Bhubaneswar Bomb Blast: एयरफील्ड इलाके में बम बनाते समय हुआ जोरदार धमाका, दो लोगों की मौत
भुवनेश्वर के एयरफील्ड इलाके में जो कुछ हुआ, उसने पूरे शहर को सन्न कर दिया है। एक रिहायशी इमारत की छत पर गुपचुप तरीके से चल रही बम बनाने की कथित साजिश का अंत भीषण आग, चीख-पुकार और दो लोगों की मौत के साथ हुआ। इस घटना का एक दिल दहला देने वाला वीडियो अब सामने आया है, जिसमें धमाके के बाद की अफरातफरी और आग की लपटें साफ देखी जा सकती हैं।
पुलिस के मुताबिक, धमाका उस वक्त हुआ जब कथित तौर पर छत पर देसी बम तैयार किए जा रहे थे। इस हादसे में सिर्फ मां-बेटे ही नहीं, बल्कि शाहनवाज की मंगेतर तृप्तिमाई महल (23) और उसका एक साथी अमिया मलिक (27) भी गंभीर रूप से घायल हो गए। फिलहाल, तृप्तिमाई और अमिया का भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
एयरफील्ड पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि शाहनवाज को बहुत गंभीर चोटें आई थीं, जिसके कारण उसे बचाया नहीं जा सका। जांचकर्ताओं का मानना है कि विस्फोट बम असेंबल करते समय हुआ, जिससे यह साफ होता है कि वहां किसी बड़ी साजिश की तैयारी चल रही थी।
मौके से पुलिस ने बम बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल और अन्य संदिग्ध सामान भी जब्त किया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भी इसकी प्रारंभिक जांच की। एजेंसी ने फिलहाल किसी आतंकी कनेक्शन या कट्टरपंथ से जुड़े लिंक से इनकार किया है, लेकिन यह जांच की जा रही है कि क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शाहनवाज अकेला काम कर रहा था या उसके साथ और भी लोग शामिल थे, और इन बमों का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाना था।
अपराधी और मां की मौत
यह घटना 27 जनवरी की है, जब एयरफील्ड थाना क्षेत्र में एक तीन मंजिला इमारत की छत पर जोरदार धमाका हुआ। इस हादसे में गंभीर रूप से झुलसे हिस्ट्रीशीटर अपराधी शाहनवाज मलिक (26) ने 4 फरवरी को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, उसकी मां लिजातुन बीबी (51), जो इस धमाके में बुरी तरह घायल हुई थीं, ने भी 10 फरवरी को कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में अंतिम सांस ली।पुलिस के मुताबिक, धमाका उस वक्त हुआ जब कथित तौर पर छत पर देसी बम तैयार किए जा रहे थे। इस हादसे में सिर्फ मां-बेटे ही नहीं, बल्कि शाहनवाज की मंगेतर तृप्तिमाई महल (23) और उसका एक साथी अमिया मलिक (27) भी गंभीर रूप से घायल हो गए। फिलहाल, तृप्तिमाई और अमिया का भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
पुलिस की थ्योरी
पुलिस जांच में पता चला है कि मारा गया शाहनवाज मलिक कोई आम नागरिक नहीं था। उस पर हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत सात आपराधिक मामले दर्ज थे। वह नयापल्ली में हुई एक राजनीतिक झड़प के बाद जेल गया था और घटना से करीब छह महीने पहले ही जमानत पर रिहा हुआ था। पुलिस उस पर नजर रख रही थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि वह अपने घर की छत पर इतना खतरनाक खेल खेल रहा है।एयरफील्ड पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि शाहनवाज को बहुत गंभीर चोटें आई थीं, जिसके कारण उसे बचाया नहीं जा सका। जांचकर्ताओं का मानना है कि विस्फोट बम असेंबल करते समय हुआ, जिससे यह साफ होता है कि वहां किसी बड़ी साजिश की तैयारी चल रही थी।
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फॉरेंसिक जांच
धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि फॉरेंसिक टीमों और बम निरोधक दस्तों को तुरंत मौके पर बुलाया गया। फॉरेंसिक सूत्रों ने संकेत दिया है कि बम बनाने में बेहद शक्तिशाली विस्फोटकों का इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में 'हेक्साहाइड्रो ट्रिनिट्रो ट्रियाज़िन' (Hexahydro Trinitro Triazine) नामक यौगिक के उपयोग की बात सामने आई है, जो उच्च श्रेणी के विस्फोटकों से जुड़ा होता है। हालांकि, विस्तृत रिपोर्ट का अभी इंतजार है।मौके से पुलिस ने बम बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल और अन्य संदिग्ध सामान भी जब्त किया है।
पड़ोसियों को नहीं थी भनक
हैरानी की बात यह है कि जिस तीन मंजिला इमारत में यह सब चल रहा था, वहां रहने वाले अन्य किराएदारों को इसकी कोई खबर नहीं थी। एक किराएदार ने बताया, "हमें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि ऊपर क्या चल रहा है। हम सभी की जान खतरे में थी।"मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भी इसकी प्रारंभिक जांच की। एजेंसी ने फिलहाल किसी आतंकी कनेक्शन या कट्टरपंथ से जुड़े लिंक से इनकार किया है, लेकिन यह जांच की जा रही है कि क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शाहनवाज अकेला काम कर रहा था या उसके साथ और भी लोग शामिल थे, और इन बमों का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाना था।









