बेंगलुरु के शख्स ने चिट फंड में जमा किए ₹5 लाख, मिले सिर्फ ₹20,000, अब कंपनी को देने होंगे ₹4.08 लाख
बेंगलुरु के एक शख्स ने ₹5 लाख की चिट फंड स्कीम में 40 महीने तक हर महीने ₹12,500 जमा किए। लेकिन बोली जीतने के बाद भी उन्हें पूरी रकम नहीं मिली और उनके हाथ सिर्फ ₹20,000 आए। भुगतान के लिए जारी किए गए दो चेक भी खाते में पर्याप्त पैसे न होने के कारण बाउंस हो गए। अब कंज्यूमर कमीशन ने Samith Chits Pvt Ltd को बकाया ₹4,07,940 का भुगतान 6.5% सालाना ब्याज के साथ करने का आदेश दिया है।
बेंगलुरु की प्रथम अतिरिक्त जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष सैयद अंसर खलीम और दो सदस्यों ने कंपनी को मुकदमे की कार्यवाही के खर्च के रूप में ₹3,000 देने का भी निर्देश दिया। आयोग ने कंपनी की सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार को इसका आधार माना। यह आदेश 28 सितंबर, 2026 को विष्णुप्रसाद की शिकायत पर सुनाया गया।
चिट की अवधि जून 2025 में पूरी हुई। इससे पहले, मई 2025 में विष्णुप्रसाद ने चिट के लिए सफल बोली लगाई थी। इसके बाद समझौते के मुताबिक, वह पुरस्कार राशि पाने के हकदार हो गए थे।
हालांकि, कंपनी ने उन्हें पूरी रकम का भुगतान नहीं किया। बाद में भुगतान के लिए दो चेक जारी किए गए। इनमें पहला चेक ₹1 लाख का था, जिसकी तारीख 5 जुलाई, 2025 थी। दूसरा चेक ₹3,27,940 का था, जिसकी तारीख 15 जुलाई, 2025 थी।
दोनों चेक बेंगलुरु के राजाजीनगर स्थित एक निजी बैंक की शाखा के थे।
इसके बाद उन्होंने 24 जुलाई, 2025 को ₹3,27,940 का दूसरा चेक जमा किया। यह चेक भी खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने के कारण बाउंस हो गया।
आयोग के आदेश के मुताबिक, बकाया राशि के लिए लगातार संपर्क करने के बाद Samith Chits ने विष्णुप्रसाद को ₹20,000 का भुगतान किया। हालांकि, कंपनी ने बाकी ₹4,07,940 का भुगतान नहीं किया।
इसके बाद विष्णुप्रसाद ने चेक बाउंस से जुड़े कानून, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत कानूनी नोटिस भेजा। उन्होंने बेंगलुरु की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में भी दो मामले दर्ज कराए। ये मामले CC No. 72718/2025 और CC No. 72660/2025 के नाम से दर्ज हैं।
इसके बाद उन्होंने बकाया चिट फंड राशि वापस पाने के लिए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
इन दस्तावेजों में कंपनी का ब्रोशर, Samith Chits की ओर से जारी किया गया स्टेटमेंट, दोनों चेक की प्रतियां, उनके बाउंस होने के रिकॉर्ड और ₹20,000 के भुगतान का सबूत शामिल था।
आयोग ने पाया कि चिट फंड की पुरस्कार राशि के भुगतान के लिए जारी किए गए चेक बाउंस हो गए थे। इसके बावजूद, बार-बार संपर्क करने पर भी कंपनी ने बकाया रकम का भुगतान नहीं किया।
Samith Chits को नोटिस जारी किए जाने के बावजूद कंपनी आयोग के सामने पेश नहीं हुई। इसके बाद 24 जुलाई, 2026 को मामले में कंपनी के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की गई। इस वजह से उपभोक्ता मामले में विष्णुप्रसाद के आरोपों और उनके समर्थन में पेश किए गए सबूतों का विरोध नहीं हुआ।
रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों के आधार पर आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि कंपनी चिट की सफल बोली के बाद ग्राहक को देय रकम का भुगतान करने में विफल रही। आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना।
आयोग ने कहा कि चेक बाउंस से जुड़ी कानूनी कार्यवाही और उपभोक्ता शिकायत के उद्देश्य अलग-अलग हैं। इसलिए, चेक बाउंस का मामला लंबित होने से विष्णुप्रसाद को उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत राहत मांगने से नहीं रोका जा सकता।
