SIP बीच में बंद करने की गलती पड़ सकती है भारी, जानिए क्या है 7-5-3-1 नियम
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले ज्यादातर लोग सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को लंबे समय में पैसा बनाने का अच्छा तरीका मानते हैं। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव या अन्य कारणों से कई निवेशक कुछ साल बाद ही अपनी SIP बंद कर देते हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करने से निवेशकों को कंपाउंडिंग का पूरा लाभ नहीं मिल पाता और लंबी अवधि में बनने वाली बड़ी पूंजी का मौका छूट सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, SIP में सबसे बड़ा फायदा समय के साथ मिलने वाले कंपाउंडिंग रिटर्न का होता है। जितने लंबे समय तक निवेश जारी रहता है, उतना ही अधिक रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए बाजार में गिरावट के दौरान घबराकर SIP बंद करने के बजाय नियमित निवेश जारी रखना बेहतर माना जाता है।
इसी सोच को समझाने के लिए एक्सपर्ट 7-5-3-1 नियम की सलाह देते हैं। यह नियम निवेशकों को लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है।
इस नियम के अनुसार, अगर आपके वित्तीय लक्ष्य पूरे होने में 7 साल या उससे अधिक समय बचा है, तो बाजार में गिरावट आने पर भी SIP जारी रखनी चाहिए और निवेश बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। अगर लक्ष्य 5 साल दूर है, तो निवेशकों को घबराने के बजाय अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करते हुए नियमित निवेश जारी रखना चाहिए।
वहीं, यदि लक्ष्य तक पहुंचने में 3 साल का समय बचा है, तो निवेश की स्थिति का आकलन करते हुए जरूरत पड़ने पर जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई जा सकती है। जबकि लक्ष्य सिर्फ 1 साल दूर हो, तो धीरे-धीरे निवेश को सुरक्षित विकल्पों में ट्रांसफर करने पर विचार किया जा सकता है, ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो।
एक्सपर्ट मानते हैं कि SIP में सफलता का सबसे बड़ा मंत्र अनुशासन और धैर्य है। बाजार में उतार-चढ़ाव निवेश का सामान्य हिस्सा है, लेकिन ऐसे समय में निवेश जारी रखने वाले निवेशकों को लंबे समय में कंपाउंडिंग का बेहतर लाभ मिल सकता है।
इसलिए यदि आप SIP में निवेश कर रहे हैं, तो सिर्फ बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर इसे बंद करने का फैसला न लें। अपने वित्तीय लक्ष्य, निवेश अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें। लंबी अवधि तक नियमित निवेश बनाए रखना ही मोटा पैसा बनाने की दिशा में सबसे प्रभावी रणनीतियों में से एक माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, SIP में सबसे बड़ा फायदा समय के साथ मिलने वाले कंपाउंडिंग रिटर्न का होता है। जितने लंबे समय तक निवेश जारी रहता है, उतना ही अधिक रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए बाजार में गिरावट के दौरान घबराकर SIP बंद करने के बजाय नियमित निवेश जारी रखना बेहतर माना जाता है।
क्या है 7-5-3-1 नियम?
इसी सोच को समझाने के लिए एक्सपर्ट 7-5-3-1 नियम की सलाह देते हैं। यह नियम निवेशकों को लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है।
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इस नियम के अनुसार, अगर आपके वित्तीय लक्ष्य पूरे होने में 7 साल या उससे अधिक समय बचा है, तो बाजार में गिरावट आने पर भी SIP जारी रखनी चाहिए और निवेश बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। अगर लक्ष्य 5 साल दूर है, तो निवेशकों को घबराने के बजाय अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करते हुए नियमित निवेश जारी रखना चाहिए।
वहीं, यदि लक्ष्य तक पहुंचने में 3 साल का समय बचा है, तो निवेश की स्थिति का आकलन करते हुए जरूरत पड़ने पर जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई जा सकती है। जबकि लक्ष्य सिर्फ 1 साल दूर हो, तो धीरे-धीरे निवेश को सुरक्षित विकल्पों में ट्रांसफर करने पर विचार किया जा सकता है, ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो।
बाजार में उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं: एक्सपर्ट
एक्सपर्ट मानते हैं कि SIP में सफलता का सबसे बड़ा मंत्र अनुशासन और धैर्य है। बाजार में उतार-चढ़ाव निवेश का सामान्य हिस्सा है, लेकिन ऐसे समय में निवेश जारी रखने वाले निवेशकों को लंबे समय में कंपाउंडिंग का बेहतर लाभ मिल सकता है।
इसलिए यदि आप SIP में निवेश कर रहे हैं, तो सिर्फ बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर इसे बंद करने का फैसला न लें। अपने वित्तीय लक्ष्य, निवेश अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें। लंबी अवधि तक नियमित निवेश बनाए रखना ही मोटा पैसा बनाने की दिशा में सबसे प्रभावी रणनीतियों में से एक माना जाता है।





