालत में अगर आप नया नॉमिनी नहीं चुनते और आपकी भी मौत हो जाती है, तो जमा पैसा किसी को सीधे नहीं दिया जा सकता। इसके बाद कानूनी वारिसों को लंबी कागजी कार्रवाई करनी पड़ती है और अपना हक साबित करना पड़ता है। इसीलिए नॉमिनी की मौत होने पर तुरंत नया नाम दर्ज कराना बहुत जरूरी है।You may also like
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क्या वसीयत होने पर भी नॉमिनी बदलना जरूरी है?
कई लोगों को लगता है कि अगर उन्होंने अपनी वसीयत बनवा ली है, तो नॉमिनी बदलने की कोई जरूरत नहीं है। यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। भले ही वसीयत बनी हो, फिर भी बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां और म्यूचुअल फंड सबसे पहले पैसा उसी इंसान को देते हैं जिसका नाम उनके रिकॉर्ड में नॉमिनी के तौर पर दर्ज होता है। इसके बाद अगर वसीयत में किसी और का नाम है, तो आपस में बंटवारा वसीयत के हिसाब से होता है। इसीलिए अगर आपने अपनी वसीयत बदल ली है या परिवार के हालात बदल गए हैं, तो नॉमिनी भी तुरंत बदल दें।ये भी पढ़ें: EPFO E-Nomination Process: पीएफ खाताधारक घर बैठे ऐसे अपडेट करें अपना नॉमिनी, जानिए सबसे आसान ऑनलाइन तरीका