इस संबंध में आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 100 का हवाला दिया। यह धारा स्पष्ट करती है कि इस अधिनियम के तहत मिलने वाले कानूनी उपाय दूसरे कानूनों के तहत उपलब्ध उपायों के अतिरिक्त हैं, न कि उनके विकल्प के रूप में।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले Shriram Chits (India) Private Limited v. Raghachand Associates का भी उल्लेख किया। इस फैसले का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि चिट फंड में पैसा लगाने वाला व्यक्ति उपभोक्ता और चिट फंड संचालक सेवा प्रदाता के रूप में माना जा सकता है।
इसी आधार पर आयोग ने माना कि अलग से चेक बाउंस की कार्यवाही चलने के बावजूद विष्णुप्रसाद उपभोक्ता आयोग से राहत पाने के हकदार थे।
इसके अलावा, कंपनी को मुकदमे की कार्यवाही के खर्च के रूप में ₹3,000 भी देने होंगे।
आदेश के मुताबिक, Samith Chits को आदेश प्राप्त होने की तारीख से 30 महीने के भीतर इसका पालन करना होगा। कंपनी को आदेश मिलने की तारीख से 45 दिनों के भीतर आयोग के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट भी जमा करनी होगी।
इस फैसले से विष्णुप्रसाद को चिट फंड की बकाया रकम के लिए राहत मिली है। साथ ही, आयोग ने उपभोक्ता शिकायत के जरिए अपना पैसा वापस पाने की कोशिश में हुए खर्च के भुगतान का भी निर्देश दिया है।

बेंगलुरु की प्रथम अतिरिक्त जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष सैयद अंसर खलीम और दो सदस्यों ने कंपनी को मुकदमे की कार्यवाही के खर्च के रूप में ₹3,000 देने का भी निर्देश दिया। आयोग ने कंपनी की सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार को इसका आधार माना। यह आदेश 28 सितंबर, 2026 को विष्णुप्रसाद की शिकायत पर सुनाया गया।
शख्स ने पूरी की ₹5 लाख की चिट फंड स्कीम
शिकायत के मुताबिक, विष्णुप्रसाद ने Samith Chits की ₹5 लाख की चिट फंड स्कीम में हिस्सा लिया था। इस स्कीम के तहत उन्हें 40 महीने तक हर महीने ₹12,500 जमा करने थे।चिट की अवधि जून 2025 में पूरी हुई। इससे पहले, मई 2025 में विष्णुप्रसाद ने चिट के लिए सफल बोली लगाई थी। इसके बाद समझौते के मुताबिक, वह पुरस्कार राशि पाने के हकदार हो गए थे।
हालांकि, कंपनी ने उन्हें पूरी रकम का भुगतान नहीं किया। बाद में भुगतान के लिए दो चेक जारी किए गए। इनमें पहला चेक ₹1 लाख का था, जिसकी तारीख 5 जुलाई, 2025 थी। दूसरा चेक ₹3,27,940 का था, जिसकी तारीख 15 जुलाई, 2025 थी।
दोनों चेक बेंगलुरु के राजाजीनगर स्थित एक निजी बैंक की शाखा के थे।
पर्याप्त पैसे न होने के कारण दोनों चेक हुए बाउंस
विष्णुप्रसाद ने ₹1 लाख का चेक 17 जुलाई, 2025 को राममूर्ति नगर स्थित अपनी बैंक शाखा के जरिए जमा किया। हालांकि, बैंक ने इसे "Funds Insufficient" की टिप्पणी के साथ भुगतान किए बिना लौटा दिया।इसके बाद उन्होंने 24 जुलाई, 2025 को ₹3,27,940 का दूसरा चेक जमा किया। यह चेक भी खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने के कारण बाउंस हो गया।
आयोग के आदेश के मुताबिक, बकाया राशि के लिए लगातार संपर्क करने के बाद Samith Chits ने विष्णुप्रसाद को ₹20,000 का भुगतान किया। हालांकि, कंपनी ने बाकी ₹4,07,940 का भुगतान नहीं किया।
इसके बाद विष्णुप्रसाद ने चेक बाउंस से जुड़े कानून, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत कानूनी नोटिस भेजा। उन्होंने बेंगलुरु की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में भी दो मामले दर्ज कराए। ये मामले CC No. 72718/2025 और CC No. 72660/2025 के नाम से दर्ज हैं।
