e-Shram Portal Registration: गिग वर्कर्स की चमकेगी किस्मत, ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की तारीख का हुआ एलान

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भारत में जोमैटो, स्विगी, ओला और उबर जैसी कंपनियों के लिए काम करने वाले गिग वर्कर्स के लिए एक बहुत अच्छी खबर आ रही है। सरकार अब इन कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के फायदे देने के लिए बहुत तेजी से काम कर रही है। श्रम मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी आशुतोष पेडनेकर ने बताया कि सरकार इस सेक्टर को बेहतर बनाने और कर्मचारियों की सुरक्षा पक्की करने के लिए नए नियम तैयार कर रही है। आज के समय में इस सेक्टर से लगभग 1 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं और उम्मीद है कि इस दशक के खत्म होने तक यह संख्या बढ़कर ढाई करोड़ तक पहुंच जाएगी।
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गिग वर्कर्स को कौन-कौन से फायदे मिलेंगे?

सरकार का सबसे बड़ा मकसद इन कर्मचारियों को जरूरी सुविधाएं और सुरक्षा देना है। इसके लिए नीचे दिए गए फायदे देने की कोशिश की जा रही है:
  • एक्सीडेंट इंश्योरेंस: काम के दौरान अगर कोई दुर्घटना हो जाती है, तो कर्मचारी को आर्थिक मदद दी जाएगी।
  • हेल्थ कवर और मैटरनिटी सपोर्ट: बीमारी के इलाज के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी और महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी (प्रसूति) सहायता भी दी जाएगी।
  • बुढ़ापे की सुरक्षा: कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए बुढ़ापे में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।
  • अन्य मदद: बच्चों की पढ़ाई के लिए एजुकेशनल लोन और अंतिम संस्कार के खर्च के लिए भी सहायता राशि दी जाएगी।

सरकार इसके लिए क्या नए कदम उठा रही है?

इस पूरे कानून को सही तरीके से लागू करने के लिए सरकार दो बहुत बड़े कदम उठा रही है। पहला कदम यह है कि एक नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड बनाया गया है, जो खास तौर पर गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की भलाई के लिए काम करेगा। दूसरा बड़ा कदम यह है कि इन सभी योजनाओं के लिए पैसा जुटाने के लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड बनाया जा रहा है। सरकार इस समय फंड मैनेजरों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि मिलने वाली मदद का पैसा सीधे और बिना किसी देरी के कर्मचारियों तक पहुंच सके।

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कंपनियों को ई-श्रम पोर्टल से क्यों जोड़ा जा रहा है?

सरकार के पास इस पूरे प्लान को कामयाब बनाने का सबसे बड़ा हथियार 'ई-श्रम' पोर्टल है। सरकार चाहती है कि सभी कंपनियां अपने वर्कर्स का पूरा डेटा इस पोर्टल पर अपलोड कर दें। इससे कंपनियों का डेटाबेस सीधे ई-श्रम पोर्टल से जुड़ जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कर्मचारियों को मिलने वाले फायदों की रियल-टाइम ट्रैकिंग हो सकेगी, यानी सब कुछ तुरंत अपडेट होगा। कर्मचारी एक मोबाइल ऐप के जरिए अपनी सभी सुविधाओं और फायदों की पूरी जानकारी डिजिटल तरीके से देख सकेंगे। यह पूरा सिस्टम देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह काम करेगा, जिससे अगर कोई कर्मचारी एक कंपनी छोड़कर दूसरी कंपनी में भी जाता है, तो भी उसके फायदे बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे।

कंपनियों के लिए 22 जून की डेडलाइन क्यों जरूरी है?

श्रम मंत्रालय ने सभी प्लेटफॉर्म कंपनियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे 22 जून की आखिरी तारीख से पहले अपने सभी वर्कर्स का डेटा ई-श्रम पोर्टल के साथ लिंक कर दें। सरकार इस काम को बहुत ही सख्त समय सीमा के अंदर पूरा कर रही है। नीति निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे कर्मचारियों को पूरी सामाजिक सुरक्षा भी दें और साथ ही कंपनियों के काम करने की आजादी भी बनी रहे, क्योंकि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ता हुआ सेक्टर है जो देश के युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार दे रहा है।





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