सोना और चांदी के भाव में भारी उतार-चढ़ाव: इस हफ्ते कीमतों में बदलाव के 10 बड़े कारण

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सोने और चांदी की कीमतों में इन दिनों लगातार हलचल बनी हुई है। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर हुए बड़े बदलावों और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण कीमती धातुओं के भाव में भारी उठापटक देखने को मिली है। कभी यह तेजी से ऊपर जाते हैं, तो कभी मुनाफावसूली के कारण इनमें गिरावट आ जाती है।
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भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने-चांदी के भाव कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करते हैं। यदि आप भी कीमती धातुओं में निवेश करने की सोच रहे हैं, या पहले से निवेशित हैं, तो यह जानना बहुत जरूरी है कि इस सप्ताह कीमतों में अचानक बदलाव क्यों आ रहा है। आइए जानते हैं वे 10 बड़े कारण जो इस हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में हलचल पैदा कर रहे हैं।


1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व और ब्याज दरें

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों का असर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ता है। ब्याज दरों में स्थिरता और महंगाई को लेकर जताई गई चिंता के कारण निवेशकों का रुझान बदल रहा है। अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो सोने की कीमतों पर दबाव बना रहता है।


2. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रही तेजी से महंगाई का खतरा बढ़ जाता है। जब तेल महंगा होता है, तो लोग महंगाई से बचने के लिए सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी का रुख करते हैं, जिससे इनकी कीमतों को समर्थन मिलता है।

3. भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions)

मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में जारी तनाव और टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे समय में निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद संपत्ति मानते हैं, जिससे मांग बढ़ने पर कीमतों में तेजी आ जाती है।

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4. अमेरिकी डॉलर की चाल (US Dollar Index)

सोने का कारोबार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर में होता है। डॉलर सूचकांक में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे मांग में कमी आ सकती है।


5. केंद्रीय बैंकों की ओर से खरीदारी

दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, जिनमें भारत, पोलैंड और तुर्की जैसे देश शामिल हैं, अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए भारी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं। केंद्रीय बैंकों की इस निरंतर खरीदारी से सोने की कीमतों को एक मजबूत आधार (Floor support) मिलता है।

6. औद्योगिक मांग और सप्लाई का अंतर (Silver Deficit)

चांदी का उपयोग केवल आभूषणों में ही नहीं बल्कि सौर ऊर्जा (Solar Panels), इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स में बड़े पैमाने पर होता है। चांदी की मांग लगातार बनी हुई है जबकि उत्पादन में कमी आ रही है। इस आपूर्ति और मांग के अंतर के कारण चांदी में तेज हलचल देखने को मिल रही है।

7. शेयर बाजार का प्रदर्शन

जब शेयर बाजार में अधिक अस्थिरता या गिरावट आती है, तो निवेशक अपने पैसे को शेयर बाजार से निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले सोने और चांदी में लगाना पसंद करते हैं। इसके विपरीत, शेयर बाजार में तेजी के दौरान बुलियन की चमक थोड़ी फीकी पड़ती है।


8. मुद्रास्फीति (Inflation) के आंकड़े

दुनिया भर में महंगाई के आंकड़े तय करते हैं कि आगे की नीतियां कैसी होंगी। बढ़ती महंगाई को मात देने के लिए निवेशक सोने को एक बेहतरीन हेजिंग टूल मानते हैं, जिससे कीमतों में उछाल आता है।


9. त्योहारी और शादी का मौसम

भारत में सोने की मांग बहुत हद तक पारंपरिक त्योहारों और शादियों के सीजन पर निर्भर करती है। इस दौरान स्थानीय बाजारों में भौतिक सोने और चांदी की खरीदारी बढ़ जाती है, जो छोटी अवधि के लिए कीमतों को सहारा देती है।

10. निवेश पोर्टफोलियो का संतुलन

बाजार के विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि अपने निवेश पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने के लिए कम से कम 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा कीमती धातुओं में रखना चाहिए। इस सोच के चलते जब भी बाजार में गिरावट आती है, निवेशक खरीदारी का मौका (Dip buying) ढूंढते हैं, जिससे कीमतों में अचानक सुधार हो जाता है।

कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की उम्मीद है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय वैश्विक संकेतों, आर्थिक आंकड़ों और अपनी वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर ही निवेश करें।

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