दुनिया की 'डायमंड कैपिटल' किस शहर को कहा जाता है?

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क्या आप जानते हैं कि दुनिया के 84% कच्चे हीरे किस शहर से होकर गुजरते हैं? 500 से अधिक वर्षों के इतिहास और चार वैश्विक व्यापारिक केंद्रों के साथ एक यूरोपीय शहर आज भी दुनिया का निर्विवाद लीडर बना हुआ है। आइए जानते हैं दुनिया की असली 'डायमंड कैपिटल' के कुछ अनसुने रहस्य।
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हीरे कार्बन से बने दुर्लभ और चमकते रत्न हैं। यह पृथ्वी पर पाया जाने वाला सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है। वर्तमान में रूस दुनिया के लगभग 33% हीरों का उत्पादन करता है, जबकि अमेरिका कुल हीरा आभूषणों का लगभग 51% हिस्सा खरीदता है। बोत्सवाना की जवानेंग जैसी बड़ी खदानें हर साल 1.2 करोड़ कैरेट से अधिक उत्पादन करती हैं। वैश्विक स्तर पर हीरा आभूषण बाजार का मूल्य सालाना 80 अरब डॉलर से अधिक है।

लेकिन क्या आप उस शहर का नाम बता सकते हैं जो इन सबका केंद्र है? इस लेख में हम दुनिया की असली 'डायमंड कैपिटल' के इतिहास और प्रभाव के बारे में जानेंगे।


आखिर कौन सी जगह है दुनिया की डायमंड कैपिटल?

बेल्जियम के उत्तरी भाग में स्थित ऐतिहासिक शहर एंटवर्प को अक्सर 'दुनिया की हीरा राजधानी' कहा जाता है। अपनी रणनीतिक बंदरगाह स्थिति और कुशल कारीगरों के कारण 15वीं शताब्दी से ही इस शहर ने यह खिताब अपने पास रखा है।

आज दुनिया के लगभग 84% कच्चे हीरे और आधे पॉलिश किए हुए हीरे इसके प्रसिद्ध 'स्क्वायर माइल' से होकर गुजरते हैं। यह छोटा सा इलाका 1,500 से अधिक हीरा कंपनियों और चार प्रमुख हीरा एक्सचेंजों का घर है। यह शहर अपने 'एंटवर्प कट' और कड़े नैतिक मानकों के लिए प्रसिद्ध है, जो इसे रत्न व्यापार और बेहतरीन शिल्प कौशल का एक विश्वसनीय केंद्र बनाता है।

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हीरों के बारे में 5 कम ज्ञात तथ्य

  • अधिकांश हीरे 1 से 3.5 अरब साल पुराने हैं, यानी वे डायनासोर के आने से बहुत पहले पृथ्वी की गहराई में बन चुके थे।
  • यह एकमात्र रत्न है जो सिर्फ एक तत्व से बना है, यह पूरी तरह से कार्बन का एक अनूठा रूप है।
  • कठोर होने के बावजूद यदि हीरे को 763 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाए, तो वह जलकर कार्बन डाइऑक्साइड गैस में बदल जाएगा।
  • वैज्ञानिकों ने 'लूसी' नामक एक तारे की खोज की है जो वास्तव में 10 अरब खरब कैरेट का एक विशाल हीरा है।
  • उल्कापिंडों के टकराने वाले स्थानों पर पाया जाने वाला दुर्लभ खनिज 'लोंसडेलाइट' हीरे की तुलना में 58% अधिक कठोर माना जाता है।

एंटवर्प को ही डायमंड कैपिटल क्यों कहते हैं?

एंटवर्प ने ऐतिहासिक भाग्य और वैज्ञानिक महारत के अनूठे मिश्रण के माध्यम से यह खिताब हासिल किया है।

1. 500 साल पुरानी ऐतिहासिक विरासत

एंटवर्प की यात्रा 15वीं शताब्दी में शुरू हुई थी। शेल्ड नदी पर एक प्रमुख बंदरगाह होने के कारण यह भारत से आने वाले रत्नों के लिए एक आदर्श स्थान बन गया। 1447 में शहर ने हीरा व्यापारियों की सुरक्षा के लिए एक कानून बनाया था। इसके बाद 1476 में लोडेविक वान बर्केन ने 'स्केफ' (Scaif) का आविष्कार किया, जो हीरे की धूल से भरा एक पहिया था। इससे पहली बार हीरों के सभी पहलुओं को समान रूप से पॉलिश करना संभव हो पाया।

2. वैज्ञानिक सटीकता और ग्रेडिंग

आज एंटवर्प जेमोलॉजिकल साइंस में अग्रणी है। यहाँ 'एंटवर्प कट' को विकसित किया गया है जो प्रकाश के परावर्तन को अधिकतम करने के लिए सटीक गणितीय कोणों का उपयोग करता है। यहाँ की एचआरडी (HRD) एंटवर्प लैब दुनिया की सबसे उन्नत प्रयोगशालाओं में से एक है, जो हीरों की शुद्धता और उनके नैतिक स्रोतों की पुष्टि करती है।

3. विशाल वैश्विक बुनियादी ढांचा

शहर का 'स्क्वायर माइल' जिला दुनिया के 84% कच्चे हीरों का प्रबंधन करता है। यहाँ चार डायमंड बोर्स (ट्रेडिंग फ्लोर) हैं, जो इसे वैश्विक उद्योग के लिए 'वन-स्टॉप शॉप' बनाते हैं।


एंटवर्प, सूरत और दुबई की तुलना

एंटवर्प हीरा व्यापार में गुणवत्ता के मानक निर्धारित करता है और यहाँ दुर्लभ हीरों को प्रमाणित किया जाता है। दूसरी ओर भारत का सूरत शहर अपने कुशल श्रमिकों के लिए जाना जाता है, दुनिया के अधिकांश हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग यहीं होती है। दुबई भी अब एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। अपनी शून्य टैक्स नीति के कारण यह अफ्रीका और भारत के बीच एक व्यापारिक सेतु बन गया है।

एंटवर्प आज भी डायमंड कैपिटल है क्योंकि यह इतिहास को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ता है। भले ही सूरत और दुबई बड़ी संख्या में हीरों का प्रसंस्करण करते हों, लेकिन एंटवर्प वह मुख्य स्थान बना हुआ है जहाँ कीमतें तय होती हैं और गुणवत्ता की जांच की जाती है।



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