Explainer: हंता वायरस क्या है और इंसानों तक यह कैसे पहुंचता है?

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हंता वायरस के संभावित प्रकोप से जुड़ा एक क्रूज़ जहाज़ इस हफ्ते के अंत तक कैनरी आइलैंड्स पहुंचने वाला है। एमवी होंडियस नाम के इस समुद्री जहाज़ पर सफर कर रहे यात्रियों में हंता वायरस संक्रमण की पुष्टि और संदिग्ध मामलों ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
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अब तक पांच लोगों में वायरस की पुष्टि हो चुकी है, जबकि आठ अन्य मामले संदिग्ध बताए जा रहे हैं। हंता वायरस के इस घटनाक्रम पर कई देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां नजर बनाए हुए हैं।

किन यात्रियों में हंता वायरस की पुष्टि हुई?


पुष्टि किए गए मामलों में एक डच महिला शामिल हैं, जिनकी मौत हो चुकी है। इसके अलावा एक ब्रिटिश यात्री दक्षिण अफ्रीका में इंटेंसिव केयर में भर्ती हैं। एक स्विस यात्री का इलाज ज़्यूरिख़ के एक अस्पताल में चल रहा है।


संदिग्ध मामलों में एक ब्रिटिश पुरुष, एक डच क्रू सदस्य और एक जर्मन नागरिक शामिल हैं। इनमें से दो लोगों को इलाज के लिए नीदरलैंड ले जाया गया है, जबकि तीसरे व्यक्ति की हालत स्थिर बताई जा रही है।

हालांकि इन संदिग्ध मरीजों में किसी का भी हंता वायरस टेस्ट पॉजिटिव नहीं आया है, लेकिन दो लोगों में वायरस जैसे लक्षण दिखाई दिए हैं।


जहाज़ पर कितने लोग अब भी मौजूद हैं?


फिलहाल 23 देशों के 146 लोग अब भी एमवी होंडियस पर सवार हैं। जहाज़ अर्जेंटीना से अटलांटिक महासागर पार करते हुए केप वर्डे के रास्ते कैनरी आइलैंड्स की ओर बढ़ रहा है।

कैनरी आइलैंड्स पहुंचने पर सभी यात्रियों और क्रू की मेडिकल जांच की जाएगी। इसके बाद ही उन्हें अपने-अपने घर लौटने की अनुमति मिलेगी।

ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने बताया कि दो ब्रिटिश यात्री संभावित संपर्क में आने के बाद घर पर आइसोलेशन में हैं। एजेंसी के अनुसार, उन्होंने यात्रा के शुरुआती दौर में ही जहाज़ छोड़ दिया था और उनमें कोई लक्षण नहीं दिखे हैं।

अमेरिका भी यात्रियों पर रख रहा है नजर


अमेरिका के एरिज़ोना और जॉर्जिया राज्यों के अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि वे तीन ऐसे यात्रियों की निगरानी कर रहे हैं जो केप वर्डे पहुंचने से पहले ही जहाज़ से उतरकर अमेरिका लौट गए थे।


फिलहाल इन तीनों यात्रियों में हंता वायरस के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर उनकी निगरानी जारी है।

हंता वायरस क्या है?


हंता वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की हंता नदी के नाम पर रखा गया है। यह किसी एक बीमारी का नाम नहीं, बल्कि वायरसों के पूरे परिवार को दर्शाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, हंता वायरस की 20 से ज्यादा अलग-अलग प्रजातियां हैं। इनमें से लगभग सभी का संबंध कुतरने वाले जानवरों, खासकर चूहों और गिलहरियों से होने वाले संक्रमण से है।

यह संक्रमण आमतौर पर चूहों या गिलहरियों के सूखे मल, मूत्र और लार के संपर्क से फैलता है। अक्सर यह वायरस सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करता है, जब संक्रमित मल-मूत्र के कण हवा में मिल जाते हैं।

एंडीज़ वायरस क्यों ज्यादा चिंता बढ़ा रहा है?


हंता वायरस की एक किस्म एंडीज़ वायरस के नाम से जानी जाती है। इसे खास तौर पर इसलिए गंभीर माना जाता है क्योंकि यह बहुत कम मामलों में इंसान से इंसान में भी फैल सकता है।


दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, दो यात्रियों में एंडीज़ वायरस की पुष्टि हुई है। इनमें एक ब्रिटिश व्यक्ति शामिल हैं, जो जोहान्सबर्ग के अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि एक डच महिला की मौत हो चुकी है।

एंडीज़ वायरस मुख्य रूप से अर्जेंटीना और चिली में पाया जाता है।

पहले भी सामने आ चुका है ऐसा प्रकोप


साल 2018 के आखिर में अर्जेंटीना में एंडीज़ वायरस का बड़ा प्रकोप सामने आया था। इसकी शुरुआत एक पार्टी में शामिल लोगों से जुड़ी थी।

