Job Hugging: क्या है जॉब हगिंग? जानें क्यों 75 फीसदी कर्मचारी नहीं बदलना चाहते अपनी नौकरी
आजकल बहुत से लोगों को लगता है कि नई नौकरी ढूंढना काफी मुश्किल हो सकता है, इसलिए वे अपनी पुरानी नौकरी में ही टिके रहना बेहतर समझते हैं। अगर आप भी ऐसा ही महसूस कर रहे हैं तो आप अकेले नहीं हैं, देश भर में कई लोग नई जॉब में स्विच करने से डर रहे हैं। काम और रोजगार का तरीका अब काफी बदल चुका है। कंपनियों में लगातार होती छंटनी, AI का बढ़ता इस्तेमाल और नौकरी जाने के डर ने लोगों को अपने करियर को लेकर बहुत ज्यादा सतर्क बना दिया है। इसी माहौल के बीच 'जॉब हगिंग' शब्द काफी चर्चा में आ गया है। इसका सीधा सा मतलब है कि कर्मचारी अपनी मौजूदा नौकरी से पूरी तरह चिपके हुए हैं, भले ही उन्हें काम में कोई खुशी या संतुष्टि न मिल रही हो।
क्या है जॉब हगिंग?
जॉब हगिंग का शाब्दिक अर्थ अपनी मौजूदा नौकरी को कसकर पकड़े रहना है। भले ही लोग अपने रोल से नाखुश हों या कुछ नया न सीख पा रहे हों, फिर भी वे नौकरी छोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। लोग एक नई कंपनी के लिए अपनी जानी-पहचानी पुरानी नौकरी का जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। जॉब में संतुष्टि न मिलने के बावजूद अपनी पोजिशन पर बने रहने की इसी आदत को जॉब हगिंग कहा जाता है।
एक्सपर्ट्स की क्या राय है?
जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई वजहें हैं। लोगों को लगता है कि जो नौकरी अभी हाथ में है, वही सबसे सुरक्षित है। बाजार में छंटनी और AI के आने से फैली अनिश्चितता ने लोगों के मन में खौफ पैदा कर दिया है, जिससे वे नई कंपनियों में जाने से हिचकिचा रहे हैं। इसके अलावा नए ऑफिस के माहौल में ढलने का तनाव भी एक बड़ा कारण है। इन सब वजहों से लोग बोरिंग लगने के बावजूद अपनी पुरानी नौकरी में ही टिके रहने का फैसला कर रहे हैं।
क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 75% कर्मचारियों का इरादा 2027 तक अपनी इसी नौकरी में बने रहने का है। वहीं 48% लोग केवल इसलिए रुकना चाहते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि नौकरी छोड़ने से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। दिलचस्प बात यह है कि इस तरह का व्यवहार करने वालों में 55% लोग उम्रदराज या सीनियर कर्मचारी हैं, जबकि युवा कर्मचारी नौकरी बदलने से कम डरते हैं।
लोग नई नौकरी से क्यों कतरा रहे हैं?
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कंपनियों के हायरिंग के तरीके बदल गए हैं और बाहर मार्केट में नए मौके बहुत कम हैं, इसलिए लोगों को लगता है कि पुरानी जॉब में रहना ही सबसे सेफ है। बढ़ती महंगाई ने भी लोगों को लाचार कर दिया है, जहां घर के बढ़ते खर्चे और सैलरी न बढ़ने का डर उन्हें सताता है। इसके साथ ही भविष्य की चिंता भी जुड़ी हुई है। नई तकनीक के तेजी से आने के कारण लोगों को लगता है कि वे शायद नए माहौल में तालमेल न बैठा पाएं, इसलिए वे जहां हैं वहीं रहने का फैसला करते हैं।
क्या 'जॉब हगिंग' करियर के लिए नुकसानदेह है?