इसके बाद उन्होंने बकाया चिट फंड राशि वापस पाने के लिए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
कंपनी ने शिकायत का विरोध नहीं किया
आयोग ने विष्णुप्रसाद की शिकायत, उनके हलफनामे और P-1 से P-13 तक के दस्तावेजों की जांच की।इन दस्तावेजों में कंपनी का ब्रोशर, Samith Chits की ओर से जारी किया गया स्टेटमेंट, दोनों चेक की प्रतियां, उनके बाउंस होने के रिकॉर्ड और ₹20,000 के भुगतान का सबूत शामिल था।
आयोग ने पाया कि चिट फंड की पुरस्कार राशि के भुगतान के लिए जारी किए गए चेक बाउंस हो गए थे। इसके बावजूद, बार-बार संपर्क करने पर भी कंपनी ने बकाया रकम का भुगतान नहीं किया।
Samith Chits को नोटिस जारी किए जाने के बावजूद कंपनी आयोग के सामने पेश नहीं हुई। इसके बाद 24 जुलाई, 2026 को मामले में कंपनी के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की गई। इस वजह से उपभोक्ता मामले में विष्णुप्रसाद के आरोपों और उनके समर्थन में पेश किए गए सबूतों का विरोध नहीं हुआ।
रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों के आधार पर आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि कंपनी चिट की सफल बोली के बाद ग्राहक को देय रकम का भुगतान करने में विफल रही। आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना।
चेक बाउंस का मामला होने पर भी उपभोक्ता आयोग में शिकायत संभव
आयोग ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत चल रही अलग कानूनी कार्यवाही पर भी विचार किया।आयोग ने कहा कि चेक बाउंस से जुड़ी कानूनी कार्यवाही और उपभोक्ता शिकायत के उद्देश्य अलग-अलग हैं। इसलिए, चेक बाउंस का मामला लंबित होने से विष्णुप्रसाद को उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत राहत मांगने से नहीं रोका जा सकता।
इस संबंध में आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 100 का हवाला दिया। यह धारा स्पष्ट करती है कि इस अधिनियम के तहत मिलने वाले कानूनी उपाय दूसरे कानूनों के तहत उपलब्ध उपायों के अतिरिक्त हैं, न कि उनके विकल्प के रूप में।
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आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले Shriram Chits (India) Private Limited v. Raghachand Associates का भी उल्लेख किया। इस फैसले का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि चिट फंड में पैसा लगाने वाला व्यक्ति उपभोक्ता और चिट फंड संचालक सेवा प्रदाता के रूप में माना जा सकता है।
इसी आधार पर आयोग ने माना कि अलग से चेक बाउंस की कार्यवाही चलने के बावजूद विष्णुप्रसाद उपभोक्ता आयोग से राहत पाने के हकदार थे।
कंपनी को ब्याज समेत चुकाने होंगे ₹4.08 लाख
उपभोक्ता आयोग ने विष्णुप्रसाद की शिकायत स्वीकार करते हुए Samith Chits को अपने प्रबंध निदेशक के माध्यम से ₹4,07,940 का भुगतान करने का आदेश दिया। इस रकम पर शिकायत दर्ज करने की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान होने तक 6.5% सालाना ब्याज भी देना होगा।इसके अलावा, कंपनी को मुकदमे की कार्यवाही के खर्च के रूप में ₹3,000 भी देने होंगे।
आदेश के मुताबिक, Samith Chits को आदेश प्राप्त होने की तारीख से 30 महीने के भीतर इसका पालन करना होगा। कंपनी को आदेश मिलने की तारीख से 45 दिनों के भीतर आयोग के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट भी जमा करनी होगी।
इस फैसले से विष्णुप्रसाद को चिट फंड की बकाया रकम के लिए राहत मिली है। साथ ही, आयोग ने उपभोक्ता शिकायत के जरिए अपना पैसा वापस पाने की कोशिश में हुए खर्च के भुगतान का भी निर्देश दिया है।





