On this day: कार्ल हूपर का वो तूफानी शतक और कपिल-शास्त्री का संघर्ष, जानें ग्वालियर वनडे की कहानी
मैच की शुरुआत भारतीय कप्तान रवि शास्त्री के टॉस जीतने के साथ हुई, जिन्होंने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। वेस्टइंडीज के लिए डेसमंड हेन्स और फिल सिमंस पारी की शुरुआत करने आए। हालांकि, भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत में कसी हुई गेंदबाजी की और हेन्स को संजीव शर्मा ने जल्द ही बोल्ड कर दिया। इसके बाद विव रिचर्ड्स और रिची रिचर्डसन ने पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन वे भी बड़ी पारियां खेलने में नाकाम रहे। 103 रन के स्कोर पर 4 विकेट गिर जाने के बाद ऐसा लग रहा था कि भारतीय गेंदबाज मैच पर पकड़ बना लेंगे।
दूसरी तरफ, कार्ल हूपर अलग ही अंदाज में नजर आए। उन्होंने न केवल पारी को संभाला बल्कि अंतिम ओवरों में तेजी से रन बटोरे। हूपर ने 97 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 113 रन बनाए। उनकी इस पारी में 12 शानदार चौके और 2 छक्के शामिल थे। हूपर की इस आक्रामक बल्लेबाजी की बदौलत वेस्टइंडीज ने निर्धारित 50 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 278 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। भारत की ओर से अर्शद अयूब ने 2 विकेट चटकाए, जबकि कपिल देव काफी महंगे साबित हुए।
श्रीकांत (9), अरुण लाल (0), मोहिंदर अमरनाथ (3) और डब्लू वी रमन (1) जैसे बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके। पैटरसन की रफ्तार और उछाल के आगे भारतीय बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। 15 रन पर 4 विकेट गिर जाने के बाद भारत की जीत की उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी थीं।
इसके बाद कप्तान रवि शास्त्री ने एक छोर संभाले रखा। उन्होंने 72 गेंदों पर नाबाद 73 रनों की पारी खेली और 11 चौके लगाए। शास्त्री ने पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ मिलकर हार के अंतर को कम करने की पूरी कोशिश की।
इस शानदार जीत के साथ वेस्टइंडीज ने सीरीज में 5-1 की बढ़त बना ली। कार्ल हूपर को उनकी मैच जिताऊ शतकीय पारी के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। यह मैच आज भी हूपर की क्लासिक बल्लेबाजी और पैटरसन की खौफनाक गेंदबाजी के लिए याद किया जाता है।
कार्ल हूपर और गस लोगी का पलटवार
जब वेस्टइंडीज की टीम मुश्किल में थी, तब कार्ल हूपर क्रीज पर आए और मैच का रुख ही बदल दिया। हूपर ने गस लोगी के साथ मिलकर भारतीय गेंदबाजों की जमकर खबर ली। गस लोगी ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए 84 गेंदों पर 54 रन बनाए और हूपर को स्ट्राइक रोटेट करते रहे।दूसरी तरफ, कार्ल हूपर अलग ही अंदाज में नजर आए। उन्होंने न केवल पारी को संभाला बल्कि अंतिम ओवरों में तेजी से रन बटोरे। हूपर ने 97 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 113 रन बनाए। उनकी इस पारी में 12 शानदार चौके और 2 छक्के शामिल थे। हूपर की इस आक्रामक बल्लेबाजी की बदौलत वेस्टइंडीज ने निर्धारित 50 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 278 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। भारत की ओर से अर्शद अयूब ने 2 विकेट चटकाए, जबकि कपिल देव काफी महंगे साबित हुए।
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भारतीय पारी
279 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज पैट्रिक पैटरसन ने भारतीय टॉप ऑर्डर की कमर तोड़ दी। स्कोरबोर्ड पर अभी 15 रन ही जुड़े थे कि भारत के 4 प्रमुख बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे।श्रीकांत (9), अरुण लाल (0), मोहिंदर अमरनाथ (3) और डब्लू वी रमन (1) जैसे बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके। पैटरसन की रफ्तार और उछाल के आगे भारतीय बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। 15 रन पर 4 विकेट गिर जाने के बाद भारत की जीत की उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी थीं।
मध्यक्रम का संघर्ष
बेहद नाजुक स्थिति में मोहम्मद अजहरुद्दीन और कपिल देव ने पारी को संभालने की कोशिश की। अजहरुद्दीन ने 23 रन बनाए, लेकिन असली संघर्ष कपिल देव और रवि शास्त्री ने दिखाया। कपिल देव ने अपने चिर-परिचित अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 42 गेंदों पर 52 रन बनाए, जिसमें 8 चौके और 1 छक्का शामिल था। उन्होंने वेस्टइंडीज के गेंदबाजों पर जवाबी हमला करने की कोशिश की, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें ज्यादा साथ नहीं मिला।इसके बाद कप्तान रवि शास्त्री ने एक छोर संभाले रखा। उन्होंने 72 गेंदों पर नाबाद 73 रनों की पारी खेली और 11 चौके लगाए। शास्त्री ने पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ मिलकर हार के अंतर को कम करने की पूरी कोशिश की।
मैच का परिणाम
अंततः भारतीय पारी 41वें ओवर में 205 रनों पर सिमट गई। नरेंद्र हिरवानी, जो अपना वनडे डेब्यू कर रहे थे, आखिरी विकेट के रूप में आउट हुए। वेस्टइंडीज ने यह मुकाबला 73 रनों के बड़े अंतर से जीत लिया। गेंदबाजी में वेस्टइंडीज के लिए पैट्रिक पैटरसन सबसे सफल रहे, जिन्होंने 8 ओवर में 29 रन देकर 4 महत्वपूर्ण विकेट झटके। विव रिचर्ड्स ने भी 2 विकेट अपने नाम किए।इस शानदार जीत के साथ वेस्टइंडीज ने सीरीज में 5-1 की बढ़त बना ली। कार्ल हूपर को उनकी मैच जिताऊ शतकीय पारी के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। यह मैच आज भी हूपर की क्लासिक बल्लेबाजी और पैटरसन की खौफनाक गेंदबाजी के लिए याद किया जाता है।





