Explainer: कौन होते हैं एमिकस क्यूरी और कोर्ट को क्यों पड़ी केजरीवाल केस में इनकी जरूरत?

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाईकोर्ट में जज स्वर्णकांता शर्मा की अदालत का बहिष्कार करने का फैसला किया है। केजरीवाल का कहना है कि वे इस कोर्ट में अपना केस नहीं लड़ेंगे। इस वजह से हाईकोर्ट ने अब केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक का पक्ष सुनने के लिए 'एमिकस क्यूरी' (Amicus Curiae) तैनात करने का फैसला किया है। बहुत से लोग इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर ये एमिकस क्यूरी होते कौन हैं और इनका काम क्या है।
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सबसे पहले यह जान लीजिए कि एमिकस क्यूरी अरविंद केजरीवाल के निजी वकील नहीं हैं। यह कोई ऐसा व्यक्ति नहीं होता जिसे किसी पार्टी ने खुद चुना हो। सरल शब्दों में कहें तो एमिकस क्यूरी का मतलब है "अदालत का दोस्त"। ये अनुभवी और वरिष्ठ वकील होते हैं जिन्हें कोर्ट खुद नियुक्त करता है ताकि कानून से जुड़ी पेचीदा बातों को निष्पक्ष तरीके से समझा जा सके और यह पक्का हो कि सुनवाई में कोई कमी न रह जाए।

केजरीवाल के मामले में कोर्ट ने क्यों लिया यह फैसला?

दिल्ली हाईकोर्ट में शराब नीति मामले से जुड़ी सीबीआई की एक अपील पर सुनवाई हो रही है। ट्रायल कोर्ट ने पहले इन सभी को बरी कर दिया था, लेकिन अब हाईकोर्ट इस पर दोबारा गौर कर रहा है। जब केजरीवाल ने सुनवाई में हिस्सा लेने से मना कर दिया, तो जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि भले ही आरोपी पेश न हों, लेकिन केस की सुनवाई जारी रहेगी। इसके लिए 8 मई को अगली तारीख तय की गई है।

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एमिकस क्यूरी का क्या काम होता है?

अक्सर जब कोई गंभीर मामला हो या ऐसा केस जिसका असर पूरे समाज पर पड़ना हो, तो कोर्ट इनकी मदद लेता है। इनकी भूमिका किसी एक पक्ष को जिताने की नहीं, बल्कि न्याय को सही दिशा में ले जाने की होती है। ये कानून के माहिर होते हैं और कई बार तकनीकी मामलों में डॉक्टर, पर्यावरणविद या अर्थशास्त्री को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।

किसे मिलता है इनका मेहनताना?

चूंकि ये अदालत की मदद के लिए आते हैं, इसलिए कई बड़े वकील इसे अपना सम्मान और जिम्मेदारी मानकर मुफ्त में करते हैं। हालांकि, अगर मामला बहुत बड़ा हो, तो कोर्ट सरकार को इन्हें फीस देने का आदेश दे सकती है। कभी-कभी कोर्ट आरोपियों से भी कह सकता है कि एमिकस क्यूरी का खर्च उन्हें उठाना होगा।


अजमल कसाब के मामले में क्या हुआ था?

26/11 मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब के मामले में भी ऐसी स्थिति बनी थी। हालांकि वहां एमिकस क्यूरी से पहले सरकार ने वकील दिए थे। लेकिन जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, तो वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन को एमिकस क्यूरी बनाया गया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि एक आतंकवादी को भी अपना पक्ष रखने का पूरा कानूनी मौका मिला है।

किन बड़े मामलों में रही है इनकी भूमिका?

भारत के इतिहास में कई चर्चित मामलों में एमिकस क्यूरी की मदद ली गई है:
  • निर्भया केस: सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा की कानूनी बारीकियों को जांचने के लिए इनकी मदद ली थी।
  • सलमान खान हिट एंड रन: बॉम्बे हाईकोर्ट ने विदेशी गवाहों के बयानों की वैधता समझने के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त किए थे।
  • जगन्नाथ मंदिर मामला: मंदिर के प्रबंधन और भक्तों की सुविधाओं के लिए रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी एमिकस क्यूरी को दी गई थी।

कुल मिलाकर, एमिकस क्यूरी का काम राजनीति या भावनाओं से ऊपर उठकर सिर्फ कानून की बात करना है, ताकि जज साहब को सही फैसला लेने में मदद मिल सके।





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