विशेषज्ञों का कहना है कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। बिना किसी ग्रोथ के सालों तक एक ही रोल में रहने के कुछ नुकसान भी हैं। अक्सर कंपनी बदलने से सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी मिलती है, जबकि एक ही तरह का काम रोज करने से दिमागी थकान होने लगती है। इसके अलावा नई चुनौतियों से बचने की वजह से आपका प्रोफेशनल विकास भी रुक सकता है।
जॉब हगिंग आज के समय में करियर की असुरक्षा का एक बड़ा रूप बन चुका है। लोग अपनी मौजूदा नौकरी से खुश न होते हुए भी सिर्फ जॉब खोने के डर से उससे चिपके हुए हैं। आगे की संभावनाओं या सफलता की परवाह किए बिना लोग फिलहाल वहीं रुकना पसंद कर रहे हैं जहां वे पहले से हैं।
क्या है जॉब हगिंग?
जॉब हगिंग का शाब्दिक अर्थ अपनी मौजूदा नौकरी को कसकर पकड़े रहना है। भले ही लोग अपने रोल से नाखुश हों या कुछ नया न सीख पा रहे हों, फिर भी वे नौकरी छोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। लोग एक नई कंपनी के लिए अपनी जानी-पहचानी पुरानी नौकरी का जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। जॉब में संतुष्टि न मिलने के बावजूद अपनी पोजिशन पर बने रहने की इसी आदत को जॉब हगिंग कहा जाता है।
एक्सपर्ट्स की क्या राय है?
जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई वजहें हैं। लोगों को लगता है कि जो नौकरी अभी हाथ में है, वही सबसे सुरक्षित है। बाजार में छंटनी और AI के आने से फैली अनिश्चितता ने लोगों के मन में खौफ पैदा कर दिया है, जिससे वे नई कंपनियों में जाने से हिचकिचा रहे हैं। इसके अलावा नए ऑफिस के माहौल में ढलने का तनाव भी एक बड़ा कारण है। इन सब वजहों से लोग बोरिंग लगने के बावजूद अपनी पुरानी नौकरी में ही टिके रहने का फैसला कर रहे हैं।
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क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 75% कर्मचारियों का इरादा 2027 तक अपनी इसी नौकरी में बने रहने का है। वहीं 48% लोग केवल इसलिए रुकना चाहते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि नौकरी छोड़ने से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। दिलचस्प बात यह है कि इस तरह का व्यवहार करने वालों में 55% लोग उम्रदराज या सीनियर कर्मचारी हैं, जबकि युवा कर्मचारी नौकरी बदलने से कम डरते हैं।
लोग नई नौकरी से क्यों कतरा रहे हैं?
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कंपनियों के हायरिंग के तरीके बदल गए हैं और बाहर मार्केट में नए मौके बहुत कम हैं, इसलिए लोगों को लगता है कि पुरानी जॉब में रहना ही सबसे सेफ है। बढ़ती महंगाई ने भी लोगों को लाचार कर दिया है, जहां घर के बढ़ते खर्चे और सैलरी न बढ़ने का डर उन्हें सताता है। इसके साथ ही भविष्य की चिंता भी जुड़ी हुई है। नई तकनीक के तेजी से आने के कारण लोगों को लगता है कि वे शायद नए माहौल में तालमेल न बैठा पाएं, इसलिए वे जहां हैं वहीं रहने का फैसला करते हैं।
क्या 'जॉब हगिंग' करियर के लिए नुकसानदेह है?
विशेषज्ञों का कहना है कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। बिना किसी ग्रोथ के सालों तक एक ही रोल में रहने के कुछ नुकसान भी हैं। अक्सर कंपनी बदलने से सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी मिलती है, जबकि एक ही तरह का काम रोज करने से दिमागी थकान होने लगती है। इसके अलावा नई चुनौतियों से बचने की वजह से आपका प्रोफेशनल विकास भी रुक सकता है।
जॉब हगिंग आज के समय में करियर की असुरक्षा का एक बड़ा रूप बन चुका है। लोग अपनी मौजूदा नौकरी से खुश न होते हुए भी सिर्फ जॉब खोने के डर से उससे चिपके हुए हैं। आगे की संभावनाओं या सफलता की परवाह किए बिना लोग फिलहाल वहीं रुकना पसंद कर रहे हैं जहां वे पहले से हैं।





