पोस्ट पर कम लाइक्स आए तो क्यों बिगड़ जाता है मूड? जानिए इसके पीछे का साइंस
सोशल मीडिया आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। इंस्टाग्राम, फेसबुक और दूसरे प्लेटफॉर्म पर लोग अपनी तस्वीरें, वीडियो और पोस्ट शेयर करते हैं। लेकिन कई बार जब किसी पोस्ट पर उम्मीद के मुताबिक लाइक्स नहीं आते, तो लोगों का मूड खराब हो जाता है। इसके पीछे सिर्फ इमोशन्स नहीं, बल्कि माइंड का साइंस भी काम करता है।
धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स और कमेंट्स को लोग अपनी पॉपुलैरिटी और पहचान से जोड़ने लगे हैं। ऐसे में जब किसी पोस्ट को कम रिस्पॉन्स मिलता है, तो कई लोगों को लगता है कि उनकी अहमियत कम हो गई है।
जब किसी पोस्ट पर ज्यादा लाइक्स आते हैं, तो दिमाग में डोपामिन नाम का केमिकल रिलीज होता है, जो खुशी और संतुष्टि का एहसास कराता है। यही वजह है कि लोग बार-बार नोटिफिकेशन चेक करते हैं। लेकिन उम्मीद से कम लाइक्स मिलने पर वही खुशी नहीं मिलती और मूड खराब हो सकता है।
सोशल मीडिया पर लोग अपनी जिंदगी के सबसे अच्छे पल दिखाते हैं। ऐसे में दूसरों की ज्यादा लाइक्स वाली पोस्ट देखकर कई लोग अपनी जिंदगी और पॉपुलैरिटी की तुलना करने लगते हैं। यह आदत आत्मविश्वास को कमजोर कर सकती है।
कई लोग अपनी खुशी और आत्मविश्वास को दूसरों के रिएक्शन से जोड़ने लगते हैं। धीरे-धीरे लाइक्स और कमेंट्स की संख्या उनके लिए मानसिक संतुष्टि का जरिया बन जाती है। जब उम्मीद के मुताबिक रिएक्शन नहीं मिलते, तो निराशा बढ़ सकती है।
डॉक्टर्स के मुताबिक, टीनएजर्स और युवा सोशल मीडिया से मिलने वाले रिएक्शन को लेकर ज्यादा संवेदनशील होते हैं। कम लाइक्स मिलने पर उनमें चिंता, तनाव और अकेलेपन की भावना बढ़ सकती है। कई बार इसका असर पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है।
पोस्ट करने के बाद हर कुछ मिनट में लाइक्स और कमेंट्स देखने की आदत बेचैनी बढ़ा सकती है। इससे काम, पढ़ाई और नींद पर भी असर पड़ता है। लगातार नोटिफिकेशन पर ध्यान देने से मानसिक थकान भी महसूस हो सकती है।
डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि लाइक्स और फॉलोअर्स को अपनी पहचान का पैमाना नहीं बनाना चाहिए। स्क्रीन टाइम सीमित करना, करीबी रिश्तों को समय देना और खुद की तुलना दूसरों से न करना मेंटल हेल्थ के लिए बेहतर माना जाता है।
सोशल मीडिया कुछ समय के लिए खुशी जरूर दे सकता है, लेकिन असली आत्मविश्वास और खुशी खुद को समझने और करीबी रिश्तों से मिलती है। इसलिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें, लेकिन अपनी खुशी और मानसिक शांति को उसके भरोसे न छोड़ें।
लाइक्स से सेल्फ-वर्थ आंकने लगे हैं लोग
धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स और कमेंट्स को लोग अपनी पॉपुलैरिटी और पहचान से जोड़ने लगे हैं। ऐसे में जब किसी पोस्ट को कम रिस्पॉन्स मिलता है, तो कई लोगों को लगता है कि उनकी अहमियत कम हो गई है।
डोपामिन का खतरनाक लूप
जब किसी पोस्ट पर ज्यादा लाइक्स आते हैं, तो दिमाग में डोपामिन नाम का केमिकल रिलीज होता है, जो खुशी और संतुष्टि का एहसास कराता है। यही वजह है कि लोग बार-बार नोटिफिकेशन चेक करते हैं। लेकिन उम्मीद से कम लाइक्स मिलने पर वही खुशी नहीं मिलती और मूड खराब हो सकता है।
दूसरों से तुलना बढ़ा रही है टेंशन
सोशल मीडिया पर लोग अपनी जिंदगी के सबसे अच्छे पल दिखाते हैं। ऐसे में दूसरों की ज्यादा लाइक्स वाली पोस्ट देखकर कई लोग अपनी जिंदगी और पॉपुलैरिटी की तुलना करने लगते हैं। यह आदत आत्मविश्वास को कमजोर कर सकती है।
वैलिडेशन की आदत बनती जा रही है
कई लोग अपनी खुशी और आत्मविश्वास को दूसरों के रिएक्शन से जोड़ने लगते हैं। धीरे-धीरे लाइक्स और कमेंट्स की संख्या उनके लिए मानसिक संतुष्टि का जरिया बन जाती है। जब उम्मीद के मुताबिक रिएक्शन नहीं मिलते, तो निराशा बढ़ सकती है।
युवाओं और टीनएजर्स पर ज्यादा असर
डॉक्टर्स के मुताबिक, टीनएजर्स और युवा सोशल मीडिया से मिलने वाले रिएक्शन को लेकर ज्यादा संवेदनशील होते हैं। कम लाइक्स मिलने पर उनमें चिंता, तनाव और अकेलेपन की भावना बढ़ सकती है। कई बार इसका असर पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है।
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बार-बार फोन चेक करने की आदत
पोस्ट करने के बाद हर कुछ मिनट में लाइक्स और कमेंट्स देखने की आदत बेचैनी बढ़ा सकती है। इससे काम, पढ़ाई और नींद पर भी असर पड़ता है। लगातार नोटिफिकेशन पर ध्यान देने से मानसिक थकान भी महसूस हो सकती है।
सोशल मीडिया को जिंदगी पर हावी न होने दें
डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि लाइक्स और फॉलोअर्स को अपनी पहचान का पैमाना नहीं बनाना चाहिए। स्क्रीन टाइम सीमित करना, करीबी रिश्तों को समय देना और खुद की तुलना दूसरों से न करना मेंटल हेल्थ के लिए बेहतर माना जाता है।
असली खुशी लाइक्स में नहीं, जिंदगी में है
सोशल मीडिया कुछ समय के लिए खुशी जरूर दे सकता है, लेकिन असली आत्मविश्वास और खुशी खुद को समझने और करीबी रिश्तों से मिलती है। इसलिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें, लेकिन अपनी खुशी और मानसिक शांति को उसके भरोसे न छोड़ें।









