भारत में रसोई गैस का उपयोग करने वाले करोड़ों आम उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद जरूरी खबर है। केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल (Indane), भारत पेट्रोलियम (Bharat Gas) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HP Gas) ने घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी, जमाखोरी और दुरुपयोग को रोकने के लिए बुकिंग तथा डिलीवरी के नियमों में कई बड़े बदलाव किए हैं। इन नई व्यवस्थाओं के लागू होने के बाद अब आम जनता के लिए गैस बुक करने से लेकर घर पर सिलेंडर प्राप्त करने तक का तरीका पूरी तरह से बदल गया है। अगर आप भी अपने घर में एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको इन नए नियमों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए ताकि आने वाले दिनों में आपके घर की रसोई का बजट और गैस की सप्लाई प्रभावित न हो।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए तय हुआ सिलेंडर बुकिंग का नया लॉक-इन पीरियड
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब कोई भी उपभोक्ता अपनी मर्जी से लगातार गैस सिलेंडर बुक नहीं कर पाएगा। सरकार ने दो बुकिंग के बीच में एक निश्चित समयावधि यानी लॉक-इन पीरियड लागू कर दिया है। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में रहने वाले ग्राहकों के लिए बुकिंग का अंतर बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि एक सिलेंडर की डिलीवरी या बुकिंग के बाद आप अगले 25 दिनों से पहले दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर पाएंगे। वहीं, ग्रामीण इलाकों और ग्राम पंचायतों में रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह समय सीमा 45 दिन तय की गई है। डिजिटल सिस्टम को इस तरह अपडेट किया गया है कि यदि कोई ग्राहक इस तय अवधि से पहले बुकिंग करने की कोशिश करेगा, तो उसका आवेदन सॉफ्टवेयर द्वारा ऑटोमैटिक ब्लॉक कर दिया जाएगा।
डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड यानी ओटीपी के बिना नहीं मिलेगा गैस सिलेंडर
गैस सिलेंडर की सुरक्षित और सही डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए अब तेल कंपनियों ने डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) को पूरी तरह से अनिवार्य और स्थाई बना दिया है। पहले की तरह अब केवल कोई फिजिकल पासबुक, रसीद या ब्लू बुक दिखाकर सिलेंडर की डिलीवरी नहीं ली जा सकेगी। नई व्यवस्था के तहत जैसे ही आपका सिलेंडर रीफिल के लिए तैयार होकर आपके घर पहुंचेगा, आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक चार अंकों का वन-टाइम पासवर्ड यानी ओटीपी भेजा जाएगा। जब तक आप वह ओटीपी डिलीवरी बॉय को नहीं बताएंगे और वह उसे अपने सिस्टम में दर्ज नहीं करेगा, तब तक आपकी डिलीवरी पूरी नहीं मानी जाएगी। यह कदम गैस सिलेंडरों की चोरी रोकने और सही लाभार्थी तक गैस पहुंचाने के लिए उठाया गया है।
एक घर एक कनेक्शन नियम और पीएनजी ग्राहकों के लिए 30 दिनों की समय सीमा
सरकार देश के बड़े शहरों में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी (PNG) के नेटवर्क को तेजी से बढ़ा रही है। इसी के मद्देनजर 'वन हाउसहोल्ड, वन कनेक्शन' (One Household, One Connection) का नया नियम कड़ाई से लागू किया जा रहा है। यदि आपके इलाके में पीएनजी की पाइपलाइन आ चुकी है और आपने घर में पीएनजी का कनेक्शन लगवा लिया है, तो नए नियमों के अनुसार आपको अगले 30 दिनों के भीतर अपना पुराना एलपीजी घरेलू गैस कनेक्शन अनिवार्य रूप से सरेंडर करना होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक ही पते पर एलपीजी और पीएनजी दोनों का एक साथ होना पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि कोई पीएनजी उपभोक्ता 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर नहीं करता है, तो उसकी गैस सप्लाई तीन महीने के भीतर अपने आप बंद कर दी जाएगी। हालांकि, ग्राहकों की सुविधा के लिए ट्रांसफर वाउचर की व्यवस्था दी गई है, ताकि भविष्य में किसी गैर-पीएनजी क्षेत्र में शिफ्ट होने पर वे दोबारा एलपीजी कनेक्शन चालू करवा सकें।
ई-केवाईसी वेरिफिकेशन और सब्सिडी के लिए जरूरी दस्तावेज
सभी सामान्य और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन यानी ई-केवाईसी (e-KYC) करवाना बेहद जरूरी कर दिया गया है। जिन गैर-उज्ज्वला ग्राहकों ने अभी तक अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें अपने नजदीकी गैस वितरक के पास जाकर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करवा लेना चाहिए। इसके अलावा, सालाना मिलने वाले 12 सबसिडी वाले सिलेंडरों का लाभ सीधे अपने बैंक खाते में पाने के लिए आपका आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और बैंक खाता आपके एलपीजी उपभोक्ता आईडी से पूरी तरह लिंक होना चाहिए। नया कनेक्शन लेते समय भी अब आपको पूरी तरह से अपडेटेड केवाईसी फॉर्म, पते का प्रमाण, पहचान पत्र और पासपोर्ट साइज फोटो जमा करने होंगे, ताकि आपके रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रखा जा सके।
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