कुछ लोग सुबह जल्दी कैसे उठ जाते हैं जबकि कुछ के लिए यह सबसे मुश्किल काम होता है?
सुबह 5 बजे उठकर दौड़ लगाने वाले लोगों को देखकर कई लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है। आखिर कुछ लोग इतनी आसानी से जल्दी कैसे जाग जाते हैं जबकि कुछ लोगों के लिए सुबह बिस्तर छोड़ना किसी चुनौती से कम नहीं होता?
लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि जल्दी उठना सिर्फ अनुशासन का मामला है। लेकिन वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि इसके पीछे हमारी जैविक घड़ी का बहुत बड़ा योगदान होता है।
यही प्रणाली तय करती है कि हमें कब नींद आएगी और कब हम सबसे ज्यादा सतर्क महसूस करेंगे।
कुछ लोगों की यह घड़ी सुबह के हिसाब से सेट होती है। ऐसे लोग सूर्योदय के आसपास आसानी से जाग जाते हैं। दूसरी ओर, कुछ लोगों की जैविक घड़ी देर रात तक सक्रिय रहती है।
यानी यदि आपके परिवार में कई लोग सुबह जल्दी उठते हैं, तो आपके भीतर भी वही प्रवृत्ति होने की संभावना अधिक हो सकती है।
इसका मतलब यह नहीं कि आदतें बदल नहीं सकतीं, लेकिन शुरुआत में हर व्यक्ति एक जैसी स्थिति में नहीं होता।
यही कारण है कि किशोरों को सुबह जल्दी स्कूल भेजना कई बार उनके लिए कठिन साबित होता है।
रात में स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी शरीर को यह संकेत देती है कि अभी दिन खत्म नहीं हुआ है। इससे नींद देर से आती है और सुबह उठना मुश्किल हो जाता है।
इन छोटे बदलावों से शरीर की प्राकृतिक घड़ी बेहतर तरीके से काम करने लगती है।
लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि जल्दी उठना सिर्फ अनुशासन का मामला है। लेकिन वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि इसके पीछे हमारी जैविक घड़ी का बहुत बड़ा योगदान होता है।
शरीर के अंदर मौजूद है एक प्राकृतिक घड़ी
हर व्यक्ति के शरीर में एक प्राकृतिक समय प्रणाली होती है जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है।यही प्रणाली तय करती है कि हमें कब नींद आएगी और कब हम सबसे ज्यादा सतर्क महसूस करेंगे।
कुछ लोगों की यह घड़ी सुबह के हिसाब से सेट होती है। ऐसे लोग सूर्योदय के आसपास आसानी से जाग जाते हैं। दूसरी ओर, कुछ लोगों की जैविक घड़ी देर रात तक सक्रिय रहती है।
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जीन भी निभाते हैं अहम भूमिका
वैज्ञानिकों ने पाया है कि हमारी नींद की आदतों पर जीन का भी प्रभाव पड़ता है।यानी यदि आपके परिवार में कई लोग सुबह जल्दी उठते हैं, तो आपके भीतर भी वही प्रवृत्ति होने की संभावना अधिक हो सकती है।
इसका मतलब यह नहीं कि आदतें बदल नहीं सकतीं, लेकिन शुरुआत में हर व्यक्ति एक जैसी स्थिति में नहीं होता।
उम्र के साथ बदलती हैं आदतें
बचपन में अधिकांश बच्चे जल्दी उठ जाते हैं। किशोरावस्था में लोग देर रात तक जागने लगते हैं। इसके बाद उम्र बढ़ने के साथ कई लोग फिर से जल्दी उठने लगते हैं।यही कारण है कि किशोरों को सुबह जल्दी स्कूल भेजना कई बार उनके लिए कठिन साबित होता है।
स्क्रीन का बढ़ता असर
मोबाइल फोन और लैपटॉप ने हमारी नींद की आदतों को काफी प्रभावित किया है।रात में स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी शरीर को यह संकेत देती है कि अभी दिन खत्म नहीं हुआ है। इससे नींद देर से आती है और सुबह उठना मुश्किल हो जाता है।
अच्छी नींद के लिए क्या करें?
सोने और जागने का समय तय रखें। सोने से पहले स्क्रीन का उपयोग कम करें और दिन में पर्याप्त शारीरिक गतिविधि करें।इन छोटे बदलावों से शरीर की प्राकृतिक घड़ी बेहतर तरीके से काम करने लगती है।









