SBI Fraud Compensation: बैंक खाते से बिना इजाजत कटे पैसे तो मिली बड़ी राहत, जानिए उपभोक्ता अदालत का फैसला

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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एक खाताधारक के साथ साल 2018 में एक ऐसी घटना घटी जिसने उसे लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ने पर मजबूर कर दिया। ग्राहक के खाते से बिना उसकी सहमति या जानकारी के 1.3 लाख रुपये काट लिए गए थे। अब इस मामले में उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने एसबीआई को निर्देश दिया है कि वह पीड़ित ग्राहक को ब्याज और मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे के साथ कुल 1.4 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान करे।
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जानिए क्या है 2018 का पूरा मामला?

यह पूरा मामला अक्टूबर 2018 का है जब शिकायतकर्ता के एसबीआई बैंक खाते से 1.3 लाख रुपये की राशि अनधिकृत रूप से डेबिट कर ली गई थी। खाते से पैसे कटने का मैसेज मिलते ही ग्राहक ने तुरंत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों से संपर्क किया और इस अवैध लेन-देन की शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, बैंक की ओर से संतोषजनक कार्रवाई न होने और पैसे वापस न मिलने पर ग्राहक ने अपनी गाढ़ी कमाई वापस पाने के लिए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

उपभोक्ता फोरम में बैंक का पक्ष और दलीलें

मामले की सुनवाई के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। बैंक का तर्क था कि यह लेन-देन ग्राहक की ओर से साझा की गई गोपनीय जानकारी या किसी तकनीकी प्रक्रिया के तहत हुआ हो सकता है। एसबीआई ने अपनी ओर से सेवा में किसी भी तरह की कमी या लापरवाही से इनकार किया। हालांकि, बैंक यह साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा कि यह लेन-देन ग्राहक की सहमति या उसकी गलती की वजह से ही पूरा हुआ था।


उपभोक्ता फोरम का फैसला और एसबीआई पर जुर्माना

दोनों पक्षों की दलीलें और पेश किए गए सबूतों को ध्यान से देखने के बाद उपभोक्ता फोरम ने माना कि बैंक अपने ग्राहक के खाते और जमा पूंजी की सुरक्षा करने में असफल रहा है। आयोग ने कहा कि बिना किसी वैध प्रमाणीकरण के ग्राहक के खाते से पैसे कट जाना बैंक की सेवा में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। इसलिए अदालत ने आदेश दिया कि एसबीआई शिकायतकर्ता को 1.3 लाख रुपये की मूल राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके साथ ही बैंक को ग्राहक को हुए मानसिक कष्ट के मुआवजे और कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में अतिरिक्त राशि देने का भी निर्देश दिया गया, जिससे कुल देय राशि लगभग 1.4 लाख रुपये हो गई।

बैंक ग्राहकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह आदेश?

उपभोक्ता फोरम का यह फैसला आम बैंक ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के मुताबिक, यदि किसी ग्राहक के खाते से कोई अनधिकृत लेन-देन होता है और ग्राहक इसकी सूचना तुरंत बैंक को दे देता है, तो ग्राहक की देयता शून्य होती है। यह मामला साबित करता है कि बैंक खातों से साइबर धोखाधड़ी या तकनीकी खामी के कारण पैसे कटने पर ग्राहक कानूनी रास्ते से अपना हक और मुआवजा हासिल कर सकते हैं।

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