On This Day: कुसल परेरा की वो पारी जिसने डरबन में इतिहास रच दिया
क्रिकेट के खेल में ऐसा कहा जाता है कि जब तक आखिरी गेंद नहीं फेंकी जाती, तब तक कुछ भी हो सकता है। साल 2019 में आज ही के दिन डरबन के मैदान पर कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जिसने टेस्ट क्रिकेट के इतिहास को बदल कर रख दिया। यह कहानी है श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए उस टेस्ट मैच की, जिसे क्रिकेट फैंस शायद ही कभी भूल पाएंगे।
सामने दक्षिण अफ्रीका का विश्वस्तरीय गेंदबाजी आक्रमण था, जिसमें डेल स्टेन, कैगिसो रबाडा, वर्नोन फिलेंडर, डुआने ओलिवियर और केशव महाराज जैसे गेंदबाज शामिल थे। एक समय पर ऐसा लग रहा था कि मैच खत्म होने में बस कुछ ही मिनटों का समय बाकी है।
जैसे-जैसे रन कम होते गए, दक्षिण अफ्रीकी टीम में चिंता बढ़ने लगी। परेरा ने अपने आक्रामक शॉट्स से गेंदबाजों की लय बिगाड़ दी। हर चौके और छक्के के साथ श्रीलंका जीत के करीब पहुंचता गया और स्टेडियम का माहौल तनावपूर्ण होता गया।
एक नामुमकिन सी शुरुआत
डरबन के किंग्समीड मैदान पर श्रीलंका के लिए स्थिति बिल्कुल भी आसान नहीं थी। जीत के लिए श्रीलंका को एक पहाड़ जैसा लक्ष्य मिला था। जब आखिरी जोड़ी मैदान पर बची थी, तब भी जीत के लिए 78 रनों की जरूरत थी। क्रीज पर थे कुसल परेरा और उनका साथ देने के लिए आए थे आखिरी बल्लेबाज विश्वा फर्नांडो। किसी ने भी उम्मीद नहीं की थी कि यह मैच श्रीलंका की ओर जा सकता है।सामने दक्षिण अफ्रीका का विश्वस्तरीय गेंदबाजी आक्रमण था, जिसमें डेल स्टेन, कैगिसो रबाडा, वर्नोन फिलेंडर, डुआने ओलिवियर और केशव महाराज जैसे गेंदबाज शामिल थे। एक समय पर ऐसा लग रहा था कि मैच खत्म होने में बस कुछ ही मिनटों का समय बाकी है।
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श्रीलंका का शानदार पलटवार
लेकिन श्रीलंकाई बल्लेबाज कुसल परेरा के इरादे कुछ और ही थे। उन्होंने हार मानने के बजाय पलटवार करने का फैसला किया। परेरा ने उस दिन जो बल्लेबाजी की, वह साहस और कौशल का एक बेहतरीन उदाहरण थी। उन्होंने दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों की हर चुनौती का जवाब दिया और तेजी से रन बटोरने शुरू किए। दूसरी तरफ विश्वा फर्नांडो ने भी गजब का संयम दिखाया। वह एक दीवार की तरह एक छोर पर डटे रहे और परेरा को स्ट्राइक देते रहे।जैसे-जैसे रन कम होते गए, दक्षिण अफ्रीकी टीम में चिंता बढ़ने लगी। परेरा ने अपने आक्रामक शॉट्स से गेंदबाजों की लय बिगाड़ दी। हर चौके और छक्के के साथ श्रीलंका जीत के करीब पहुंचता गया और स्टेडियम का माहौल तनावपूर्ण होता गया।





