DU Viral Video: रामजस कॉलेज में छात्रों ने की 'भजन क्लबिंग', भक्ति गीतों पर जमकर हुआ डांस
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) का कैंपस हमेशा अपनी वाइब्रेंट लाइफस्टाइल और कुछ नया करने के जुनून के लिए जाना जाता है। लेकिन हाल ही में रामजस कॉलेज में जो नजारा दिखा, उसने न केवल सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है बल्कि 'भजन क्लबिंग' के एक नए कल्चर को भी जन्म दिया है।
रामजस कॉलेज में भक्ति और मॉडर्न बीट्स का संगम
सोचिए, एक तरफ डीजे की धमक हो, लेजर लाइट्स चमक रही हों और दूसरी तरफ जुबां पर 'हरे रामा हरे कृष्णा' या 'अच्युतम केशवम' जैसे भजन हों। रामजस कॉलेज के छात्रों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। हाल ही में कॉलेज परिसर में 'भजन क्लबिंग' नाइट का आयोजन किया गया, जिसका वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।
इस वीडियो में छात्र पूरी ऊर्जा के साथ भक्ति गीतों पर झूमते नजर आ रहे हैं। आम तौर पर क्लबिंग का नाम आते ही दिमाग में लाउड पॉप या ईडीएम संगीत आता है, लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी के इन युवाओं ने साबित कर दिया कि भक्ति को भी उतने ही उत्साह और 'स्वैग' के साथ मनाया जा सकता है।
क्या है 'भजन क्लबिंग' का क्रेज?
यह ट्रेंड केवल एक कॉलेज तक सीमित नहीं है। दरअसल, आज की 'जेन-जी' (Gen Z) पीढ़ी अध्यात्म को एक नए नजरिए से देख रही है। वे अपनी जड़ों से जुड़ना चाहते हैं लेकिन अपने अंदाज में। रामजस कॉलेज के इस कार्यक्रम में 'लीला बैंड' ने अपनी प्रस्तुति दी, जिसने पारंपरिक भजनों को मॉडर्न बीट्स के साथ पिरोकर एक ऐसा माहौल बना दिया कि छात्र खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए।
इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा जैसे गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का एक अभिनव तरीका है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, इंटरनेट दो हिस्सों में बंट गया। जहां बड़ी संख्या में लोग युवाओं के इस कदम की तारीफ कर रहे हैं और इसे 'पॉजिटिव वाइब्स' बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे परंपराओं का आधुनिकीकरण मान रहे हैं। हालांकि, छात्रों का कहना है कि भक्ति का कोई एक तय तरीका नहीं होता और अगर संगीत उन्हें ईश्वर के करीब महसूस कराता है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
कॉलेज लाइफ और नई पहचान
डीयू के कॉलेजों में अक्सर फेस्ट और स्टार नाइट्स की धूम रहती है, लेकिन 'वसंतोत्सव 2026' के तहत आयोजित इस भजन नाइट ने एक नई लकीर खींच दी है। यह आयोजन 10 दिनों तक चलने वाले उत्सव का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य छात्रों को भारतीय परंपराओं के करीब लाना था।
कुल मिलाकर, रामजस कॉलेज की इस रात ने यह संदेश दिया है कि आस्था और आधुनिकता साथ-साथ चल सकते हैं। यह युवाओं का अपना तरीका है यह कहने का कि वे अपनी संस्कृति पर गर्व करते हैं और उसे पूरी मस्ती के साथ सेलिब्रेट करना जानते हैं।
रामजस कॉलेज में भक्ति और मॉडर्न बीट्स का संगम
सोचिए, एक तरफ डीजे की धमक हो, लेजर लाइट्स चमक रही हों और दूसरी तरफ जुबां पर 'हरे रामा हरे कृष्णा' या 'अच्युतम केशवम' जैसे भजन हों। रामजस कॉलेज के छात्रों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। हाल ही में कॉलेज परिसर में 'भजन क्लबिंग' नाइट का आयोजन किया गया, जिसका वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में छात्र पूरी ऊर्जा के साथ भक्ति गीतों पर झूमते नजर आ रहे हैं। आम तौर पर क्लबिंग का नाम आते ही दिमाग में लाउड पॉप या ईडीएम संगीत आता है, लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी के इन युवाओं ने साबित कर दिया कि भक्ति को भी उतने ही उत्साह और 'स्वैग' के साथ मनाया जा सकता है।
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क्या है 'भजन क्लबिंग' का क्रेज?
यह ट्रेंड केवल एक कॉलेज तक सीमित नहीं है। दरअसल, आज की 'जेन-जी' (Gen Z) पीढ़ी अध्यात्म को एक नए नजरिए से देख रही है। वे अपनी जड़ों से जुड़ना चाहते हैं लेकिन अपने अंदाज में। रामजस कॉलेज के इस कार्यक्रम में 'लीला बैंड' ने अपनी प्रस्तुति दी, जिसने पारंपरिक भजनों को मॉडर्न बीट्स के साथ पिरोकर एक ऐसा माहौल बना दिया कि छात्र खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा जैसे गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का एक अभिनव तरीका है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, इंटरनेट दो हिस्सों में बंट गया। जहां बड़ी संख्या में लोग युवाओं के इस कदम की तारीफ कर रहे हैं और इसे 'पॉजिटिव वाइब्स' बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे परंपराओं का आधुनिकीकरण मान रहे हैं। हालांकि, छात्रों का कहना है कि भक्ति का कोई एक तय तरीका नहीं होता और अगर संगीत उन्हें ईश्वर के करीब महसूस कराता है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। कॉलेज लाइफ और नई पहचान
डीयू के कॉलेजों में अक्सर फेस्ट और स्टार नाइट्स की धूम रहती है, लेकिन 'वसंतोत्सव 2026' के तहत आयोजित इस भजन नाइट ने एक नई लकीर खींच दी है। यह आयोजन 10 दिनों तक चलने वाले उत्सव का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य छात्रों को भारतीय परंपराओं के करीब लाना था। कुल मिलाकर, रामजस कॉलेज की इस रात ने यह संदेश दिया है कि आस्था और आधुनिकता साथ-साथ चल सकते हैं। यह युवाओं का अपना तरीका है यह कहने का कि वे अपनी संस्कृति पर गर्व करते हैं और उसे पूरी मस्ती के साथ सेलिब्रेट करना जानते हैं।





