Gratuity के नए नियम: क्या Gratuity बेसिक सैलरी पर मिलेगी या सीटीसी (CTC) पर, जानिए पूरा फॉर्मूला

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जब भी हम नई नौकरी शुरू करते हैं या पुरानी नौकरी छोड़ते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला सवाल ग्रेच्युटी (Gratuity) को लेकर आता है। ग्रेच्युटी किसी भी कर्मचारी को कंपनी की तरफ से मिलने वाला एकमुश्त लाभ होता है, जो उनकी लंबी और निरंतर सेवा के लिए दिया जाता है। पिछले कुछ समय में श्रम कानूनों (Labour Codes) में हुए बदलावों के बाद ग्रेच्युटी के नियमों में भी कई महत्वपूर्ण अपडेट हुए हैं।
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अक्सर कर्मचारियों के मन में यह उलझन रहती है कि आखिर ग्रेच्युटी की गणना बेसिक सैलरी पर की जाती है या फिर पूरे सीटीसी (CTC) पर। इस लेख में हम ग्रेच्युटी से जुड़े सभी नए नियमों और उसके सटीक फॉर्मूले को बहुत ही सरल भाषा में समझेंगे।


क्या है ग्रेच्युटी का नया नियम?

श्रम मंत्रालय के नए नियमों के अनुसार, ग्रेच्युटी की गणना के लिए 'वेतन' (Wages) की परिभाषा को काफी हद तक बदल दिया गया है।


पहले के समय में कई कंपनियां कर्मचारियों की बेसिक सैलरी को जानबूझकर बहुत कम (CTC का 20 से 30 प्रतिशत) रखती थीं और बाकी हिस्सों को भत्तों (Allowances) में जोड़ देती थीं। इससे कर्मचारियों को मिलने वाली ग्रेच्युटी की रकम बहुत कम हो जाती थी। लेकिन नए नियमों के अनुसार, अब आपकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर आपके कुल सीटीसी का कम से कम 50 प्रतिशत होना चाहिए।

यदि आपके भत्ते 50 प्रतिशत से अधिक हैं, तो उस अतिरिक्त राशि को आपके मूल वेतन (Basic Salary) में जोड़ दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अब आपकी ग्रेच्युटी की गणना एक बड़े आधार पर होगी, जिससे आपका ग्रेच्युटी का भुगतान काफी बढ़ जाएगा।

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ग्रेच्युटी की पात्रता (Eligibility) क्या है?

ग्रेच्युटी की पात्रता को लेकर भी नए नियमों में स्पष्टता दी गई है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस प्रकार के कर्मचारी हैं:

  • स्थायी कर्मचारी (Permanent Employees): पारंपरिक कर्मचारियों को ग्रेच्युटी के योग्य होने के लिए कम से कम 5 साल की निरंतर सेवा पूरी करनी होती है। यदि आपकी सेवा 4 साल और 6 महीने से अधिक है, तो उसे 5 साल के रूप में गिना जाता है।
  • फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी (Fixed-Term Employees): नए लेबर कोड के अनुसार, जो कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट या निश्चित अवधि के लिए काम करते हैं, उन्हें 5 साल तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है। वे 1 वर्ष पूरा करने के बाद ही अनुपातिक (Pro-rata) ग्रेच्युटी के हकदार बन जाते हैं।
  • मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में: यदि किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना में कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है, तो 5 साल की सेवा की शर्त लागू नहीं होती। इस स्थिति में नॉमिनी को ग्रेच्युटी का पूरा भुगतान किया जाता है।


ग्रेच्युटी की गणना कैसे की जाती है?

ग्रेच्युटी की गणना का फॉर्मूला काफी हद तक पहले जैसा ही है, लेकिन अंतिम वेतन (Last Drawn Salary) का आधार बढ़ने से राशि अपने आप बढ़ जाती है। ग्रेच्युटी का फॉर्मूला इस प्रकार है:

$$Gratuity = \frac{15 \times \text{Last Drawn Wages} \times \text{Completed Years of Service}}{26}$$
आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं:

  • मान लीजिए कि आपका कुल सीटीसी 1 लाख रुपये प्रति माह है।
  • पुराना नियम: अगर बेसिक सैलरी 30,000 रुपये थी, तो 10 साल की सेवा पर लगभग 1.73 लाख रुपये ग्रेच्युटी बनती थी।
  • नया नियम: अब बेसिक सैलरी कम से कम 50,000 रुपये (50 प्रतिशत नियम के अनुसार) होगी। इसी 10 साल की सेवा पर अब ग्रेच्युटी लगभग 2.88 लाख रुपये बनेगी।
इस प्रकार, ग्रेच्युटी का आधार बढ़ने से आपको लगभग 60 से 70 प्रतिशत तक अधिक लाभ मिल सकता है।



ग्रेच्युटी पर टैक्स छूट

आयकर के नियमों के अनुसार ग्रेच्युटी पर कर छूट (Tax Exemption) का प्रावधान है। यदि आप किसी निजी कंपनी में काम करते हैं, तो आपको 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी पर कोई आयकर नहीं देना होता है। यह सीमा पूरी तरह से कर-मुक्त है। यदि ग्रेच्युटी की राशि 20 लाख रुपये से अधिक होती है, तो अतिरिक्त राशि पर आपके आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है।

ग्रेच्युटी सामाजिक सुरक्षा का एक अहम हिस्सा है। नए नियमों ने कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की राशि को पहले से कहीं अधिक आकर्षक बना दिया है। यदि आप कंपनी बदलते हैं या रिटायर होते हैं, तो आपको अपने वेतन ढांचे को ध्यान में रखकर ही अपनी ग्रेच्युटी की गणना करनी चाहिए। यह सुनिश्चित करें कि आपके अंतिम वेतन में सही घटकों को शामिल किया गया हो।


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