कटहल के बीज क्यों बन रहे हैं भविष्य का प्लांट प्रोटीन? वैज्ञानिक रिसर्च ने बढ़ाई दिलचस्पी
भारत में कटहल का इस्तेमाल सब्जी और फल दोनों रूपों में होता है, लेकिन इसके बीज अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। कई घरों में इन्हें फेंक दिया जाता है, जबकि अब वैज्ञानिक और फूड स्टार्टअप्स इन्हें भविष्य के पौष्टिक खाद्य पदार्थ के रूप में देख रहे हैं।
कटहल के बीजों को लेकर हाल के वर्षों में काफी रिसर्च हुई है और कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्लांट बेस्ड प्रोटीन का सस्ता और टिकाऊ स्रोत बन सकते हैं।
दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में लोग पारंपरिक रूप से इन बीजों को उबालकर या भूनकर खाते रहे हैं। अब यही स्थानीय खाद्य संस्कृति आधुनिक न्यूट्रिशन इंडस्ट्री का हिस्सा बनने लगी है।
कुछ रिसर्च प्रोजेक्ट्स में कटहल बीज प्रोटीन का इस्तेमाल मीट अल्टरनेटिव तैयार करने के लिए भी किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प हो सकता है।
कई कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे स्थानीय खाद्य संसाधनों पर ध्यान देना भविष्य की टिकाऊ अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी होगा।
जिस चीज को लंबे समय तक रसोई का बेकार हिस्सा समझा गया, वही अब हेल्थ और फूड टेक्नोलॉजी की दुनिया में नई संभावनाएं पैदा कर रही है।
कटहल के बीजों को लेकर हाल के वर्षों में काफी रिसर्च हुई है और कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्लांट बेस्ड प्रोटीन का सस्ता और टिकाऊ स्रोत बन सकते हैं।
पोषण से भरपूर होते हैं कटहल के बीज
कटहल के बीजों में प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं। इनमें रेजिस्टेंट स्टार्च भी होता है जो पाचन के लिए फायदेमंद माना जाता है।दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में लोग पारंपरिक रूप से इन बीजों को उबालकर या भूनकर खाते रहे हैं। अब यही स्थानीय खाद्य संस्कृति आधुनिक न्यूट्रिशन इंडस्ट्री का हिस्सा बनने लगी है।
फूड टेक कंपनियां क्यों दिखा रही रुचि
दुनिया भर में प्लांट बेस्ड फूड्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी वजह से कंपनियां नए विकल्प खोज रही हैं। कटहल के बीजों को पीसकर आटा बनाया जा रहा है जिसका इस्तेमाल कुकीज, स्नैक्स और हेल्थ मिक्स में किया जा रहा है।You may also like
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कुछ रिसर्च प्रोजेक्ट्स में कटहल बीज प्रोटीन का इस्तेमाल मीट अल्टरनेटिव तैयार करने के लिए भी किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प हो सकता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है फायदा
भारत दुनिया के बड़े कटहल उत्पादक देशों में शामिल है। अगर इसके बीजों का व्यावसायिक इस्तेमाल बढ़ता है तो किसानों और छोटे फूड व्यवसायों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सकता है।कई कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे स्थानीय खाद्य संसाधनों पर ध्यान देना भविष्य की टिकाऊ अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी होगा।
स्वाद और उपयोग दोनों में अलग
कटहल के बीजों का स्वाद हल्का नटी और आलू जैसा माना जाता है। इन्हें करी, सूप और स्नैक्स में इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ लोग इसे कॉफी के विकल्प के रूप में भूनकर भी प्रयोग कर रहे हैं।जिस चीज को लंबे समय तक रसोई का बेकार हिस्सा समझा गया, वही अब हेल्थ और फूड टेक्नोलॉजी की दुनिया में नई संभावनाएं पैदा कर रही है।