माना जाता है कि वायरस से संक्रमित एक ही व्यक्ति ने अनजाने में 34 लोगों को संक्रमित कर दिया था। इनमें से 11 लोगों की मौत हो गई थी।

यही वजह है कि एमवी होंडियस पर सामने आए मौजूदा मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है।



जहाज़ पर संक्रमण कैसे फैला, अब तक साफ नहीं


फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि हंता वायरस संक्रमण जहाज़ तक पहुंचा कैसे।

एक डच दंपति, जिनमें से महिला की मौत हो चुकी है, अप्रैल की शुरुआत में जहाज़ पर चढ़ने से पहले दक्षिण अमेरिका की यात्रा पर थे। माना जा रहा है कि संभव है यात्रा के दौरान उनमें से कोई वायरस के संपर्क में आया हो।

चूंकि यह क्रूज़ दूरदराज के जंगली इलाकों का भी दौरा कर रहा था, इसलिए यह संभावना भी जताई जा रही है कि किसी यात्री का संपर्क संक्रमित कुतरने वाले जानवरों से हुआ हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि आगे की जेनेटिक जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि वायरस सबसे पहले जहाज़ तक कैसे पहुंचा।

अभी जहाज़ पर क्या एहतियात बरते जा रहे हैं?


डब्ल्यूएचओ फिलहाल इस संभावना पर काम कर रहा है कि वायरस जहाज़ पर बहुत नजदीकी संपर्क या चूहों जैसे जीवों के संपर्क से फैला हो सकता है।


एंडीज़ वायरस की पुष्टि के बाद यात्रियों और क्रू के लिए सोशल डिस्टेंसिंग बेहद जरूरी हो गई है। संक्रमण का खतरा कम करने के लिए यात्रियों को फिलहाल उनके केबिन तक सीमित रखा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार संक्रमित लोगों को अलग रखना, नियमित हाथ धोना, नजदीकी संपर्कों की पहचान करना और उन पर निगरानी रखना संक्रमण रोकने के सबसे अहम कदम हैं।

हंता वायरस कितना खतरनाक है?


हंता वायरस दो गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। पहली है हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS)।

इस बीमारी की शुरुआत अक्सर थकान, बुखार और मांसपेशियों में दर्द से होती है। बाद में सिरदर्द, चक्कर आना, कंपकंपी और पेट की समस्या हो सकती है। गंभीर स्थिति में मरीज को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है।

एंडीज़ स्ट्रेन से जुड़ी इस बीमारी की मृत्यु दर 20 से 40 प्रतिशत तक बताई जाती है।

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दूसरी बीमारी है हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS), जो शुरुआत में फ्लू जैसा लगता है लेकिन बाद में किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

इलाज और वैक्सीन की स्थिति क्या है?


हंता वायरस संक्रमण के लिए फिलहाल कोई विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि शुरुआती चरण में इलाज मिलने पर मरीज के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

इलाज में ऑक्सीजन थेरेपी, मैकेनिकल वेंटिलेशन और जरूरत पड़ने पर डायलिसिस भी शामिल हो सकता है। गंभीर मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ सकता है।

फिलहाल इस वायरस के खिलाफ कोई व्यापक रूप से उपलब्ध वैक्सीन नहीं है। हालांकि चीन और दक्षिण कोरिया में कुछ स्थानीय स्ट्रेन्स के खिलाफ वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

क्या दुनिया के लिए बड़ा खतरा है?


विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल दुनिया भर की आबादी के लिए हंता वायरस संक्रमण का जोखिम बहुत कम है।


अभी तक जहाज़ के बाहर संक्रमण फैलने का कोई सबूत नहीं मिला है। डब्ल्यूएचओ की अधिकारी डॉक्टर मारिया वैन केरखोव ने बीबीसी से कहा, "हम एक-दूसरे से काफ़ी दूर रहते हुए होने वाले सामान्य संपर्क की बात नहीं कर रहे हैं."

यानी यह वायरस फ्लू की तरह आसानी से हवा में नहीं फैलता, बल्कि इसके लिए बहुत नजदीकी और लंबे समय तक संपर्क जरूरी माना जाता है।

हाल के वर्षों में भी सामने आए हैं मामले


फरवरी 2025 में ऑस्कर विजेता अभिनेता जीन हैकमैन की पत्नी बेट्सी अराकावा की मौत भी हंता वायरस से जुड़ी श्वसन बीमारी के कारण हुई थी।

मेडिकल जांच में माना गया कि वह HPS से संक्रमित थीं। उनके घर के बाहरी हिस्से में पक्षियों के घोंसले और कुछ मरे हुए चूहे भी मिले थे।















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